अब इन शहरों से आने वाले ही रहेंगे क्वारंटाइन सेंटरों में, मजदूर ढोए तो जब्त होंगे मालवाहक वाहन

पटना। लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न राज्यों से प्रवासी मजदूरों को बिहार लौटने का क्रम जारी है। जिस तरह से प्रवासी मजदूर ट्रक समेत मालवाहक वाहनों से बेधड़क राज्य में प्रवेश कर रहे हैं, उससे जिला व गांवों में खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग ने जो जानकारी दी है, उससे यही पता चलता है कि अब जो तेजी से बिहार में कोरोना के आंकड़े बढ़ रहे हैं, वह प्रवासी मजदूरों के नादानी के कारण बढ़ रहे हैं। राज्य में लौटे सात लाख प्रवासियों में से 12 हजार प्रवासियों के सैंपल लिए जा चुके हैं, जिसमें से 1184 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। राज्य सरकार ने कोरोना वायरस को कम्युनिटी में फैलने से रोकने के लिए प्रवासियों को 21 दिन तक ठहराने के लिए ब्लॉक स्तर पर क्वारंटाइन सेंटर बनाया। इन सेंटरों में अभी करीब आठ लाख लोग रह रहे हैं। वहीं जब प्रवासियों की संख्या बढ़ी तो पंचायत स्तर पर क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए।
अब राज्य सरकार ने यह फैसला किया है कि देश के 11 शहरों से आने वाले प्रवासी मजदूरों को ही ब्लॉक स्तर के क्वारंटाइन सेंटर में रखा जाएगा। ये राज्य सूरत, अहमदाबाद, मुंबई, पुणे, दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव, नोएडा, कोलकाता और बेंगलूरू है, जहां कोरोना का संक्रमण अधिक है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए यहां से आने वाले प्रवासियों को 14 दिन तक क्वारंटाइन सेंटर में रखने का फैसला लिया है, ताकि संक्रमण का फैलाव को रोका जा सके। वहीं राज्य सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सूबे में ट्रक समेत मालवाहक वाहनों से भर-भर कर आ रहे प्रवासी मजदूरों को रोका जाए। परिवहन विभाग ने सभी जिलों के डीएम और एसपी को मालवाहक वाहनों से प्रवासी मजदूरों की यात्रा पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है और पकड़े गए वाहनों को जब्त कर उसके ड्राइवर और मालिक के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की बात कही है। बता दें मालवाहक वाहन से लौट रहे प्रवासी मजदूरों की दुर्घटना में हो रही मौत के बाद जारी किया है।

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