प्रदेश में पटना समेत कई जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट, उमस भरी गर्मी से राहत, विभाग का पूर्वानुमान जारी
पटना। बिहार में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है और लगातार हो रही बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। शुक्रवार से शुरू हुई बारिश का असर राज्य के कई जिलों में देखा गया है। इस वर्षा से जहां आम जनजीवन को ठंडक मिली है, वहीं किसान वर्ग में भी उम्मीद की एक नई किरण जागी है। खेतों में पानी भरने से सिंचाई की समस्या काफी हद तक हल हो गई है।
राज्यभर में बारिश का सिलसिला जारी
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक राज्य में बारिश का दौर जारी रहेगा। शनिवार को सुबह से ही कई जिलों में तेज और रुक-रुक कर वर्षा दर्ज की गई है। खासकर दक्षिण बिहार के औरंगाबाद, रोहतास और भभुआ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अतिरिक्त पटना, गया, बक्सर, बेगूसराय समेत 14 अन्य जिलों में भी रुक-रुक कर वर्षा होने की संभावना है।
मौसम विभाग का येलो अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के 25 जिलों में वज्रपात (आकाशीय बिजली) की आशंका को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी है। हवा की गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जिससे जन-जीवन प्रभावित हो सकता है। विभाग ने विशेष रूप से पेड़ों के नीचे खड़े होने से मना किया है।
बारिश के कारण आई समस्याएं भी
जहां बारिश ने गर्मी से राहत दी है, वहीं कुछ स्थानों पर इससे संबंधित समस्याएं भी सामने आई हैं। नवादा के सदर अस्पताल में बारिश का पानी भर जाने से मरीजों और कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। पटना में भी पूरे दिन रुक-रुककर तेज बारिश और बूंदाबांदी होती रही। हालांकि दोपहर बाद हल्की धूप निकलने से थोड़ी उमस महसूस की गई।
कृषि पर बारिश का प्रभाव
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण यह बारिश हो रही है। यह दबाव क्षेत्र अब और अधिक सक्रिय हो चुका है और इसका प्रभाव अगले तीन दिनों तक बना रहेगा। राज्य में अब तक सामान्य से 44 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे धान की रोपनी बुरी तरह प्रभावित हुई है। अभी तक केवल 40 प्रतिशत खेतों में ही रोपनी हो सकी है, जबकि शेष 60 प्रतिशत खेतों में किसान अब भी पर्याप्त बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
किसानों के सामने नई चुनौती
जिन खेतों में रोपनी हो चुकी है, उनमें अब खाद की आवश्यकता बढ़ गई है। लेकिन इस दौरान खाद की कालाबाजारी की आशंका भी जताई जा रही है। किसानों के लिए यह एक नई चुनौती है, क्योंकि समय पर खाद नहीं मिलने पर फसलों को नुकसान हो सकता है। प्रशासन को चाहिए कि वह खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करे और इसकी कालाबाजारी पर सख्त नजर रखे। इस बार की वर्षा भले ही देरी से आई हो, लेकिन इससे गर्मी से परेशान लोगों और खेतों के सूखे हालात से जूझते किसानों को राहत मिली है। मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेना आवश्यक है ताकि किसी भी प्रकार की आपदा से बचा जा सके। आने वाले दिनों में यदि इसी प्रकार बारिश होती रही, तो कृषि कार्यों को गति मिलेगी और राज्य में कृषि उत्पादन की स्थिति सुधरेगी।


