बिहार पुलिस में 22,771 पदों पर भर्ती का विज्ञापन फर्जी, चयन पर्षद ने किया खंडन

  • भर्ती की खबर को पर्षद ने किया खारिज, कोई अधिसूचना जारी नहीं
  • अभ्यर्थियों को केवल आधिकारिक वेबसाइट पर भरोसा करने की सलाह, फर्जी खबर फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

पटना। बिहार पुलिस में सिपाही के 22,771 पदों पर भर्ती से जुड़ा एक कथित विज्ञापन सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर तेजी से वायरल होने के बाद केंद्रीय चयन पर्षद ने इसे पूरी तरह फर्जी और भ्रामक करार दिया है। पर्षद ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की कोई भी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है और अभ्यर्थियों को इस तरह की खबरों से सावधान रहने की आवश्यकता है। केंद्रीय चयन पर्षद द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि दिनांक 19 मार्च 2026 को सिपाही भर्ती से संबंधित कोई भी सूचना प्रकाशित नहीं की गई है। ऐसे में सोशल मीडिया, वेबसाइटों या अन्य माध्यमों पर प्रसारित हो रहे विज्ञापन पूरी तरह निराधार हैं और इन पर विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। पर्षद ने अभ्यर्थियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। पर्षद ने यह भी स्पष्ट किया है कि भर्ती से संबंधित सभी जानकारी उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर ही प्रकाशित की जाती है। इसलिए किसी भी प्रकार की भर्ती प्रक्रिया, आवेदन तिथि या पदों की संख्या के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग किया जाना चाहिए। अन्य किसी माध्यम से प्राप्त सूचना पर भरोसा करना नुकसानदेह हो सकता है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया के माध्यम से विभिन्न प्रकार की फर्जी खबरें तेजी से फैल रही हैं, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। बिहार पुलिस भर्ती से जुड़ा यह मामला भी इसी तरह का एक उदाहरण है, जिसमें बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को गुमराह करने की कोशिश की गई। पर्षद ने अपने बयान में कहा है कि इस प्रकार की गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए संबंधित एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया गया है, ताकि ऐसे मामलों पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सके। पर्षद ने यह भी संकेत दिया है कि यदि कोई व्यक्ति या समूह जानबूझकर इस तरह की अफवाह फैलाता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में फर्जी विज्ञापनों और अफवाहों का फैलना अभ्यर्थियों के लिए मानसिक तनाव का कारण बनता है। इससे न केवल उनकी तैयारी प्रभावित होती है, बल्कि कई बार आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है, जब वे गलत जानकारी के आधार पर आवेदन या अन्य प्रक्रियाओं में शामिल हो जाते हैं। इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी भर्ती से संबंधित सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। यदि कोई विज्ञापन संदिग्ध प्रतीत होता है, तो उसकी पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से करना आवश्यक है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर प्राप्त किसी भी जानकारी को बिना जांचे आगे प्रसारित करने से बचना चाहिए। बिहार पुलिस में भर्ती को लेकर युवाओं में हमेशा से उत्साह बना रहता है, ऐसे में इस तरह की फर्जी खबरें उनकी उम्मीदों के साथ खिलवाड़ करती हैं। पर्षद ने स्पष्ट किया है कि जब भी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी, उसकी जानकारी आधिकारिक माध्यमों से पारदर्शी तरीके से दी जाएगी। यह मामला अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि वे सतर्क रहें और केवल प्रमाणिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें। किसी भी भ्रामक विज्ञापन या अफवाह के झांसे में आकर निर्णय लेने से बचना ही उनके हित में है।

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