विधानसभा में 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ का बजट पेश, वित्त मंत्री का मंत्र 12 मिनट का अभिभाषण, कोई बड़ी योजना नहीं
- 94 लाख गरीब परिवारों को सशक्त बनाने का लक्ष्य: 5 नए एक्सप्रेस-वे की मिली सौगात, महिला सशक्तिकरण पर फोकस
पटना। बिहार विधानसभा में मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2025–26 का बजट पेश होते ही सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई। वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने सदन के पटल पर 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट रखा, जो आकार के लिहाज से अब तक के बड़े बजटों में शामिल है। पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में यह बजट करीब 30 हजार करोड़ रुपये अधिक है। खास बात यह रही कि वित्त मंत्री का बजट भाषण मात्र 12 मिनट में पूरा हो गया, जिसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
बजट का आकार और सरकार का दावा
वित्त मंत्री ने अपने संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित संबोधन में कहा कि बिहार का बजट पिछले कुछ वर्षों से लगातार बढ़ रहा है और यह राज्य की आर्थिक मजबूती का संकेत है। सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2025–26 में बिहार की आर्थिक वृद्धि दर 14.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। उन्होंने दावा किया कि सरकार विकास को समावेशी बनाने की दिशा में काम कर रही है और इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
विकास का मंत्र और प्राथमिकताएं
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने “ज्ञान, ईमान, विज्ञान, अरमान और सम्मान” को सरकार का विकास मंत्र बताया। उनके अनुसार इन्हीं मूल मूल्यों के सहारे बिहार को विकसित राज्यों की कतार में खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। बजट में शिक्षा, बुनियादी ढांचा, कृषि, उद्योग और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि इन प्राथमिकताओं के बावजूद कोई ऐसी नई योजना नहीं दिखती, जो आम जनता को तुरंत राहत या नया भरोसा दे सके।
गरीब परिवारों पर फोकस
इस बजट में 94 लाख गरीब परिवारों को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि इन परिवारों के लिए आवास, स्वरोजगार और आजीविका से जुड़ी योजनाओं को और मजबूत किया जाएगा। ग्रामीण और शहरी गरीबों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए मौजूदा योजनाओं के दायरे को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सरकार का दावा है कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन पर भी कुछ हद तक अंकुश लगेगा।
कृषि और उद्योग को गति देने की योजना
कृषि क्षेत्र को बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए चौथे कृषि रोडमैप को और विस्तार देने की घोषणा की गई है। इसके तहत सिंचाई, बीज, उर्वरक, तकनीक और विपणन से जुड़े पहलुओं पर ध्यान देने की बात कही गई है। वहीं उद्योग क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए करीब 50 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर में एक्सप्रेस-वे की सौगात
बजट की बड़ी घोषणाओं में राज्य को पांच नए एक्सप्रेस-वे देने की बात शामिल रही। सरकार का कहना है कि इन एक्सप्रेस-वे से न सिर्फ यातायात व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि व्यापार और उद्योग को भी गति मिलेगी। बेहतर सड़क संपर्क से जिलों के बीच दूरी कम होगी और आर्थिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा।
महिला सशक्तिकरण पर जोर
बजट में महिला सशक्तिकरण को भी खास अहमियत दी गई है। सरकार ने महिलाओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं को प्राथमिकता देने की बात कही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार और सुरक्षा के क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का दावा किया गया है। सत्ता पक्ष का कहना है कि यह बजट महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और कदम है।
सदन में हंगामा और विपक्ष का विरोध
बजट पेश होने के साथ ही विधानसभा में राजनीतिक सरगर्मी भी देखने को मिली। नीट छात्रा रेप-मौत मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। भाकपा माले के विधायक अरुण सिंह ने इस मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए प्रस्ताव खारिज कर दिया कि मामले की जांच जारी है। इससे विपक्षी खेमे में नाराजगी दिखी। कार्यवाही से पहले राजद विधायकों ने विधानसभा के पोर्टिको में प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेकर उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए और सरकार पर विफलता का आरोप लगाया। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि बजट घिसा-पिटा है और इसमें आम लोगों के लिए कुछ नया नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार पर भी बिहार के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया।
नेता प्रतिपक्ष की गैरमौजूदगी
इस बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव स्वास्थ्य कारणों से सदन में मौजूद नहीं रहे। हाल ही में उनके पैर के अंगूठे का ऑपरेशन हुआ है। बजट सत्र के पहले दिन वे व्हीलचेयर पर सदन पहुंचे थे, लेकिन मंगलवार को उनकी अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही।
सरकार बनाम विपक्ष की बहस
बजट को लेकर सत्ता पक्ष ने इसे विकासोन्मुखी और संतुलित बताया, जबकि विपक्ष ने इसे दिशाहीन करार दिया। सरकार जहां गरीब परिवारों, कृषि, उद्योग, बुनियादी ढांचे और महिला विकास पर फोकस की बात कर रही है, वहीं विपक्ष कानून-व्यवस्था, शिक्षा और केंद्रीय सहयोग जैसे मुद्दों को लेकर हमलावर है। आने वाले दिनों में बजट पर विस्तृत चर्चा के दौरान यह साफ होगा कि यह बजट जमीन पर कितना असर डाल पाता है और राजनीतिक टकराव किस दिशा में जाता है।


