पार्टी में टूट की खबरों पर भड़के कुशवाहा, कहा- ये सब बकवास की बातें, गलत खबर चला रहे पत्रकार
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तब तेज हो गई, जब राष्ट्रीय लोक मोर्चा में कथित टूट और अंदरूनी असंतोष की खबरें सामने आईं। इन अटकलों पर पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने तीखी प्रतिक्रिया दी और साफ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट है। शुक्रवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने इन खबरों को निराधार और बेवजह करार दिया तथा कहा कि ऐसी चर्चाएं सिर्फ अफवाहों पर आधारित हैं।
मीडिया पर नाराजगी और तीखी टिप्पणी
उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी में फूट की खबरें चलाने वाले पत्रकारों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मीडिया के पास कोई ठोस या सार्थक मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए इस तरह की बातें उछाली जा रही हैं। उनके मुताबिक, पार्टी के भीतर किसी भी तरह की टूट या बिखराव की स्थिति नहीं है और ऐसे सवाल पूछना पूरी तरह से बेमतलब है। कुशवाहा ने दो टूक कहा कि उनकी पार्टी मजबूती से खड़ी है और इसे कमजोर दिखाने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
लिट्टी-चोखा पार्टी से शुरू हुई अटकलें
दरअसल, हाल ही में पटना में आयोजित एक लिट्टी-चोखा पार्टी के बाद राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ा। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के तीन विधायक—रामेश्वर कुमार महतो, माधव आनंद और आलोक सिंह—शामिल नहीं हुए थे। इनकी गैरमौजूदगी को लेकर यह कयास लगाए जाने लगे कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। इसके बाद इन विधायकों की भाजपा नेता नितिन नबीन के साथ वायरल हुई तस्वीरों ने आग में घी डालने का काम किया।
गैरमौजूदगी पर कुशवाहा की सफाई
इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि किसी कार्यक्रम में किसी का न आना कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बनता। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत या व्यावहारिक कारणों से किसी विधायक का किसी कार्यक्रम में शामिल न होना सामान्य बात है। इसे पार्टी में फूट से जोड़ना पूरी तरह गलत और भ्रामक है। कुशवाहा ने अपने विधायकों की निष्ठा पर भरोसा जताते हुए कहा कि वे सभी पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं।
वायरल तस्वीरों को बताया अफवाह
भाजपा नेता के साथ विधायकों की वायरल तस्वीरों पर भी कुशवाहा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में अलग-अलग नेताओं के साथ मुलाकातें होती रहती हैं और इसका मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि कोई पार्टी छोड़ने जा रहा है। उनके अनुसार, इन तस्वीरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।
भीतरखाने की चर्चाएं और असंतोष की बात
हालांकि उपेंद्र कुशवाहा इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में अंदरखाने चर्चाएं कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर कुछ विधायकों में नाराजगी है। इस नाराजगी की मुख्य वजह कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया जाना बताया जा रहा है। खास बात यह है कि दीपक प्रकाश न तो विधायक हैं और न ही एमएलसी, इसके बावजूद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिली।
मंत्री पद को लेकर नाराजगी की आशंका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से पार्टी के अन्य विधायकों को यह संदेश गया है कि संगठन में वरिष्ठता और जनप्रतिनिधित्व के बजाय पारिवारिक समीकरणों को तरजीह दी जा रही है। इससे विधायकों में असंतोष पैदा होना स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से इस विषय पर खुलकर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन यही मुद्दा अंदरूनी असहजता की जड़ माना जा रहा है।
पार्टी की संख्या और संभावित खतरा
राष्ट्रीय लोक मोर्चा की विधानसभा में कुल चार विधायक हैं। इनमें से एक विधायक खुद उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता हैं। शेष तीन विधायक ही पार्टी की असली ताकत माने जाते हैं। यदि इन तीनों में से कोई भी अलग राह पकड़ता है, तो पार्टी विधानसभा में कमजोर स्थिति में पहुंच सकती है। यही कारण है कि राजनीतिक हलकों में इन विधायकों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।
विपक्ष और सहयोगियों की नजर
पार्टी में कथित असंतोष की खबरों पर न सिर्फ विपक्ष, बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन के अन्य घटक दलों की भी नजर है। यदि राष्ट्रीय लोक मोर्चा में सचमुच कोई टूट होती है, तो इसका असर बिहार की राजनीतिक गणित पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
कुशवाहा का आत्मविश्वास और संदेश
इन तमाम अटकलों के बीच उपेंद्र कुशवाहा का रुख बेहद आत्मविश्वास से भरा हुआ दिख रहा है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी को कमजोर आंकने वाले लोग भ्रम में हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रीय लोक मोर्चा एक विचारधारा और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रही है और कुछ अफवाहों से उसका रास्ता नहीं डगमगाएगा। उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी में टूट की खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए मीडिया और राजनीतिक विरोधियों को कड़ा संदेश दिया है। हालांकि अंदरखाने की चर्चाएं अभी भी जारी हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर पार्टी नेतृत्व एकजुटता का दावा कर रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ये खबरें केवल अफवाह थीं या फिर पार्टी को सच में किसी अंदरूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल, बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय लोक मोर्चा को लेकर उत्सुकता और चर्चाओं का दौर जारी है।


