राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का निर्देश, बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल

  • 15 दिनों की समय सीमा तय, नहीं मानने पर कार्रवाई की चेतावनी
  • वैकल्पिक आवास आवंटित, दो दशक पुराने निवास को लेकर सियासी चर्चा तेज

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पटना स्थित सरकारी आवास खाली करने का निर्देश जारी किया है। भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि उन्हें 15 दिनों के भीतर 10, सर्कुलर रोड स्थित आवास खाली करना होगा, अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। यह सरकारी आवास पिछले करीब दो दशकों से लालू परिवार के उपयोग में रहा है। वर्ष 2006 से यह आवास उनके प्रमुख निवास के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। लंबे समय से इस बंगले में रहने के कारण यह स्थान परिवार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और निजी केंद्र भी बन गया था। सरकार ने राबड़ी देवी को वैकल्पिक रूप से 39, हार्डिंग रोड स्थित नया सरकारी आवास आवंटित किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है और सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय सीमा के भीतर आवास खाली करना अनिवार्य है। गौरतलब है कि इससे पहले भी 25 नवंबर 2025 को आवास खाली करने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन उस समय इसे लागू नहीं किया जा सका। इसके बाद दिसंबर 2025 के अंत में सामान स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब सरकार ने एक बार फिर इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इस बार किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आवास खाली नहीं किया गया, तो आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इस फैसले को लेकर राजनीतिक दलों के बीच भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। जहां सत्ताधारी पक्ष इसे नियमों के अनुपालन का हिस्सा बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव और कार्रवाई के रूप में देख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है। राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लालू परिवार लंबे समय से बिहार की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में उनके आवास से जुड़ा यह फैसला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज है। लोगों का कहना है कि सरकारी आवासों के उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम होने चाहिए और उनका पालन सभी के लिए समान रूप से किया जाना चाहिए। वहीं कुछ लोग इसे सरकार की सख्ती के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी संपत्तियों के उपयोग में पारदर्शिता और समयबद्धता आवश्यक है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होती है और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का निर्देश बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में सामने आया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर इस आदेश का पालन होता है या नहीं और इसका राज्य की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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