August 25, 2026

नीतीश के इस्तीफें पर रोहिणी आचार्य का तंज, कहा- ऑपरेशन फिनिश के तहत हटाए गए मुख्यमंत्री

  • राज्यसभा सदस्य बनने के बाद विधान परिषद छोड़ा, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज
  • विपक्ष ने लगाया दबाव में इस्तीफे का आरोप, सत्तापक्ष ने बताया संवैधानिक प्रक्रिया

पटना। बिहार की राजनीति में मंगलवार का दिन बेहद अहम साबित हुआ, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। संविधान के प्रावधानों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता, जिसके चलते उन्हें विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी पड़ी। उनका त्याग पत्र विधिवत रूप से विधान परिषद के सभापति को सौंप दिया गया। मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद जनता दल यूनाइटेड के नेता संजय गांधी, संजय झा और मंत्री विजय चौधरी विधान परिषद पहुंचे और औपचारिक प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान कुछ नेता भावुक भी नजर आए, जिससे इस घटनाक्रम की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। जहां सत्तापक्ष इस कदम को पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया बता रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रीय जनता दल से जुड़ी नेता रोहिणी आचार्य ने इस घटनाक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह सब एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है और मुख्यमंत्री से उनकी इच्छा के विरुद्ध इस्तीफा लिया गया है। रोहिणी आचार्य ने सामाजिक माध्यम पर अपने संदेश में दावा किया कि यह बिहार में एक बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को राजनीतिक दबाव में हटाया गया है और यह सत्ता के समीकरणों को बदलने की दिशा में उठाया गया कदम है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है। वहीं सत्तापक्ष के नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह से नियमों के अनुसार लिया गया निर्णय है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने संवैधानिक दायित्व का पालन करते हुए यह कदम उठाया है और इसमें किसी प्रकार का दबाव या साजिश नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। राज्यसभा में जाने के बाद मुख्यमंत्री की भूमिका और राज्य की राजनीतिक दिशा को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। इस बीच, मुख्यमंत्री आवास और पार्टी कार्यालयों में लगातार बैठकों का दौर जारी है। विभिन्न दल अपने-अपने स्तर पर आगे की रणनीति तय करने में जुटे हुए हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सामान्य जनता के बीच भी इस मुद्दे को लेकर जिज्ञासा बढ़ गई है। लोग जानना चाहते हैं कि इस इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी और क्या इससे सत्ता संतुलन में कोई बड़ा बदलाव होगा। फिलहाल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बहस जारी है और विभिन्न दल अपने-अपने दृष्टिकोण से इसे देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इस घटनाक्रम का राज्य की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह घटनाक्रम बिहार की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जो आगे चलकर राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को नई दिशा दे सकता है।

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