August 24, 2026

एनडीए को प्रचंड बहुमत पर बोली जदयू, कहा- बिहार में नीतीश सीएम थे, हैं और सीएम रहेंगे

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के ताज़ा रुझानों ने राज्य की सियासत में एक बार फिर बड़े उलटफेर की तस्वीर सामने ला दी है। मतगणना के बीच सामने आए आंकड़ों के अनुसार, एनडीए राज्य में प्रचंड बहुमत की ओर बढ़ रहा है। जनादेश का रुख साफ़ तौर पर एनडीए गठबंधन के पक्ष में दिख रहा है, जिसमें जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रमुख भूमिका में हैं। शुरुआती बढ़त के बाद अब तक के आंकड़ों में जदयू कुल 81 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि भाजपा 90 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। 243 सदस्यीय विधानसभा में इस मजबूत स्थिति ने एनडीए खेमे में उत्साह भर दिया है। वहीं दूसरी ओर, महागठबंधन की स्थिति कमजोर दिख रही है, जो कि शुरुआती चरणों से ही स्पष्ट हो रहा था। चुनावी समीकरणों और सामाजिक आधार के अनुरूप एनडीए का प्रदर्शन कई सीटों पर उम्मीद से बेहतर बताया जा रहा है। इसी बीच, जदयू ने अपने आधिकारिक मंचों के माध्यम से एक बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए ट्वीट किया— “न भूतो न भविष्यति, नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री थे, हैं और रहेंगे।” इस बयान ने चुनावी माहौल में नई हलचल पैदा कर दी है। पार्टी का यह दावा न केवल नीतीश कुमार की नेतृत्व क्षमता पर भरोसा जताता है, बल्कि मतगणना के बीच ही सरकार गठन की भविष्य तस्वीर भी पेश करता है। नीतीश कुमार, जो पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्रीय चेहरा रहे हैं, लगातार बिहार के विकास, सुशासन और सामाजिक न्याय के मुद्दों को अपनी राजनीति के केंद्र में रखते आए हैं। जदयू का यह दावा बताता है कि पार्टी उन्हें एनडीए की अगुवाई में अगला मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वहीं भाजपा की ओर से भी शुरुआती प्रतिक्रियाओं में यह संकेत मिला है कि एनडीए की एकजुटता बरकरार रहेगी और मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी तरह का विवाद नहीं होगा। सीटों की संख्या भले ही भाजपा के पक्ष में अधिक दिखाई दे रही हो, लेकिन गठबंधन की सामान्य समझ के अनुसार नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार बने हुए हैं। प्रदेश भर की सीटों से प्राप्त रुझानों में देखा जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों, पिछड़े वर्गों और महिला वोटरों ने इस बार भी नीतीश कुमार की नीतियों पर भरोसा जताया है। एनडीए की संयुक्त रणनीति, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ, और सॉफ्ट-विकास एजेंडा इस चुनाव में निर्णायक कारक माने जा रहे हैं। दूसरी ओर, विपक्ष महागठबंधन के खेमे में निराशा का माहौल है। सीटों की संख्या लगातार गिरने के कारण महागठबंधन के नेता भी रुझानों को स्वीकार करने की ओर बढ़ रहे हैं। हालाँकि, अंतिम परिणाम आने में अभी समय है, परंतु रुझानों के आधार पर यह साफ़ है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक पकड़ और नेतृत्व क्षमता पर जनता का भरोसा कायम है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतिम परिणाम भी इसी दिशा में जाते हैं, तो एनडीए चौथी बार नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बना सकता है। जदयू का ट्वीट इसी राजनीतिक संभावना की पुष्टि करता है और यह स्पष्ट संदेश देता है कि पार्टी नीतीश को ही मुख्यमंत्री के रूप में आगे रखेगी। आगामी घंटों में पूर्ण परिणाम आने के बाद तस्वीर और साफ़ हो जाएगी, लेकिन रुझानों के मुताबिक बिहार की सियासत में एक बार फिर नीतीश कुमार का दबदबा कायम दिखाई दे रहा है।

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