February 25, 2026

पटना एम्स में खत्म हुई डॉक्टर की हड़ताल, काम पर वापस लौटे, सुरक्षा का मिला आश्वासन

पटना। पटना एम्स में बीते पांच दिनों से जारी रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल मंगलवार को समाप्त कर दी गई है। डॉक्टरों ने यह फैसला मरीजों की समस्याओं को देखते हुए लिया है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल हड़ताल को केवल दस दिनों के लिए स्थगित किया गया है ताकि मरीजों का इलाज प्रभावित न हो। इस अवधि में प्रशासन की ओर से किए गए आश्वासनों को धरातल पर उतारने की निगरानी की जाएगी।
मांगों पर मिली आंशिक सफलता
डॉक्टरों के अनुसार उनकी कई प्रमुख मांगों को प्रशासन ने मान लिया है। सबसे अहम बात यह रही कि विधायक चेतन आनंद के साथ हुई झड़प के मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। वहीं, सुरक्षा को लेकर भी सकारात्मक कदम उठाए जाने का भरोसा मिला है। डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने की घोषणा के दौरान बताया कि वे जनहित और मरीजों की पीड़ा को समझते हैं, इसलिए अस्थायी रूप से कार्य पर लौटे हैं।
मरीजों को झेलनी पड़ी कठिनाइयां
हड़ताल के कारण ओपीडी, ऑपरेशन और अन्य चिकित्सकीय सेवाएं बुरी तरह प्रभावित थीं। दूर-दूर से इलाज के लिए आए मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। बीते पांच दिनों में लगभग 15 हजार मरीज बिना इलाज के वापस चले गए। इनमें से कई मरीज गंभीर बीमारी से ग्रसित थे। मंगलवार से ऑपरेशन सेवाएं भी पूरी तरह ठप थीं।
मदन यादव का मामला बना प्रतीक
बांका जिले के निवासी मदन यादव और उनके परिवार की स्थिति हड़ताल के दौरान पीड़ित मरीजों की कहानी का प्रतीक बन गई। पेट में संक्रमण के कारण उनका ऑपरेशन होना था, लेकिन डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें लगातार लौटना पड़ा। वे चलने-फिरने में असमर्थ हैं, इसलिए उनके बेटों को उन्हें हर दिन कंधे पर उठाकर लाना और वापस ले जाना पड़ता था। यह स्थिति न केवल भावनात्मक रूप से पीड़ादायक थी, बल्कि यह बताती है कि चिकित्सा सेवा के रुकने से आमजन पर क्या असर पड़ता है।
हड़ताल की पृष्ठभूमि: विधायक और डॉक्टरों के बीच टकराव
इस पूरी हड़ताल की शुरुआत 30 जुलाई की रात हुई, जब पटना एम्स में विधायक चेतन आनंद और रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच कथित तौर पर झड़प हुई। इस घटना के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल का रास्ता अपनाया और मांग की कि विधायक सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और दर्ज एफआईआर को वापस लें। हालांकि प्रशासन की ओर से प्राथमिकी दर्ज होने और सुरक्षा का भरोसा दिए जाने के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्त करने का फैसला किया।
डॉक्टरों की भूमिका और सामूहिक निर्णय
हड़ताल स्थगित करने की घोषणा में कई विभागों के रेजिडेंट डॉक्टर शामिल थे। इनमें डॉ. शुभम भारद्वाज (ऑर्थोपेडिक्स), डॉ. शिवम शर्मा (बर्न्स और प्लास्टिक सर्जरी), डॉ. अमन वर्मा, डॉ. अजय यादव, डॉ. राहुल कसौधन, डॉ. सिद्धार्थ सौरभ, डॉ. आनंद कुमार यादव, डॉ. प्राची जैन, डॉ. आस्था प्रियदर्शी सहित अन्य डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से इस निर्णय में भाग लिया।
अस्थायी समाधान, स्थायी समाधान की प्रतीक्षा
पटना एम्स में डॉक्टरों की वापसी से मरीजों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन यह सिर्फ अस्थायी समाधान है। अगर प्रशासन द्वारा किए गए आश्वासन समय पर पूरे नहीं किए गए तो हड़ताल फिर से शुरू हो सकती है। यह आवश्यक है कि भविष्य में डॉक्टरों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर स्पष्ट नीति बने ताकि मरीजों को इस प्रकार की कठिनाइयों से बार-बार न गुजरना पड़े।

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