August 22, 2026

होर्मुज संकट के बीच भारत की नई ऊर्जा रणनीति, वेनेजुएला बना तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता

  • मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने तेल आयात के वैकल्पिक स्रोतों पर बढ़ाया जोर
  • रूस पहले और यूएई दूसरे स्थान पर, सऊदी अरब और अमेरिका को पीछे छोड़ वेनेजुएला की बड़ी छलांग

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडरा रहे खतरे के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नई रणनीति अपनाई है। भारत अब धीरे-धीरे उन देशों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा रहा है, जिनकी आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं है। इसी रणनीति के तहत दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला भारत के लिए बड़ा ऊर्जा सहयोगी बनकर उभरा है। हालात ऐसे हैं कि वेनेजुएला अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है और उसने सऊदी अरब तथा अमेरिका जैसे देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल वेनेजुएला की आबादी लगभग पौने तीन करोड़ है। लंबे समय तक आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझने के बावजूद अब यह देश वैश्विक ऊर्जा बाजार में फिर से सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। भारत भी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने में जुटा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जानकारी दी है कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले सप्ताह भारत दौरे पर आने वाली हैं। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच तेल आपूर्ति और ऊर्जा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत होगी। रुबियो ने भारत को अमेरिका का मजबूत साझेदार बताते हुए कहा कि अमेरिका भारत को उसकी जरूरत के अनुसार अधिक से अधिक ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में सरकार अब किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भर रहने की बजाय अलग-अलग देशों से तेल खरीद बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। ऊर्जा आंकड़े उपलब्ध कराने वाली कंपनी क्लेपर के अनुसार मई महीने की 20 तारीख तक वेनेजुएला ने भारत को प्रतिदिन लगभग 4 लाख 17 हजार बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति की है। अप्रैल में यह आंकड़ा करीब 2 लाख 83 हजार बैरल प्रतिदिन था। इससे पहले लगातार नौ महीनों तक भारत ने वेनेजुएला से तेल नहीं खरीदा था, लेकिन अमेरिका द्वारा कुछ प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद फिर से आपूर्ति शुरू हो गई। भारत की प्रमुख रिफाइनरी कंपनियां, विशेष रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज, वेनेजुएला के सस्ते और भारी ग्रेड वाले कच्चे तेल की खरीद बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी साबित हो रहा है। मई महीने में भारत का कुल तेल आयात लगभग 8 प्रतिशत बढ़कर 49 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। आंकड़ों के अनुसार मई में भारत को सबसे अधिक तेल रूस से मिला। रूस से लगभग 19 लाख 83 हजार बैरल प्रतिदिन तेल की आपूर्ति हुई। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात दूसरे स्थान पर रहा। वेनेजुएला तीसरे स्थान पर पहुंच गया, जबकि सऊदी अरब से तेल आपूर्ति घटकर लगभग 3 लाख 40 हजार बैरल प्रतिदिन रह गई। इसके अलावा भारत ने अंगोला और अमेरिका से भी तेल खरीदा है। भारत पहले ईरान से भी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद भारत ने ईरान से तेल आयात काफी कम कर दिया। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत अब कई देशों के साथ नए समझौते भी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर गए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मौजूदगी में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी और इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड के बीच हुए समझौते के तहत भारत के रणनीतिक तेल भंडार में संयुक्त अरब अमीरात की हिस्सेदारी बढ़ाकर 3 करोड़ बैरल तक की जाएगी। इसके अलावा भारत में गैस भंडारण क्षमता बढ़ाने को लेकर भी सहयोग पर सहमति बनी है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच रसोई गैस आपूर्ति का भी समझौता हुआ है। भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों और नए व्यापारिक साझेदारों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ब्राजील, नाइजीरिया और अंगोला जैसे देशों से तेल खरीद बढ़ाकर भारत अपनी आपूर्ति प्रणाली को अधिक सुरक्षित, संतुलित और स्थायी बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है।

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