September 7, 2026

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी तेज, डीके शिवकुमार बन सकते हैं नए मुख्यमंत्री

  • 3 जून को शपथ ग्रहण की संभावना, प्रारंभिक चरण में 10 मंत्रियों के साथ नई सरकार का गठन
  • सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में नए समीकरण, मंत्रिमंडल में आधे नए चेहरों को मिल सकता है मौका

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच सत्ता परिवर्तन को लेकर तस्वीर लगभग साफ होती नजर आ रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार के राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावना प्रबल हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, शिवकुमार आगामी 3 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। उनके साथ लगभग 10 मंत्री भी शपथ ग्रहण कर सकते हैं, जबकि राज्यसभा चुनाव के बाद 18 जून के पश्चात मंत्रिमंडल का विस्तार किए जाने की संभावना जताई जा रही है। कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब कांग्रेस नेतृत्व राज्य में संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा पार्टी नेतृत्व के निर्देश के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिए जाने और राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा उसे स्वीकार किए जाने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक को सत्ता परिवर्तन की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है। बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इसी बैठक के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर औपचारिक घोषणा की जा सकती है तथा शपथ ग्रहण कार्यक्रम की तिथि भी तय की जाएगी। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बनने वाले नए मंत्रिमंडल में लगभग 50 प्रतिशत नए चेहरों को स्थान मिल सकता है। इससे पार्टी के युवा और नए नेताओं को अवसर मिलने की संभावना बढ़ गई है। हालांकि मंत्रिमंडल के गठन में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाए रखना कांग्रेस नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। कर्नाटक विधान परिषद के मुख्य सचेतक सलीम अहमद ने कहा है कि मंत्रिमंडल गठन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, सामाजिक संतुलन तथा उपमुख्यमंत्री पदों को लेकर अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान ही करेगा। विधायक दल की बैठक के बाद इन सभी मुद्दों पर अंतिम सहमति बनाई जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद सिद्धारमैया का प्रभाव राज्य की राजनीति में बना रहेगा। पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और दलित समुदायों को साथ लेकर बने उनके सामाजिक गठबंधन ने कांग्रेस को राज्य में मजबूत आधार प्रदान किया है। यही कारण है कि कांग्रेस नेतृत्व इस सामाजिक समीकरण को किसी भी तरह प्रभावित नहीं होने देना चाहता। सिद्धारमैया ने राज्यसभा की राजनीति में जाने के बजाय कर्नाटक की सक्रिय राजनीति में बने रहने का संकेत दिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वह भविष्य में भी राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। ऐसे में कांग्रेस के सामने सरकार और संगठन के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद डीके शिवकुमार की वास्तविक परीक्षा शुरू होगी। उन्हें न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करना होगा, बल्कि पार्टी के विभिन्न गुटों के बीच समन्वय भी बनाए रखना होगा। साथ ही उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि संगठन और सरकार के बीच किसी प्रकार का टकराव उत्पन्न न हो। कांग्रेस नेतृत्व के सामने एक और महत्वपूर्ण चुनौती सामाजिक समर्थन को बनाए रखने की है। पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और दलित समुदाय लंबे समय से सिद्धारमैया के समर्थन आधार माने जाते रहे हैं। ऐसे में सत्ता परिवर्तन के बाद इन वर्गों के विश्वास को बनाए रखना नई सरकार की प्राथमिकता होगी। कर्नाटक में होने वाला यह नेतृत्व परिवर्तन केवल मुख्यमंत्री बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के भविष्य की राजनीतिक रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। अब सभी की नजरें कांग्रेस विधायक दल की बैठक और उसके बाद होने वाली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।

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