August 27, 2026

भाजपा का एनसीपीआई के साथ कोलकाता नगर निगम चुनाव लड़ने से इनकार, टीएमसी से अलग हुए सांसदों को बड़ा झटका

  • सुदीप बंदोपाध्याय ने एनडीए के हिस्से के रूप में चुनाव लड़ने का किया था दावा, भाजपा ने कहा- कोलकाता में अकेले मैदान में उतरेगी पार्टी
  • तृणमूल के बागी सांसदों के समर्थन और संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत के बीच बदले समीकरण, दिसंबर तक हो सकता है नगर निगम चुनाव

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों के गुट और भारतीय जनता पार्टी के बीच चुनावी तालमेल को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंदोपाध्याय समेत तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए करीब 20 सांसदों के गुट को उस समय बड़ा झटका लगा, जब भारतीय जनता पार्टी ने कोलकाता नगर निगम चुनाव उनके साथ मिलकर लड़ने से साफ इनकार कर दिया। यह विवाद उस समय और गहरा गया, जब तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों के गुट और राष्ट्रीय जनतांत्रिक प्रगतिशील मोर्चा से जुड़े सुदीप बंदोपाध्याय ने दावा किया कि उनकी पार्टी आगामी कोलकाता नगर निगम चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के हिस्से के रूप में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर लड़ेगी। हालांकि, उनके इस दावे के विपरीत भाजपा की ओर से स्पष्ट कर दिया गया कि कोलकाता नगर निगम चुनाव में पार्टी किसी सहयोगी दल के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने की तैयारी में नहीं है। सुदीप बंदोपाध्याय ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के हिस्से के रूप में कोलकाता नगर निगम चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत हो चुकी है और उन्हें चुनावी सहयोग को लेकर सहमति का संकेत मिला है। लेकिन बंदोपाध्याय के इस बयान से पहले ही कोलकाता नगर निगम चुनाव के लिए भाजपा की ओर से जिम्मेदारी संभाल रहे केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी चुनाव अकेले लड़ेगी। न्यू टाउन स्थित अपने आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी का कोई चुनावी सहयोगी नहीं है। मजूमदार ने कहा कि पार्टी ने राज्य में विधानसभा चुनाव भी किसी सहयोगी दल के साथ मिलकर नहीं लड़ा था और अकेले चुनाव मैदान में उतरकर कई सीटों पर जीत दर्ज की थी। ऐसे में कोलकाता नगर निगम चुनाव में किसी अन्य दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास ऐसा कोई प्रस्ताव भी नहीं आया है। बाद में सुदीप बंदोपाध्याय की ओर से भाजपा के साथ चुनाव लड़ने के दावे के बारे में पूछे जाने पर सुकांत मजूमदार ने कहा कि उन्हें इस संबंध में पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य या विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ही अधिकृत रूप से कोई स्पष्ट बयान दे सकते हैं। भाजपा और तृणमूल से अलग हुए सांसदों के गुट के बीच चुनावी दूरी की चर्चा ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय जनतांत्रिक प्रगतिशील मोर्चा के साथ गठबंधन कर कोलकाता नगर निगम चुनाव लड़ना भाजपा के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इस गुट से जुड़े सांसद कुछ समय पहले तक तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थे। एक राजनीतिक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि यदि भाजपा तृणमूल से अलग हुए नेताओं के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है, तो पार्टी के सामने अपने राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जवाब देना कठिन हो सकता है। भाजपा लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं पर भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों को लेकर राजनीतिक हमला करती रही है। ऐसे में उन्हीं नेताओं के साथ चुनावी समझौता भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती पैदा कर सकता है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल कोलकाता नगर निगम चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा है। तृणमूल से अलग हुए सांसदों का गुट केंद्र की राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भाजपा को संसद में कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए व्यापक समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है। विशेष रूप से संविधान संशोधन या अन्य ऐसे विधेयकों के लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरूरत पड़ सकती है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि भाजपा और इस बागी सांसद गुट के बीच चुनावी दूरी बढ़ती है, तो केंद्र में राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि भविष्य में इस गुट को केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व देकर राजनीतिक संबंधों को संतुलित करने का प्रयास किया जा सकता है। मंत्री पद दिए जाने की संभावना को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। कोलकाता नगर निगम चुनाव दिसंबर 2026 तक होने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच नगर निगम के वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 किए जाने की प्रक्रिया पर भी काम चल रहा है। वार्डों के पुनर्गठन के साथ चुनावी समीकरण भी बदल सकते हैं। फिलहाल भाजपा ने कोलकाता नगर निगम चुनाव अकेले लड़ने का संकेत देकर तृणमूल से अलग हुए सांसदों के गुट के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों पक्षों के बीच आगे कोई बातचीत होती है या फिर नगर निगम चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए गठबंधन और समीकरण सामने आते हैं।

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