राघोपुर में बांध टूटा, कई गांव में घुसा गंगा का पानी; पांच हजार की आबादी पर बाढ़ का खतरा
- तटबंध टूटने के बाद ऊर्जा मंत्री के आवास तक पहुंचा पानी, जल संसाधन विभाग ने संभाला मोर्चा
- बालू की बोरियों और मिट्टी से क्षतिग्रस्त हिस्से को मजबूत करने का काम जारी, मुख्यमंत्री ने ली स्थिति की जानकारी
राघोपुर। राघोपुर गांव के समीप जमीनदारी बांध का एक हिस्सा टूटने से इलाके में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। तटबंध टूटते ही गंगा का पानी तेजी से गांव और आसपास के क्षेत्रों मंी फैलने लगा। कुछ ही समय में बाढ़ का पानी बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री के आवास तक भी पहुंच गया। घटना की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और तटबंध को और क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए बचाव एवं कटावरोधी कार्य शुरू कर दिया। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती टूटे हुए हिस्से से लगातार हो रहे पानी के बहाव को नियंत्रित करना और तटबंध के बाकी हिस्से को सुरक्षित रखना है। मौके पर विभाग के संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौजूद हैं तथा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
दोनों किनारों को मजबूत करने में जुटी टीम
जमीनदारी बांध में जिस स्थान पर कटाव के बाद टूटने की स्थिति बनी, वहां जल संसाधन विभाग ने सबसे पहले तटबंध के दोनों किनारों को मजबूत करने का काम शुरू किया। इसका उद्देश्य कटाव को और आगे बढ़ने से रोकना है।
विभाग की टीम बालू की बोरियों, मिट्टी और अन्य जरूरी संसाधनों की मदद से क्षतिग्रस्त हिस्से को मजबूत कर रही है। अधिकारियों की कोशिश है कि पानी के तेज बहाव को नियंत्रित किया जाए और बांध के शेष हिस्से पर पड़ रहे दबाव को कम किया जा सके। इसके साथ ही गांव की ओर तेजी से बढ़ रहे पानी को रोकने और उसका बहाव दूसरी दिशा में नियंत्रित करने के उपाय भी किए जा रहे हैं। प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद रहकर हर स्थिति पर नजर रख रही हैं।
करीब पांच हजार की आबादी प्रभावित
तटबंध टूटने के बाद राघोपुर गांव और आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब पांच हजार लोगों के प्रभावित होने की आशंका है। कई घरों और आसपास के इलाकों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों को अब अपने घरों के साथ मवेशियों और जरूरी सामान को सुरक्षित रखने की चिंता सताने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गंगा का जलस्तर और बढ़ा तो पानी आसपास के अन्य गांवों की ओर भी फैल सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने एक तरफ तटबंध को बचाने की चुनौती है तो दूसरी ओर प्रभावित आबादी को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी है।
वर्ष 2004 से बनी हुई है कटाव की समस्या
राघोपुर में जमीनदारी बांध का कटाव कोई नई समस्या नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2004 से ही इस इलाके में बाढ़ और तटबंध कटाव की समस्या बनी हुई है। वर्ष 2005 से यहां कटावरोधी कार्य शुरू किए गए थे। जल संसाधन विभाग की ओर से अलग-अलग चरणों में तटबंध को सुरक्षित करने और कटाव रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की जानकारी है। बताया जाता है कि विभिन्न चरणों में करीब 14 करोड़ रुपये तक की राशि कटावरोधी कार्यों पर खर्च की गई है। करीब नौ किलोमीटर लंबे क्षेत्र में पहले भी कटाव की समस्या सामने आती रही है। इसके बावजूद इस बार गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के कारण तटबंध पर दबाव इतना बढ़ गया कि उसका एक हिस्सा टूट गया।
लंबे अंतराल बाद फिर बढ़ा पानी का दबाव
स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब 14 वर्षों बाद इस बार जमीनदारी बांध पर पानी का दबाव काफी अधिक देखा गया। लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव ने तटबंध की मजबूती की परीक्षा ली और आखिरकार एक हिस्से में बांध टूट गया। जिस स्थान पर तटबंध टूटा है, वह ऊर्जा मंत्री के आवास से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर बताया जा रहा है। बांध टूटने के बाद पानी तेजी से गांव की ओर बढ़ा और मंत्री के आवास तक भी पहुंच गया।
मुख्यमंत्री ने ली बाढ़ की जानकारी
राघोपुर में बिगड़ती स्थिति की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री से फोन पर बातचीत कर हालात की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने तटबंध टूटने के बाद चलाए जा रहे बचाव कार्यों और बाढ़ के पानी के फैलाव की स्थिति के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री की ओर से जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को मौके पर मौजूद रहकर तटबंध को सुरक्षित करने और पानी के फैलाव को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों से कहा गया है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जाए।
तटबंध सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
जमीनदारी बांध टूटने की घटना ने लंबे समय से चल रहे कटावरोधी कार्यों की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि तटबंध पर पानी का दबाव बढ़ते ही उसका हिस्सा टूट जाता है तो इसकी मजबूती और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, फिलहाल प्रशासन और जल संसाधन विभाग की प्राथमिकता तटबंध को और टूटने से बचाना तथा ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आने वाले घंटों में गंगा के जलस्तर और पानी के बहाव की स्थिति से यह तय होगा कि राघोपुर में बाढ़ का संकट कितना गंभीर रूप लेता है। फिलहाल विभाग की टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं और ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।


