नीतीश की नेतृत्व में हुई अंतिम कैबिनेट की बैठक, सीएम बोले- यहां के काम को देखता रहूंगा
- 20 मिनट तक चली बैठक, दिया गया धन्यवाद, कई मंत्री हुए भावुक
पटना। बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण क्षण उस समय देखने को मिला जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल की अंतिम मंत्रिपरिषद बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक लगभग 20 मिनट तक चली, लेकिन इस छोटी अवधि में भी भावनात्मक वातावरण स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के साथ अपने लंबे राजनीतिक सफर को याद किया और उन्हें भविष्य में बेहतर कार्य करने की प्रेरणा दी। बैठक के दौरान कई मंत्री भावुक हो गए और मुख्यमंत्री भी भावनात्मक रूप से प्रभावित नजर आए।
भावनात्मक माहौल में हुआ संवाद
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि यह समय भावुक होने का है, क्योंकि लंबे समय तक साथ काम करने के बाद अब परिस्थितियां बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि सभी मंत्रियों ने मिलकर राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और भविष्य में भी इसी तरह जनता के हित में कार्य करते रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वे दिल्ली जा रहे हैं, लेकिन वहां से भी बिहार के विकास कार्यों पर नजर बनाए रखेंगे। उन्होंने मंत्रियों के प्रति अपना स्नेह और विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि उनका संबंध केवल पद तक सीमित नहीं है।
दो दशक के कार्यकाल का जिक्र
बैठक के बाद मंत्रियों ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना की और उनके लंबे कार्यकाल को याद किया। राज्य सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने लगभग 20 वर्षों तक राज्य के विकास के लिए लगातार काम किया है। उन्होंने कहा कि बिहार में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुधार के क्षेत्र में जो परिवर्तन हुए हैं, वे मुख्यमंत्री के नेतृत्व का परिणाम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने जनता के लिए जो कार्य किए हैं, उन्हें लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
गौरव और भावुकता का मिश्रित क्षण
मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि यह क्षण भावुक होने के साथ-साथ गौरव का भी है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक एक अनुभवी नेता के साथ काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व को स्थिर और दूरदर्शी बताया और कहा कि बिहार को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। मंत्रियों ने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया और उनके नेतृत्व में काम करने के अनुभव को विशेष बताया।
राजनीतिक बदलाव के संकेत
मुख्यमंत्री की यह अंतिम मंत्रिपरिषद बैठक ऐसे समय हुई है जब राज्य की राजनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री के दिल्ली जाने की चर्चा के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में परिवर्तन संभव है। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे अपने कार्यों को पूरी जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाएं और जनता के विश्वास को बनाए रखें।
पिछली बैठक और लंबा अंतराल
इससे पहले मंत्रिपरिषद की बैठक 20 फरवरी 2026 को आयोजित हुई थी। उस बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई थी, जिनमें सोनपुर में हवाई अड्डा बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगना भी शामिल था। पिछले दो महीनों से मंत्रिपरिषद की कोई बैठक नहीं होने पर विपक्ष ने भी सवाल उठाए थे। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की कार्यशैली पर टिप्पणी की थी और बैठक न होने के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा था।
मंत्रिपरिषद की संरचना
वर्तमान मंत्रिपरिषद में कुल 26 मंत्री शामिल हैं। इनमें सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, दिलीप जायसवाल, श्रवण कुमार, विजय चौधरी, लेसी सिंह, जमा खान सहित अन्य मंत्री शामिल हैं। इन सभी ने मुख्यमंत्री के साथ लंबे समय तक विभिन्न विभागों में कार्य किया है। मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हमेशा टीम भावना के साथ कार्य करने पर जोर दिया और प्रशासनिक निर्णयों में समन्वय बनाए रखा।
विकास कार्यों की निरंतरता पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को यह संदेश दिया कि राज्य के विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं बल्कि उन्हें प्रभावी रूप से लागू करना भी है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर विशेष ध्यान देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य के विकास की गति को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
जनता से जुड़ाव को बताया प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जनता से जुड़े रहने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व लोगों की समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना है। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है और इसके लिए निरंतर प्रयास करना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि मंत्रिपरिषद के सदस्य भविष्य में भी इसी भावना के साथ काम करेंगे।
राजनीतिक परिदृश्य पर असर
मुख्यमंत्री की अंतिम मंत्रिपरिषद बैठक को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक ने राज्य की राजनीति में संभावित बदलावों की चर्चा को तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में भी प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनी रहनी चाहिए। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती विकास कार्यों की गति को बनाए रखना और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा।
आगे की दिशा पर नजर
मुख्यमंत्री के दिल्ली जाने की चर्चा के बीच राज्य की राजनीति पर सभी की नजर बनी हुई है। मंत्रिपरिषद की इस बैठक ने एक युग के समाप्त होने और नए दौर की शुरुआत के संकेत दिए हैं। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक दिशा किस प्रकार आगे बढ़ती है। फिलहाल यह बैठक भावनात्मक माहौल और राजनीतिक महत्व के कारण चर्चा का विषय बनी हुई है।


