एक जून से महंगा होगा सफर, बिहार में ऑटो और बस किराया बढ़ाने की तैयारी तेज

  • पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच परिवहन संचालकों ने जताई मजबूरी, 15 से 20 प्रतिशत तक किराया बढ़ाने के संकेत
  • पटना समेत कई शहरों में यात्रियों से अतिरिक्त किराया वसूली शुरू, प्रशासन ने दी कार्रवाई की चेतावनी

पटना। राजधानी पटना समेत पूरे बिहार में आम लोगों को एक जून से महंगाई का एक और बड़ा झटका लग सकता है। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बाद अब ऑटो और निजी बसों का किराया बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े संगठनों और वाहन संचालकों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि बढ़ती लागत के बीच पुराने किराए पर वाहन चलाना अब संभव नहीं रह गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यात्रियों को 15 से 20 प्रतिशत तक अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है। इसका सीधा असर रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। राजधानी पटना में इसका असर अभी से दिखाई देने लगा है। कई प्रमुख मार्गों पर ऑटो चालकों ने यात्रियों से अतिरिक्त किराया लेना शुरू कर दिया है। गांधी मैदान से पटना जंक्शन, पटना जंक्शन से शेखपुरा मोड़, सगुना मोड़ और आशियाना-दीघा मार्ग पर यात्रियों से पांच रुपये तक अधिक किराया लिया जा रहा है। हालांकि जिला प्रशासन ने बिना अनुमति किराया बढ़ाने को नियमों के खिलाफ बताया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर बेहद सीमित दिखाई दे रहा है। यात्रियों का कहना है कि विरोध करने पर कई बार ऑटो चालक सफर कराने से मना कर देते हैं। ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्क्स फेडरेशन के प्रांतीय महासचिव राजकुमार झा ने बताया कि टाटा पार्क ऑटो स्टैंड में ऑटो यूनियनों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में नए किराए की दरों को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीते कुछ महीनों में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे वाहन संचालन का खर्च काफी बढ़ गया है। ईंधन के अलावा वाहन रखरखाव, पुर्जों की कीमत और टैक्स का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पुराने किराए पर वाहन चलाना घाटे का सौदा बन चुका है। दूसरी ओर निजी बस संचालक भी किराया बढ़ाने की तैयारी में जुट गए हैं। 31 मई को रामाचक बैरिया बस स्टैंड में बस मालिकों की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें नई किराया दरों की घोषणा की जा सकती है। जानकारी के अनुसार, पटना से किशनगंज, अररिया, सुपौल, त्रिवेणीगंज, रानीगंज, पिपरा और जदिया जाने वाली कई बसों में पहले ही 50 से 100 रुपये तक किराया बढ़ चुका है। यात्रियों का कहना है कि अचानक बढ़े किराए ने लंबी दूरी की यात्रा को महंगा बना दिया है। बिहार राज्य मोटर परिवहन महासंघ के प्रमंडलीय अध्यक्ष चंदन कुमार ने कहा कि बसों का परिचालन खर्च अब काफी बढ़ गया है। डीजल की बढ़ती कीमत, वाहन मेंटेनेंस और विभिन्न करों के कारण संचालकों को भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किराया नहीं बढ़ाया गया तो कई बस संचालकों के लिए वाहन चलाना मुश्किल हो जाएगा। इसी वजह से एक जून से अधिकांश मार्गों पर 15 से 20 प्रतिशत तक किराया बढ़ाने का निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति किराया बढ़ाना गैरकानूनी है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले ऑटो और बस संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बावजूद इसके परिवहन संगठनों का कहना है कि वे हर हाल में किराया बढ़ाएंगे, क्योंकि वर्तमान परिस्थिति में पुराने किराए पर संचालन संभव नहीं है। इस प्रस्तावित बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और गरीब तबके पर पड़ने वाला है। रोजाना कामकाज, पढ़ाई और व्यवसाय के लिए सफर करने वाले लोगों का मासिक बजट प्रभावित होगा। पहले से ही खाद्य सामग्री, बिजली और घरेलू खर्चों की बढ़ती महंगाई से परेशान लोगों के लिए यह नई चिंता बन सकती है। छात्रों और नौकरीपेशा लोगों का कहना है कि अगर किराया बढ़ा तो हर महीने यात्रा पर अतिरिक्त खर्च उठाना मुश्किल हो जाएगा। यात्रियों के बीच अब इस बात को लेकर बेचैनी बढ़ गई है कि आखिर किराया कितना बढ़ेगा और सरकार इस पर क्या रुख अपनाएगी। फिलहाल सबकी नजर 31 मई और एक जून को होने वाली बैठकों पर टिकी हुई है, जहां ऑटो और बस किराए की नई दरों को अंतिम रूप दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इन बैठकों के बाद बिहार में सार्वजनिक परिवहन का सफर पहले से कहीं अधिक महंगा हो सकता है।

You may have missed