September 20, 2026

PATNA : वोट बहिष्कार की चेतावनी के बाद भी किसी ने नहीं ली ग्रामीण मतदाताओं की सुध

ग्रामीणों ने पैदल मार्च निकाल आंदोलन को किया तेज


पालीगंज। आठ दिन पहले पटना के पालीगंज प्रखंड के खिरीमोड़ थाना अंतर्गत निरखपुर बिगहा, निरखपुर, सिद्धिपुर व महेशपुर गांव के हजारों ग्रामीण मतदाताओं के द्वारा डीह पालीगंज से निरखपुर-गौसगंज होते किंजर के पास अरवल-जहानाबाद मुख्य सड़क तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर वोट बहिष्कार करने की चेतावनी दी गयी थी। उसके बाद भी किसी भी जन प्रतिनिधियों व पदाधिकारियों द्वारा सुधि नहीं लिए जाने पर आक्रोशित ग्रामीण मतदाताओं ने रविवार को पैदल मार्च निकाल आंदोलन को तेज कर दिया है।
सैकड़ों ग्रामीण मतदाताओं ने निरखपुर गांव स्थित शिवमंदिर परिसर में सिद्धिपुर गांव निवासी अनुराग शर्मा की अध्यक्षता में बैठक किया था। बैठक में ग्रामीण मतदाताओं ने डीह पालीगंज से निरखपुर-गौसगंज होते हुए किंजर के पास अरवल-जहानाबाद मुख्य सड़क तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर वोट बहिष्कार करने का निर्णय लिया था। उस समय उन लोगों ने “रोड नहीं तो वोट नहीं” का नारा लगाते हुए प्रदर्शन किया था। लेकिन इसकी सुधि लेने की जहमत अब तक कोई भी पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि ने लेना उचित नहीं समझा। जिससे आक्रोशित ग्रामीण मतदाताओं ने रविवार को पैदल मार्च निकाल आंदोलन को तेज कर दिया है। यह मार्च निरखपुर शिव मंदिर से चलकर गांव से बाहर एक किलोमीटर की दूरी तय किया। मार्च में शामिल ग्रामीण मतदाता सड़क निर्माण की मांग करते हुए सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे।
मौके पर ग्रामीण कमलेश सिंह, शंभू सिंह, राजेन्द्र पासवान, राजदेनि यादव व रामईश्वर सिंह ने बताया कि यह सड़क आजादी के पूर्व से है, जिसकी अपनी जमीन होने के बावजूद भी आज तक इस सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। विकास की बहती बयार में भी बार-बार यहां के पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से शिकायत के बाद भी इस सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। जबकि इस सड़क से निरखपुर, सिद्धिपुर, महेशपुर, रघुनाथपुर, मेरा, महुआरी, गौसगंज, बसंत बिगहा, दहिया, कौरी, काढ़ेकुड़ा, हेलहा, बाला बिगहा व रूपापुर सहित कई अन्य गांवों के 25 से 30 हजार ग्रामीण जनता लाभान्वित होंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि पूर्व में इसी सड़क के द्वारा कई राज्यों से लोग व व्यापारी बिहार के दूसरे सबसे बड़ी समदा गांव में मकर संक्रांति के अवसर पर लगनेवाली छोटन ओझा मवेशी मेला में व्यापार करने व घूमने आते थे, लेकिन आज पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार इस सड़क अपनी हालात पर आंसू बहा रही है।

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