बाढ़ प्रभावित सभी जिलों में मदद और राहत कार्य में जुटा ईमारत शरिया, सक्षम लोगों से की मदद करने की अपील
पटना, (अजित)। इमारत शरिया की ओर से सहरसा, दरभंगा पश्चमी चंपारण एवं सीतामढ़ी में बाढ़ से पीड़ित लोगों के बीच रिलीफ़ का काम जारी है। बाढ़ से पीड़ित स्थानों में साफ पानी बच्चों की आवश्यक खोराक दवाई एवं खाध सामग्री की कमी हैं। बाढ़ से पीड़ित स्थानों का इमारत शरिया के कार्यवाहक महा सचिव एवं अन्य जिम्मेदारों की जमीनी रिपोर्ट, आपब्दा की इस घड़ी में लोगों से पीड़ितों की मादद की अपील की।वर्तमान में बिहार के कई जिले बाढ़ से पीड़ित हैं और उससे जो भयानक परिस्थिति सामने आई है वह किसी भी दर्दमंद वयक्ति के दिल को झिंझोड्ने और रुला देने के लिए काफी है , वर्षा के थम जाने के बावजूद पानी का जमाओ बाक़ी है , जो लोग घरों को छोड़ कर टीलों , तबांधों और दूसरे सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं वह अति असहाय महसूस कर रहे हैं और ज़रूरत की बुनयादी चीजों से भी वंचित हैं , पीने के साफ पानी का अति- अभाव एवं बच्चों के आवश्यक खाद्य सामग्री की कमी से जूझ रहे हैं , महिलाएं एवं बच्चे खुले आसमान के नीचे जीवन गुज़ार रहे हैं , जो लोग कल तक अच्छे मकानों, आराम एवं राहत के बंगलों में थे इस समय परिस्थिति ने उन्हें जंगल-झाड के बीच कष्टपूर्ण जीवन बिताने पर मजबूर कर दिया है , आपदा के इस घड़ी में अमीर ए शरीयत हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी के आदेशानुसार इमारत शरिया की जो टीमें प्रभावित स्थानों में राहत का काम कर रही हैं उनकी रिपोर्ट के अनुसार हुकूमती-स्तर के प्रबंधन बिलकुल संतोषजनक नहीं है , खाना खिलाने के लिए जो लंगर बनाया गया है उसकी व्यवस्था भी बहुत कमजोर है , दवा दारू के लिए कहीं मुनासिब जगह पर कोई मेडिकल कैम्प भी नहीं है, भीड़ की स्थानों से दूर एक आध हेल्प कैम्प बहुत ही साधारण दर्जे के लगे हुए हैं , बाकायदा सरकारी आवासीय कैम्प और छत के साया का कोई भी व्यवस्था नहीं है , सरकार साफ पानी भी सप्लाई नहीं करवा पा रही है , इन परिस्थितियों में इमारत शरिया की ओर से ज़िला दरभंगा एवं सुपौल में कार्य वाहक सचिव जनाब मौलाना मोहम्मद शिबली कासमी साहब , जनाब अब्दुल वहाब साहब , जनाब हाजी एहसानूल हक़ साहब , मौलाना कमर अनीस कासमी साहब , क़ाज़ी अर्शद रहमनी साहब , मौलाना रिज़वान अहमद नदवी साहब, मुबल्लीगीन की एक बड़ी संख्या के साथ खाद्य सामग्री की किट्स पहूंचाने , कई स्थानों पर स्थाई खाने का लंगर चलवाने , साफ पानी पीड़ितों तक पहुंचाने और इमारत शरिया के हॉस्पिटल की ओर से मेडिकल कैम्प स्थापित करने के लिए कार्यरत है , अब तक दरभंगा में जमालपुर ,जकसु, कुबोल , भभोल , तितराही , तेरवारा , झ्गडवा , बगरस एवं सिमरी और ज़िला सुपौल में घूरण , सरतीपट्टी ,गिवोर और बेला तक यह टीम पहुँच चुकी है , पहले चरण में इन दोनों ज़िला के करीब पाँच हज़ार लोगों तक खाद्य-सामग्री की किट्स वितरण होनी है जिसे शुरू भी कर दिया गया है, और नए कपड़ों के 80 बंडल वितरण के लिए उन स्थानों तक पहुँच चुके हैं । खैन्सा के करीब मेडिकल कैम्प के माध्यम से दावा इलाज का कार्य भी शुरू कर दिया गया है , इमारत शरिया के कार्य वाहक सचिव ने अपनी टीम के साथ सुपौल के ए डीएम एवं आपदा प्रबंधन के जिम्मेदारों से भी मिलकर राहत कार्य को को बेहतर बनाने की ओर ध्यान केन्द्रित करने को कहा ,वहीं दूसरी ओर जनाब मौलाना मुफ़्ती मोहम्मद सानाउहुलदा साहब , मौलाना अहमद हुसैन कासमी साहब , तीन मुबल्लीगीन और ज़िला समिति पश्चमी चंपारण के जिम्मेदारों के साथ पश्चमी चंपारण के बाढ़ प्रभावित स्थानों में ट्रैक्टर एवं नाव से बाढ़ पीड़ितों तक पहुँच कर राहतकार्य में लगे हुए हैं। हज़रत अमीर ए शरियत साहब ने इस पड़े पैमाने की तबाही को देखते हुए बिहार सरकार को मुतवज्जह किया है कि वह पीड़ितों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए बेहतर स्वीधा उपलब्ध कराए एवं दावा इलाज को यक़ीनी बाए हज़रत अमीर ए शरीयत ने राज्य एवं राज्य के बाहर के दानी एवं दर्दमंद भाइयों से अपील की है कि आपदा की इस घड़ी में अपने भाइयों के काम करें।। अभी कई जिलों में राहत पहुंचाने का काम बाक़ी है एवं उन तमाम कामों और उसके बाद पुन: निर्माण कार्य में लाखों लाख रूपये के खर्च का अंदाज़ा है , इमारत शरिया के संसाधन सीमित हैं और अचानक एक बड़ी ज़रूरत सामने आ गई है , इस लिए तमाम दानी भाई(अहले खैर हजरात )इमारत शरिया के रिलीफ फंड में दिल खोल कर दान दें, अकाउंट और क्यूआर कोड के माध्यम से खाता में रुपया भेजें या डाइरेक्ट इमारत शरिया के बैतुल-माल में जमा कराएं। हज़रत अमीर ए शरीयत ने उलमा, इमामों और नकीब इमारत शरिया, तंजीम इमारत शरिया के जिम्मेदारों, अरकाने शूरा, एवं मजलिसे अरबाब ए हल व अक्द के सदस्यों से विशेष रूप से कहा कि आपदा कि इस घड़ी में भाइयों कि मदद के लिए अपने अपने इलाकों में आंदोलन चलाकर इमारत शरिया की ओर से जारी राहत कार्य में भाग लें, या स्वयं प्रभावित स्थानों तक पहुँच कर मदद पहुंचाने का कार्य करें


