बिहार में फिर सक्रिय हुआ मानसून, कई जिलों में भारी वर्षा और वज्रपात का खतरा
- बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी वाली हवाओं और सक्रिय मानसूनी द्रोणी के कारण आठ अगस्त तक प्रदेशभर में वर्षा की संभावना
- नेपाल से आने वाली नदियों का बढ़ा जलस्तर, सीमावर्ती जिलों में बाढ़ का संकट गहराया, लोगों को सतर्क रहने की सलाह
पटना। बिहार में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मानसूनी द्रोणी के राज्य के आसपास सक्रिय रहने और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी युक्त पूर्वी हवाओं के प्रवेश के कारण पूरे प्रदेश में वर्षा का दौर जारी है। बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार आठ अगस्त तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुककर वर्षा होती रहेगी। इसके साथ ही कई जिलों में मेघ गर्जन, वज्रपात तथा भारी से अति भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए विशेष चेतावनी जारी की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के मौसम में लगातार बदलाव बना रहेगा और लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी। मौसम विभाग के अनुसार अगले चौबीस घंटों के दौरान राजधानी पटना सहित राज्य के सभी जिलों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है, जबकि बक्सर, गया, रोहतास, पूर्वी चंपारण, किशनगंज, सीतामढ़ी, अररिया, कटिहार और सिवान में भारी तथा अति भारी वर्षा होने के आसार हैं। इन जिलों में मेघ गर्जन और वज्रपात की भी प्रबल संभावना व्यक्त की गई है। इसके अलावा तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है। मौसम विज्ञानियों ने दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार के जिलों के लिए भी विशेष रूप से वज्रपात की चेतावनी जारी की है। लोगों को सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें। खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों तथा खुले स्थानों पर खड़े होने से बचें। किसानों, मजदूरों और खुले स्थानों पर कार्य करने वाले लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों का विशेष रूप से पालन करने की अपील की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। लगातार हो रही वर्षा का असर प्रदेश के तापमान पर भी दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है। इससे लोगों को उमस और भीषण गर्मी से राहत मिलेगी। साथ ही अगले तीन से चार दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की यह सक्रियता कृषि कार्यों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है, हालांकि अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में नुकसान की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। राजधानी पटना में सावन की रिमझिम वर्षा ने मौसम को सुहावना बना दिया है। लंबे समय से गर्मी और उमस से परेशान लोगों को राहत मिली है। हालांकि लगातार हो रही वर्षा के कारण शहर के कई निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई सड़कों पर पानी भर जाने से यातायात प्रभावित हुआ है और लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नगर क्षेत्रों में जलनिकासी व्यवस्था भी कई स्थानों पर चुनौती बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर, नेपाल से निकलने वाली नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से सीमावर्ती जिलों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है। विशेष रूप से अररिया जिले के कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है। पलासी प्रखंड के वार्ड संख्या तीन में अनेक परिवारों के घर जलमग्न हो गए हैं। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला एकमात्र चचरी पुल भी पानी में डूब चुका है, जिससे ग्रामीणों का संपर्क प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है और राहत एवं बचाव कार्यों पर नजर बनाए हुए है। हालांकि वर्तमान में राज्य के अधिकांश हिस्सों में अच्छी वर्षा हो रही है, फिर भी इस मानसून सत्र में बिहार में अब तक सामान्य से लगभग अड़तीस प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका अर्थ यह है कि मौजूदा सक्रिय मानसून के बावजूद राज्य अभी भी सामान्य वर्षा के स्तर से पीछे चल रहा है। मौसम विभाग का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक इसी प्रकार वर्षा जारी रहती है, तो वर्षा की कमी में कुछ हद तक सुधार संभव है।बिहार मौसम सेवा केंद्र ने नागरिकों से अपील की है कि मौसम विभाग द्वारा जारी सभी चेतावनियों और परामर्शों का गंभीरता से पालन करें। विशेष रूप से वज्रपात और तेज हवाओं के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें। प्रशासन भी संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी बनाए हुए है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित किया जा सके।


