August 24, 2026

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड पर सरकार ने बदला फैसला, चार लाख की राशि मिलती रहेगी, सीएम ने दूर किया भ्रम

  • 2 लाख की सीमा कुल ऋण की नहीं, शिक्षा वित्त निगम से मिलने वाली सहायता की सीमा; अतिरिक्त 2 लाख तक बैंक से लेने की सुविधा
  • वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 950 करोड़ रुपये के व्यय को मंजूरी, पिछले वर्ष की तुलना में 64 करोड़ रुपये अधिक प्रावधान

पटना। बिहार में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच पिछले कुछ दिनों से बने असमंजस को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कहा है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को पहले की तरह अधिकतम चार लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध रहेगी। उन्होंने सामाजिक माध्यम एक्स के जरिए कहा कि बिहार सरकार युवाओं की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आर्थिक संसाधनों की कमी किसी भी विद्यार्थी की उच्च शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बनने दी जाएगी। दरअसल, बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बदलाव से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद छात्रों के बीच यह भ्रम फैल गया था कि अब शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा घटाकर केवल दो लाख रुपये कर दी गई है। इस खबर के बाद उन विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई थी, जो उच्च शिक्षा के लिए इस योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता पर निर्भर हैं। मामले में बढ़ते असमंजस के बाद शिक्षा विभाग ने भी स्थिति स्पष्ट की। विभाग ने कहा कि योजना के तहत विद्यार्थियों को मिलने वाली कुल वित्तीय सहायता में कोई कटौती नहीं की गई है। बदलाव केवल ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था और माध्यम में किया गया है। सरकार के अनुसार, विद्यार्थी अब भी उच्च शिक्षा के लिए अधिकतम चार लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत दो लाख रुपये तक की शिक्षा सहायता बिहार शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, यदि किसी विद्यार्थी को दो लाख रुपये से अधिक राशि की आवश्यकता होती है, तो वह दो लाख से चार लाख रुपये तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता बैंक के माध्यम से प्राप्त कर सकेगा। इस तरह योजना के अंतर्गत कुल सहायता की अधिकतम सीमा चार लाख रुपये ही बनी रहेगी। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि दो लाख रुपये की नई सीमा को योजना की कुल सीमा समझना गलत है। यह केवल शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली राशि की सीमा है। इसके ऊपर की राशि के लिए विद्यार्थियों को बैंक के माध्यम से वित्तीय सहायता लेने का विकल्प दिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान के बाद सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि योजना को कमजोर करने या विद्यार्थियों को मिलने वाली कुल सहायता में कमी करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार का कहना है कि युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। शिक्षा विभाग ने योजना के बजट को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के लिए 886 करोड़ रुपये के व्यय की स्वीकृति दी गई थी। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 950 करोड़ रुपये के व्यय को मंजूरी दी गई है। इस प्रकार पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में चालू वित्तीय वर्ष में योजना के लिए 64 करोड़ रुपये अधिक खर्च की स्वीकृति दी गई है। सरकार का तर्क है कि बजट में की गई यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के लिए वित्तीय प्रावधान को कम नहीं किया गया है। बल्कि, उच्च शिक्षा के लिए युवाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को जारी रखा गया है। बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी हैं, जिनके लिए आर्थिक स्थिति उच्च शिक्षा जारी रखने में एक बड़ी चुनौती बनती है। ऐसे छात्रों के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना महत्वपूर्ण मानी जाती है। योजना के माध्यम से छात्र विभिन्न उच्च शिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त कर अपनी पढ़ाई आगे बढ़ा सकते हैं। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी को केवल आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न होना पड़े। मुख्यमंत्री ने भी अपने संदेश में युवाओं की पढ़ाई और भविष्य को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है। योजना में हुए बदलाव के बाद फैले भ्रम को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग की ओर से दी गई सफाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह स्पष्ट किया गया है कि दो लाख रुपये योजना की कुल ऋण सीमा नहीं है। विद्यार्थी शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से दो लाख रुपये तक की सहायता ले सकेंगे, जबकि आवश्यकता पड़ने पर दो लाख से चार लाख रुपये तक की अतिरिक्त राशि बैंक के माध्यम से प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इस स्पष्टीकरण से उन छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो योजना में बदलाव की खबरों के बाद उच्च शिक्षा के खर्च को लेकर चिंतित थे। फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि बिहार में उच्च शिक्षा के लिए अधिकतम चार लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी और आर्थिक तंगी को विद्यार्थियों की पढ़ाई के रास्ते में रोड़ा नहीं बनने दिया जाएगा।

You may have missed