केरल में वीडी सतीशन होंगे नए मुख्यमंत्री, कांग्रेस ने दस दिन बाद किया ऐलान
- कांग्रेस नेतृत्व ने लंबी चर्चा और रायशुमारी के बाद सतीशन के नाम पर लगाई मुहर
- यूडीएफ को चुनाव में मिली बड़ी जीत, मुख्यमंत्री चयन को लेकर पार्टी में चला गुटीय संघर्ष
तिरुवनंतपुरम। केरल में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के दस दिन बाद कांग्रेस ने आखिरकार मुख्यमंत्री पद के लिए वी. डी. सतीशन के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया। 61 वर्षीय सतीशन पारावूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता दीपा दासमुंशी ने गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 7 मई को तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस नेतृत्व की महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ विस्तृत चर्चा के बाद वी. डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में वी. डी. सतीशन के अलावा के. सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहे थे। चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर कई दिनों तक गहन मंथन चलता रहा। पार्टी के अलग-अलग गुट अलग-अलग नेताओं के समर्थन में सक्रिय थे। सतीशन को युवा सोच और आक्रामक विपक्षी चेहरे के रूप में देखा जाता रहा है, जबकि वेणुगोपाल को केंद्रीय नेतृत्व का करीबी माना जाता है। रमेश चेन्निथला भी लंबे समय से राज्य राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार अधिकांश विधायक के. सी. वेणुगोपाल के पक्ष में बताए जा रहे थे। रिपोर्टों में दावा किया गया कि कांग्रेस विधायकों की बैठक में लगभग 75 से 80 प्रतिशत विधायकों ने वेणुगोपाल का समर्थन किया था, जबकि सतीशन के पक्ष में केवल छह विधायक बताए गए। हालांकि बैठक के बाद पार्टी के तीन पूर्व प्रदेश अध्यक्षों ने खुलकर सतीशन के नाम का समर्थन किया। इसके अतिरिक्त संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा के सहयोगी दल भारतीय संघ मुस्लिम लीग और केरल कांग्रेस (जोसेफ) ने भी सतीशन को समर्थन देने की घोषणा की थी। इससे उनके पक्ष में राजनीतिक माहौल मजबूत होता गया। मुख्यमंत्री चयन को लेकर राज्य में राजनीतिक हलचल भी तेज रही। कांग्रेस समर्थकों द्वारा वायनाड सहित कई इलाकों में पोस्टर लगाए गए, जिनमें वी. डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की गई। कुछ पोस्टरों में केंद्रीय नेतृत्व को चेतावनी देते हुए लिखा गया कि यदि के. सी. वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया गया तो इसका राजनीतिक असर भविष्य में देखने को मिलेगा। वायनाड में लगे कुछ पोस्टरों में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का उल्लेख करते हुए तीखी राजनीतिक टिप्पणियां भी की गईं। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि मुख्यमंत्री चयन केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन का बड़ा सवाल बन चुका था। कोट्टायम से विधायक राधाकृष्णन ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने सभी पक्षों की राय को गंभीरता से सुना और पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक ढंग से पूरी की गई। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी इस पूरी प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल रहे और लगातार नेताओं से चर्चा करते रहे। राधाकृष्णन ने कहा कि जब कई योग्य नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हों, तब भ्रम और मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन अंततः पार्टी ने सर्वसम्मति से फैसला लिया। वी. डी. सतीशन के नाम की घोषणा होते ही तिरुवनंतपुरम स्थित कांग्रेस कार्यालय में समर्थकों ने जश्न मनाया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटी और आतिशबाजी कर खुशी व्यक्त की। सतीशन ने भी पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी के निर्णय को सर्वोपरि माना है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने उन्हें बुलाकर स्थिति पर चर्चा की और उनकी राय जानी। उन्होंने कहा कि एक सच्चे कांग्रेसी के रूप में वह पार्टी के फैसले के साथ पूरी निष्ठा से काम करेंगे। केरल विधानसभा चुनाव में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा ने 140 में से 102 सीटों पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया है। इनमें कांग्रेस को अकेले 63 सीटें मिली हैं। इस बड़ी जीत के बाद कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री के चयन की थी, जो अब समाप्त हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वी. डी. सतीशन के नेतृत्व में कांग्रेस राज्य में नई राजनीतिक दिशा देने की कोशिश करेगी।


