एआई समिट में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बड़ा संदेश, तकनीक नहीं सीखने वाले कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई
- विधानसभा कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण पर दिया जोर, कहा– आधुनिक तकनीक में दक्ष होना अब समय की आवश्यकता
- डिजिटल संचार, सामाजिक माध्यम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यप्रणाली अपनाने का आह्वान, सरकारी व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने का दिया संकेत
पटना। पटना में आयोजित एआई समिट के मंच से बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाने का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समय तेजी से बदल रहा है और सरकारी संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को भी उसी गति से तकनीकी रूप से सक्षम बनना होगा। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से विधानसभा के कर्मचारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जो कर्मचारी अभी तक संगणक का संचालन नहीं जानते हैं, उन्हें पहले प्रशिक्षण दिया जाए। यदि प्रशिक्षण के बाद भी वे आवश्यक तकनीकी दक्षता प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो उनके संबंध में उचित प्रशासनिक निर्णय लिया जाना चाहिए। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से आग्रह किया कि जिस प्रकार समय-समय पर विधायकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, उसी प्रकार विधानसभा के कर्मचारियों के लिए भी नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि केवल जनप्रतिनिधियों का प्रशिक्षित होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके साथ कार्य करने वाले सहयोगी कर्मचारियों का भी तकनीक में दक्ष होना आवश्यक है। यदि किसी कर्मचारी का तकनीकी ज्ञान विधायक से भी कम हो, तो ऐसी स्थिति सरकारी व्यवस्था के लिए उचित नहीं मानी जा सकती।मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था का युग है। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों का तकनीकी रूप से सक्षम होना प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता और गति दोनों के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विधायक अपने सहयोगियों को इसलिए नियुक्त करते हैं ताकि वे कार्यों को सरल और प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें। इसलिए सहयोगी कर्मचारियों का ज्ञान और कार्यकुशलता उच्च स्तर की होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक दो महीने के अंतराल पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि कर्मचारी नई तकनीकों, डिजिटल प्रणालियों और आधुनिक कार्यप्रणाली से लगातार परिचित होते रहें। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार ये अधिकारी मंत्रियों को प्रशासनिक कार्यों में सहयोग देकर शासन व्यवस्था को प्रभावी बनाते हैं, उसी प्रकार विधानसभा और अन्य सरकारी संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की भी मजबूत, प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम व्यवस्था होनी चाहिए। उनका कहना था कि आधुनिक प्रशासन केवल अनुभव के आधार पर नहीं, बल्कि तकनीकी ज्ञान और डिजिटल दक्षता के आधार पर अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब केवल संगणक चलाना ही पर्याप्त नहीं है। सरकारी कर्मचारियों को सामाजिक माध्यमों की कार्यप्रणाली की भी पूरी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को यह समझना होगा कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे मंच किस प्रकार कार्य करते हैं, जनता से संवाद कैसे स्थापित किया जाता है तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकार की योजनाओं और नीतियों की जानकारी प्रभावी ढंग से लोगों तक कैसे पहुंचाई जा सकती है। उनके अनुसार, वर्तमान समय में जनता और सरकार के बीच सीधा संवाद डिजिटल मंचों के माध्यम से भी स्थापित होता है, इसलिए सरकारी कर्मचारियों को इस क्षेत्र में दक्ष होना अनिवार्य है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सामाजिक माध्यमों के बढ़ते प्रभाव और उनके संभावित दुरुपयोग पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज ऐसे कई तकनीकी साधन उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से बिना वास्तविक जनसमर्थन के भी बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं और टिप्पणियां दिखाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति एक स्थान पर बैठकर भी तकनीकी माध्यमों का उपयोग करते हुए हजारों प्रतिक्रियाएं एक साथ प्रदर्शित कर सकता है। ऐसे परिदृश्य में समाज और सरकार दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग जहां विकास और संवाद के लिए किया जा सकता है, वहीं इनके माध्यम से गलत गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। इसलिए आवश्यक है कि आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि डिजिटल दुष्प्रचार और भ्रामक गतिविधियों से निपटने के लिए भी किया जाए। उनका मानना है कि भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था तकनीकी ज्ञान और डिजिटल सुरक्षा पर आधारित होगी। एआई समिट के मंच से दिया गया मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह संदेश केवल विधानसभा कर्मचारियों तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे पूरे सरकारी तंत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले समय में सरकारी कर्मचारियों के लिए तकनीकी दक्षता, डिजिटल संचार की समझ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यप्रणाली का ज्ञान महत्वपूर्ण मानक होगा। नियमित प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग और डिजिटल कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देकर बिहार सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सक्षम और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।


