January 30, 2026

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अनिवार्य होगा राष्ट्रगान और राज्य गीत, नियम उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

पटना। बिहार शिक्षा विभाग ने स्कूलों की कार्यप्रणाली और अनुशासन को सुदृढ़ बनाने के लिए नए और कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत अब सभी सरकारी विद्यालयों और मदरसों में बिहार राज्य गीत और राष्ट्रगान का गायन अनिवार्य कर दिया गया है। यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि छात्रों में राज्य और राष्ट्र के प्रति जागरूकता, सम्मान और सामूहिक भावनाओं का विकास हो सके।
प्रार्थना सभा में बिहार गीत का अनिवार्य गायन
नई एडवाइजरी के अनुसार, राज्य के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के सभी विद्यालयों में प्रतिदिन सुबह 9:30 बजे से 10:00 बजे तक प्रार्थना सभा आयोजित करनी होगी। इस सभा में ‘बिहार गीत’ का सामूहिक गायन अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे छात्रों में अपनी सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और राज्य की पहचान के प्रति गर्व की भावना विकसित होगी। मदरसों और संस्कृत विद्यालयों के लिए भी यही नियम लागू होंगे, ताकि राज्यभर में शिक्षा व्यवस्था एक समान और अनुशासित रूप में संचालित हो।
स्कूल छुट्टी के समय राष्ट्रगान का गायन
निर्देशों के अनुसार, विद्यालय बंद होने से पहले हर दिन राष्ट्रगान का भी सामूहिक गायन होगा। इसका पालन सुनिश्चित करना विद्यालय प्रशासन और शिक्षक दोनों की जिम्मेदारी होगी। विभाग ने यह भी कहा है कि किसी भी परिस्थिति में राष्ट्रगान की उपेक्षा या अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बोर्ड परीक्षा के दौरान भी नियमित कक्षाएं जारी रहेंगी
एडवाइजरी में माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्देश यह दिया गया है कि बोर्ड परीक्षाओं के समय सिर्फ उन्हीं कक्षाओं को रोका जाए जिनका परीक्षा से सीधा संबंध है। अन्य सभी कक्षाओं में पढ़ाई सामान्य रूप से जारी रहनी चाहिए। इसका उद्देश्य यह है कि परीक्षाओं के कारण अन्य छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो। विद्यालय प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि परीक्षा व्यवस्था और नियमित पढ़ाई में संतुलन बना रहे।
विद्यालय रूटीन तय करने की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक पर
शिक्षा विभाग के अनुसार, स्कूलों में रूटीन और कक्षाओं का संचालन उपलब्ध शिक्षकों, विषयों की आवश्यकता और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए प्रधानाध्यापक तय करेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पाठ्यक्रम का पूरा होना विद्यालय प्रमुख की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पाठ्यक्रम पूरा करने में किसी भी प्रकार की देर या लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। विभाग इस प्रक्रिया की नियमित निगरानी भी करेगा।
होमवर्क और उसकी जांच अब अनिवार्य
एडवाइजरी में कहा गया है कि प्रत्येक शिक्षक को प्रतिदिन छात्रों को होमवर्क देना होगा और अगले दिन इसकी जांच सुनिश्चित करनी होगी। विभाग का मानना है कि होमवर्क छात्रों में नियमित अभ्यास, अनुशासन और विषय की समझ को गहरा करता है। यह भी निर्देश दिया गया है कि होमवर्क सिर्फ औपचारिकता न हो, बल्कि उसका सीधा संबंध अध्यापन प्रक्रिया से होना चाहिए।
सह-शिक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं
शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सामान्य विद्यालयों में लड़के और लड़कियां एक ही कक्षा में साथ बैठेंगे। उनके लिए अलग से अलग कक्षाओं का संचालन नहीं किया जाएगा। विभाग का मानना है कि सह-शिक्षा सामाजिक समानता, आपसी समझ और सहयोग की भावना को बढ़ावा देती है, इसलिए इसे सभी विद्यालयों में बनाए रखा जाएगा।
निरीक्षण और कार्रवाई के कड़े निर्देश
जिला शिक्षा पदाधिकारी और क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रार्थना सभा, राष्ट्रगान, होमवर्क, कक्षाओं की नियमितता और पाठ्यक्रम पूरा करने जैसे सभी नियमों का पालन हो रहा है। यदि किसी विद्यालय में लापरवाही मिलती है तो संबंधित शिक्षक या प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि छात्रहित के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी।
नई एडवाइजरी का उद्देश्य
इन सभी निर्देशों का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अनुशासित और व्यवस्थित बनाते हुए छात्रों के व्यक्तित्व और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करना है। विभाग का मानना है कि विद्यालय सिर्फ पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि संस्कार और सामाजिक मूल्यों का केंद्र होता है। इसलिए इन नियमों का पालन बच्चों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।

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