महिला आयोग पहुंचा पारिवारिक विवाद का गंभीर मामला, बेटी ने पिता पर लगाए उत्पीड़न के आरोप
- पटना की महिला ने पिता पर अभद्र व्यवहार, धमकी और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया
- पिता ने आरोपों से किया इनकार, महिला आयोग ने अगली सुनवाई के लिए दोनों पक्षों को बुलाया
पटना। बिहार राज्य महिला आयोग में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पारिवारिक संबंधों और सामाजिक संवेदनशीलता को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है। राजधानी पटना की रहने वाली 35 वर्षीय एक महिला ने अपने 68 वर्षीय पिता पर मानसिक प्रताड़ना, अभद्र व्यवहार और अनुचित आचरण के आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि पिता द्वारा लंबे समय से उसके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है, जिससे उसका मानसिक जीवन प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर पिता ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी बेटी के भविष्य को सुरक्षित करना है। महिला द्वारा बिहार राज्य महिला आयोग में दिए गए आवेदन के अनुसार वह वर्तमान में अपनी मां के साथ अपने ननिहाल स्थित घर में रह रही है। उसने बताया कि उसके पिता घर जमाई के रूप में परिवार के साथ रहते हैं और जिस घर में परिवार निवास कर रहा है, वह उसकी मां के नाम पर है। महिला का आरोप है कि उसके पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उसकी मां और नानी ने निभाई, जबकि पिता ने परिवार की जिम्मेदारियों में अपेक्षित योगदान नहीं दिया। आवेदन में महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पिता घर के दैनिक कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप करते हैं और परिवार के अन्य सदस्यों पर अपनी इच्छा थोपने का प्रयास करते हैं। महिला का कहना है कि इसी कारण परिवार में लंबे समय से तनाव का माहौल बना हुआ है। उसने यह भी दावा किया कि पहले भी कई बार उसे और उसकी मां को धमकियां दी गईं तथा उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। महिला ने आयोग को बताया कि वर्ष 2023 में उसने इस संबंध में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। उसका कहना है कि शिकायत के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उसने आरोप लगाया कि उसे और उसकी मां को लगातार भय और दबाव में रखने का प्रयास किया जाता रहा है। महिला के अनुसार वर्तमान में वह अपने घर की चारदीवारी का निर्माण करा रही है, लेकिन पिता इस कार्य में भी बाधा उत्पन्न कर रहे हैं और विरोध कर रहे हैं। महिला ने यह भी बताया कि मई 2025 में उसका विवाह हुआ था, लेकिन विवाह के लगभग तीन महीने बाद उसके पति का निधन हो गया। इसके बाद वह पुनः अपनी मां के साथ रहने लगी। उसका कहना है कि इस कठिन परिस्थिति में भी उसे पारिवारिक सहयोग नहीं मिल पाया और उसे मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर महिला के पिता ने आयोग के समक्ष अपनी बात रखते हुए सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उनकी केवल एक ही संतान है और उन्होंने उसकी शिक्षा-दीक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि बेटी ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है और परिवार की संपत्ति तथा बैंक खातों में उसकी पूरी हिस्सेदारी सुनिश्चित है। पिता का कहना है कि पत्नी और बेटी ही उनकी संपत्ति की वास्तविक उत्तराधिकारी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अपनी बेटी के वैधव्य के बाद वे उसके पुनर्विवाह का प्रयास कर रहे हैं ताकि उसका भविष्य सुरक्षित हो सके। उनके अनुसार बेटी विवाह के लिए तैयार नहीं है और इसी कारण परिवार में मतभेद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस मामले की सुनवाई के दौरान बिहार राज्य महिला आयोग की सदस्य पिंकी कुमारी ने कहा कि आवेदिका अपने आरोपों को रखते समय भावनात्मक रूप से असहज दिखाई दे रही थी। आयोग ने दोनों पक्षों की बातें सुनी हैं और मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की आवश्यकता महसूस की है। महिला आयोग ने अगली सुनवाई की तिथि 9 जुलाई निर्धारित की है। आयोग ने आवेदिका को अपनी मां के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जा सके और दोनों पक्षों की बातों को विस्तार से समझा जा सके। फिलहाल यह मामला जांच और सुनवाई की प्रक्रिया में है। आयोग का उद्देश्य सभी तथ्यों का परीक्षण कर उचित निष्कर्ष तक पहुंचना है। इस घटना ने पारिवारिक विवादों, मानसिक स्वास्थ्य और घरेलू संबंधों में संवाद की आवश्यकता पर एक बार फिर ध्यान आकर्षित किया है। मामले पर अंतिम निर्णय आगामी सुनवाई और जांच प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।


