बिहार में बनेगा महिला विश्वविद्यालय, छात्रा से कुलपति तक सभी पदों पर होंगी महिलाएं
- केवल छात्राओं को मिलेगा प्रवेश, शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति में भी महिलाओं को प्राथमिकता देने की तैयारी
- महिला सशक्तीकरण की दिशा में सरकार की नई पहल; स्टार्टअप, पीएचडी फेलोशिप और पुलिस दीदी योजना के बाद शिक्षा पर विशेष जोर
पटना। बिहार में महिला शिक्षा और सशक्तीकरण को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य में एक विशेष महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी, जहां छात्राओं से लेकर कुलपति तक सभी प्रमुख भूमिकाओं में महिलाएं ही होंगी। प्रस्तावित विश्वविद्यालय में केवल छात्राओं को प्रवेश दिया जाएगा। इतना ही नहीं, शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के पदों पर भी महिलाओं की नियुक्ति किए जाने की योजना है। महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा को बिहार सरकार की महिला केंद्रित नीतियों की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं और बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर, सुरक्षित और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। ऐसे समय में जब राज्य सरकार रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है, महिला विश्वविद्यालय की योजना को विशेष महत्व दिया जा रहा है। प्रस्तावित महिला विश्वविद्यालय में केवल छात्राओं को दाखिला मिलेगा। विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में शिक्षिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जबकि प्रशासनिक और अन्य सहयोगी पदों पर भी महिलाओं की नियुक्ति किए जाने की बात कही गई है। विश्वविद्यालय का नेतृत्व भी महिला कुलपति के हाथों में होगा। इस तरह यह संस्थान पूरी तरह महिला केंद्रित उच्च शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए केवल प्रवेश के अवसर उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए अनुकूल शैक्षणिक वातावरण और सुरक्षित संस्थागत व्यवस्था भी जरूरी है। महिला विश्वविद्यालय की स्थापना से उन छात्राओं को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जो उच्च शिक्षा के लिए अलग और सुरक्षित शैक्षणिक परिसर की आवश्यकता महसूस करती हैं। महिला विश्वविद्यालय की घोषणा ऐसे समय में सामने आई है, जब बिहार सरकार ने महिलाओं और बच्चियों के लिए एक के बाद एक कई योजनाओं की शुरुआत की है। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिलाओं और बेटियों से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ किया था। इनमें बेटी नवाचार उद्यम चुनौती, बालिका पीएचडी फेलोशिप और स्कूल-कॉलेजों के आसपास पुलिस दीदी की तैनाती से जुड़ी पहल शामिल है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई बेटी नवाचार उद्यम चुनौती के तहत महिलाओं और युवतियों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना में नए और रचनात्मक व्यावसायिक विचारों को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत पात्र महिला उद्यमियों को 50 हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकारी योजना के अनुसार करीब 2100 महिलाओं को इसका लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य उन बेटियों और महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर देना है, जो अपना व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं या पहले से चल रहे उद्यम का विस्तार करना चाहती हैं। सरकार को उम्मीद है कि आर्थिक सहयोग मिलने से महिला उद्यमिता को नई गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बेटियों को प्रोत्साहित करने के लिए बालिका पीएचडी फेलोशिप योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत शोध कर रही छात्राओं को चार वर्षों तक प्रत्येक माह 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार ने करीब एक हजार छात्राओं को इस योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा है। आर्थिक सहायता मिलने से शोध और उच्च शिक्षा के दौरान छात्राओं पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिल सकती है। महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुलिस दीदी पहल भी शुरू की गई है। इसके तहत स्कूल और कॉलेजों के आसपास महिला पुलिसकर्मियों की पहुंच और निगरानी बढ़ाने की योजना है। मुख्यमंत्री ने पुलिस दीदी के लिए उपलब्ध कराए गए 4700 दोपहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसका उद्देश्य छात्राओं और महिलाओं को सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं में त्वरित सहायता उपलब्ध कराना और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। महिला विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ बिहार सरकार ने महिला सशक्तीकरण के अभियान को शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, शोध और सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों से जोड़ने का प्रयास किया है। अब इस योजना को लेकर आगे की प्रक्रिया, विश्वविद्यालय का स्थान, पाठ्यक्रम, सीटों की संख्या और नियुक्ति से संबंधित विस्तृत रूपरेखा सामने आने का इंतजार है। महिला शिक्षा के क्षेत्र में यह पहल बिहार की छात्राओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोल सकती है।


