August 29, 2025

पीएमसीएच मे इंटर्न डॉक्टरों ने शुरू की हड़ताल, स्टाइपेंड बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शन, ओपीडी सेवाएं बंद

पटना। पीएमसीएच में इंटर्न डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है। डॉक्टरों का मुख्य आरोप है कि सरकार उनकी बातों को लगातार नज़रअंदाज़ कर रही है और वाजिब मानदेय देने से बच रही है। इसी असंतोष के चलते उन्होंने मंगलवार को अस्पताल की ओपीडी (आउटडोर पेशेंट डिपार्टमेंट) सेवाएं पूरी तरह से बंद करने का फैसला लिया। इस कदम से न केवल मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा है बल्कि चिकित्सा व्यवस्था पर भी गंभीर असर दिखाई दे रहा है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि यह निर्णय उन्होंने मजबूरी में लिया है। उनका तर्क है कि बार-बार शांतिपूर्ण ढंग से सरकार तक अपनी बात पहुँचाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकार उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रही है और उन्हें उचित स्टाइपेंड नहीं मिल रहा है। नियम के अनुसार, हर तीन साल में इंटर्नशिप के दौरान दिए जाने वाले स्टाइपेंड का पुनरीक्षण किया जाना चाहिए। लेकिन वास्तविकता यह है कि लंबे समय से इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई। डॉक्टरों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में इंटर्न की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इंटर्न डॉक्टर ही वह कड़ी हैं जो पढ़ाई पूरी करने के बाद व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं और मरीजों को प्रारंभिक उपचार उपलब्ध कराते हैं। इन परिस्थितियों में उन्हें उचित वित्तीय सहयोग न मिलना न केवल उनके मनोबल को गिराता है बल्कि चिकित्सा शिक्षा और सेवा दोनों की गुणवत्ता पर असर डालता है। पीएमसीएच के इंटर्न डॉक्टर पहले भी कई बार इस मांग को लेकर हड़ताल कर चुके हैं। हर बार उन्होंने सरकार से अपील की कि उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की जाए। लेकिन अब तक उनकी बातों पर अमल नहीं हुआ। इस बार उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर आम मरीजों पर पड़ा है। बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए ओपीडी पर निर्भर रहते हैं। खासकर गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले मरीजों को निजी अस्पतालों का खर्च उठाना संभव नहीं होता। ऐसे में सरकारी अस्पताल की सेवाएं ठप होने से उनकी कठिनाई और बढ़ गई है। इंटर्न डॉक्टरों की यह हड़ताल राज्य सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है। सरकार को यह समझना होगा कि स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के लिए डॉक्टरों की संतुष्टि और सुरक्षा आवश्यक है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह असंतोष और बढ़ सकता है, जिससे पूरे राज्य की चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होगी। इस प्रकार, पीएमसीएच में इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल सिर्फ उनकी मांगों तक सीमित नहीं है बल्कि यह राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर करती है। सरकार के लिए यह समय है कि वह गंभीरता से इस मुद्दे पर विचार करे और डॉक्टरों को उनका हक़ दिलाने के लिए सकारात्मक पहल करे।

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