किशनगंज में इंस्पेक्टर पर आय से अधिक संपत्ति का मामला, ईओयू की छापेमारी
- पटना, छपरा और किशनगंज में पांच ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई, करोड़ों की संपत्ति के साक्ष्य
- भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज, तलाशी के बाद और खुलासों की संभावना
पटना/किशनगंज। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करते हुए ईओयू ने किशनगंज जिले में तैनात एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। टाउन थाना में पदस्थापित इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार रंजन के विभिन्न ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापेमारी की जा रही है। यह कार्रवाई मंगलवार सुबह एक साथ कई स्थानों पर शुरू की गई, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। ईओयू के अधिकारियों के अनुसार, इंस्पेक्टर के खिलाफ उनकी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि उनके पास करीब 1.70 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जो उनकी आय के स्रोतों से लगभग 115 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। इस आधार पर उनके खिलाफ विधिवत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। छापेमारी की यह कार्रवाई पटना, छपरा और किशनगंज स्थित उनके कुल पांच ठिकानों पर एक साथ की जा रही है। इस अभियान का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी कर रहे हैं और इसमें कई टीमों को शामिल किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि तलाशी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, चल-अचल संपत्तियों से संबंधित कागजात और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। इस मामले में ईओयू थाना कांड संख्या 05/26, दिनांक 13 अप्रैल 2026 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धाराओं 13(2) और 13(1)(बी) के अंतर्गत दर्ज किया गया है। तलाशी अभियान के लिए पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय से विधिवत वारंट भी प्राप्त किया गया था, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान बरामद होने वाली संपत्तियों और दस्तावेजों की विस्तृत जानकारी तलाशी पूरी होने के बाद ही सार्वजनिक की जाएगी। फिलहाल सभी टीमों द्वारा अलग-अलग स्थानों पर सघन जांच जारी है और हर पहलू की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। गौरतलब है कि इससे पहले भी किशनगंज जिले में एक पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों को राज्य सरकार और जांच एजेंसियों की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के बीच भय का माहौल भी बनेगा। इससे आम जनता का प्रशासन पर भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है। ईओयू के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों को बख्शा नहीं जाएगा। जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस विभाग के भीतर भी हलचल पैदा कर दी है। विभागीय स्तर पर भी इस मामले की समीक्षा की जा रही है और आगे की कार्रवाई को लेकर उच्च अधिकारियों की नजर बनी हुई है। फिलहाल, छापेमारी की कार्रवाई जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी और उसी के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


