पीडीए से आगे बढ़कर ब्राह्मण समाज पर सपा की नजर, 2027 की चुनावी रणनीति का बड़ा संकेत, अखिलेश खेलेंगे बड़ा दाँव
- जनेश्वर मिश्र जयंती पर लखनऊ में होगा विशाल सम्मेलन, संतों और विद्वानों की मौजूदगी से सभी वर्गों को साधने का प्रयास
- ब्राह्मण मतदाताओं तक पहुंच बनाने की तैयारी, सामाजिक समीकरण बदलकर विधानसभा चुनाव से पहले नया राजनीतिक संदेश देने की कवायद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होती दिखाई दे रही हैं। राजनीतिक दल अपने-अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने और नए वर्गों को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी ने भी अपनी चुनावी रणनीति का दायरा बढ़ाते हुए अब ब्राह्मण समाज तक पहुंच बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। अब तक पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को केंद्र में रखकर राजनीति करने वाली पार्टी जनेश्वर मिश्र की जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले एक बड़े सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसकी राजनीति किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सभी समुदायों को साथ लेकर चलना चाहती है। पांच अगस्त को लखनऊ में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन समाजवादी पार्टी के लिए केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण राजनीतिक आयोजन माना जा रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत गोमतीनगर स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण से होगी। इसके बाद पार्टी मुख्यालय में विशाल सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। पहले इस आयोजन की योजना जनेश्वर मिश्र पार्क में बनाई गई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण कार्यक्रम को पार्टी मुख्यालय में स्थानांतरित किया गया। इसके लिए विशाल अस्थायी सभा मंडप तैयार किया गया है। आने वाले अतिथियों के लिए भोजन और अन्य व्यवस्थाएं भी की गई हैं। राजधानी लखनऊ में सम्मेलन के प्रचार-प्रसार के लिए व्यापक अभियान चलाया गया है ताकि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता मंच की रूपरेखा होगी। काशी, मथुरा और अयोध्या से संतों तथा संस्कृत के विद्वानों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होगा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव स्वयं पूरे कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे और संतों, संस्कृत विद्वानों तथा ब्राह्मण समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों का सम्मान करेंगे। संसद का सत्र चलने के बावजूद उनके पूरे समय कार्यक्रम में शामिल रहने की योजना को भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक या धार्मिक स्वरूप का नहीं है, बल्कि इसके पीछे स्पष्ट चुनावी रणनीति दिखाई देती है। समाजवादी पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह अब केवल पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि प्रदेश के सभी सामाजिक वर्गों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है। इस सम्मेलन की तैयारियां पिछले कई महीनों से चल रही थीं। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई, जबकि बलिया से सांसद सनातन पांडेय को कार्यक्रम का संयोजक बनाया गया। प्रदेश के विभिन्न जिलों और मंडलों में लगातार बैठकें आयोजित कर ब्राह्मण समाज के प्रमुख लोगों तक निमंत्रण पहुंचाया गया। विशेष रूप से पूर्वांचल और अवध क्षेत्र के ब्राह्मण समाज को सम्मेलन से जोड़ने के लिए व्यापक संपर्क अभियान चलाया गया। कार्यक्रम से पहले देर रात तक पार्टी नेताओं ने अंतिम रणनीति पर मंथन किया। समाजवादी पार्टी का आकलन है कि प्रदेश में ब्राह्मण समाज की आबादी लगभग 13 से 14 प्रतिशत है और उसका प्रभाव 100 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में देखा जाता है। ऐसे में आगामी चुनाव में इस वर्ग का समर्थन किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इसी कारण सम्मेलन के दौरान ब्राह्मण समाज से जुड़े विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी की गई है। साथ ही समाजवादी सरकार के कार्यकाल में संस्कृत भाषा, संस्कृत विद्यालयों तथा ब्राह्मण समाज के हित में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया जाएगा। जनेश्वर मिश्र की जयंती के अवसर पर आयोजित यह सम्मेलन समाजवादी पार्टी की बदलती राजनीतिक सोच और व्यापक सामाजिक समीकरण बनाने की रणनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। पार्टी इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने सबसे बड़े सामाजिक और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नई रणनीति समाजवादी पार्टी को कितना राजनीतिक लाभ दिला पाती है और उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में किस प्रकार के नए समीकरण सामने आते हैं।


