बिहार में सरकारी कार्यक्रमों की नई रूपरेखा तय, वंदे मातरम् से होगी शुरुआत

  • राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रगान और राज्य गीत के क्रम को किया गया अनिवार्य
  • मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अतिक्रमण हटाने पर दिया सख्त संदेश

पटना। बिहार सरकार ने राज्य के सभी सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक नई सांस्कृतिक और औपचारिक रूपरेखा तय की है। अब राज्य में आयोजित होने वाले सभी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ से होगी। इसके तुरंत बाद राष्ट्रगान का गायन किया जाएगा और फिर निर्धारित कार्यक्रम की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कार्यक्रम का समापन बिहार राज्य गीत के साथ किया जाएगा। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं, जिन्हें सभी विभागों और संस्थानों में लागू करना अनिवार्य होगा। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो. सोहैल ने रविवार को इस बाबत आदेश जारी करते हुए सभी विभागीय प्रमुखों, पुलिस महानिदेशक, प्रमंडलीय आयुक्तों तथा जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इस नई व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं। निर्देश में यह स्पष्ट किया गया है कि सभी सरकारी कार्यक्रमों में गीतों के गायन का क्रम निर्धारित रहेगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश के अनुसार अब विद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में दिन की शुरुआत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन से होगी। इसके बाद राष्ट्रगान गाया जाएगा और फिर नियमित शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना को और मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने भी 28 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसके नियमित गायन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। बिहार सरकार का यह फैसला उसी के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय पहचान को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया है। इधर, राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रशासनिक सख्ती का संकेत देते हुए अतिक्रमण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि सरकारी जमीन पर बने किसी भी प्रकार के मकान या भवन को ध्वस्त किया जाएगा, चाहे वह किसी भी व्यक्ति से जुड़ा क्यों न हो। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उन्हें सूचना मिली है कि उनके अपने तारापुर स्थित घर की सीढ़ी को भी प्रशासन द्वारा तोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कानून सभी के लिए समान है और सरकारी भूमि को हर हाल में अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी रविवार को पहली बार अपने गृह जिला मुंगेर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने तारापुर विधानसभा क्षेत्र के असरगंज प्रखंड स्थित बैजलपुर गांव में प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुना। इसके बाद उन्होंने एक जन संवाद कार्यक्रम में भाग लिया, जहां उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं और विकास योजनाओं पर चर्चा की। जनसंवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक पारदर्शिता, कानून का समान अनुपालन और विकास कार्यों में तेजी लाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जनता से जुड़े मुद्दों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें। बिहार सरकार द्वारा जारी किए गए ये दोनों फैसले—एक ओर सांस्कृतिक अनुशासन को मजबूत करने और दूसरी ओर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई—राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था और जनसरोकारों को नई दिशा देने की कोशिश के रूप में देखे जा रहे हैं।

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