February 25, 2026

दिल्ली में बड़े पैमाने पर भूकंप का मॉक ड्रिल, लोगों को किया गया जागरूक, युद्धस्तर पर हुआ अभ्यास

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर के नागरिक उस समय चौंक गए जब अचानक सायरनों की तेज आवाजें गूंजने लगीं और आपातकालीन वाहन जगह-जगह दौड़ने लगे। पहले पहल लोगों को लगा कि शायद कोई बड़ी दुर्घटना हो गई है, लेकिन जल्दी ही स्पष्ट हो गया कि यह दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) द्वारा आयोजित एक मेगा मॉक ड्रिल थी। इस अभ्यास का उद्देश्य भूकंप और औद्योगिक रासायनिक खतरों से निपटने की तैयारी का परीक्षण करना था।
‘सुरक्षा चक्र अभ्यास’ के तहत 55 से अधिक स्थानों पर ड्रिल
‘सुरक्षा चक्र अभ्यास’ के नाम से आयोजित इस मॉक ड्रिल को दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश के 18 जिलों में आयोजित किया गया। कुल मिलाकर 55 से अधिक स्थानों पर इस अभ्यास को अंजाम दिया गया, जिसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, दिल्ली पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, एनसीसी और अन्य राहत व बचाव एजेंसियों ने हिस्सा लिया।
दरियागंज में गोलचा सिनेमा बना अभ्यास स्थल
दिल्ली के दरियागंज स्थित गोलचा सिनेमा को इस अभ्यास के लिए एक विशेष स्थल बनाया गया था। वहां भूकंप आने की स्थिति को साकार किया गया, जिसमें एक इमारत के हिलने और लोगों के घायल होने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। राहत दलों ने एक घायल डमी को इमारत से बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे ‘अस्पताल’ पहुंचाया।
गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी व्यापक तैयारी
गुरुग्राम के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में भी इस अभ्यास के तहत बड़ा आयोजन हुआ। वहां एनडीआरएफ और स्थानीय राहत एजेंसियों ने ऊंची इमारतों से लोगों को रस्सियों की मदद से सुरक्षित नीचे उतारने का अभ्यास किया। वहीं सेक्टर 31 स्थित एक निजी क्लिनिक और बीके अस्पताल में डमी घायलों को लेकर तीव्र गति से राहत कार्य किया गया।
सटीकता और त्वरित प्रतिक्रिया ने छोड़ी गहरी छाप
यह पूरा अभ्यास इतनी सटीकता और तेजी से किया गया कि कई राहगीर यह समझ ही नहीं पाए कि यह महज एक मॉक ड्रिल है। कई स्थानों पर लोगों ने इसे असली हादसा समझकर घबराहट भी व्यक्त की, लेकिन बाद में उन्हें बताया गया कि यह केवल एक अभ्यास है।
संवेदनशील क्षेत्र में जागरूकता और समन्वय का प्रयास
डीडीएमए के अनुसार दिल्ली-एनसीआर भूकंप और औद्योगिक रासायनिक खतरों के लिहाज से एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। हाल के महीनों में मानसून के दौरान आए छोटे-छोटे भूकंपों ने इस खतरे की ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह अभ्यास किया गया, ताकि विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की क्षमता और प्रतिक्रिया समय को परखा जा सके।
जनता को जागरूक करने की दिशा में बड़ा कदम
इस ड्रिल का एक मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को आपदा की स्थिति में उचित कदम उठाने के प्रति जागरूक करना भी था। लोगों को दिखाया गया कि भूकंप या रासायनिक खतरे की स्थिति में किस प्रकार से सुरक्षित स्थान पर पहुंचा जाए, घायलों की मदद कैसे की जाए और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सहयोग कैसे किया जाए।
समग्र एकीकृत प्रयास
इस मॉक ड्रिल में केवल सरकारी एजेंसियां ही नहीं, बल्कि सशस्त्र बल, एनजीओ, बाजार संघ और स्थानीय प्रशासन ने भी सक्रिय भागीदारी की। यह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पहली बार हुआ जब इतनी बड़ी संख्या में विभिन्न संस्थाएं मिलकर एक समन्वित आपदा प्रबंधन अभ्यास का हिस्सा बनीं। दिल्ली-एनसीआर में आयोजित यह मेगा मॉक ड्रिल केवल एक प्रतीकात्मक अभ्यास नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण तैयारी है जो किसी भी संभावित आपदा से निपटने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। इससे एजेंसियों को अपनी कमियों को पहचानने का अवसर मिला और आम जनता को भी यह समझ में आया कि किसी आपदा की स्थिति में कैसे संयम और सतर्कता से काम लेना चाहिए।

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