October 7, 2026

मोकामा से नवादा तक 2029:-अनंत सिंह की सियासी चालों से गरमाई बिहार की राजनीति

>>पटना स्नातक चुनाव में खुला टकराव, बेटे अभिषेक के लिए मोकामा की घोषणा और नवादा लोकसभा को लेकर कयासों का दौर

**पटना/नवादा।** बिहार विधान परिषद के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव राज्य की राजनीति में कई नई परतें खोल रहा है। एक तरफ मोकामा के विधायक अनंत सिंह और जदयू के एमएलसी नीरज कुमार आमने-सामने हैं, तो दूसरी तरफ अनंत सिंह ने जन सुराज समर्थित डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में खड़े होने का ऐलान कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की भूमिका भी चर्चा में है।

**अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार**

जदयू विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर प्रचार शुरू कर दिया है। उन्होंने नवादा में जन आशीर्वाद यात्रा निकालकर डॉ. अनुज सिंह के लिए वोट मांगे। यात्रा के दौरान वे वारिसलीगंज बाइपास स्थित शहीद चंदन सिंह चौक और नवादा के प्रजातंत्र चौक पर जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते दिखे। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक और जन सुराज से जुड़े लोग मौजूद रहे। पटना से शुरू होकर नवादा और नालंदा के कई इलाकों में जनसंपर्क की योजना भी सामने आई है। इसे जदयू के लिए असहज स्थिति माना जा रहा है।

अनंत सिंह और नीरज कुमार की अदावत नई नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार दोनों के बीच यह तनातनी करीब 11 साल पुरानी है।

**”अब मैं चुनाव नहीं लड़ूँगा, बेटा लड़ेगा”**

इसी बीच जुलाई में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अनंत सिंह ने बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने साफ कहा कि वे खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे और उनकी जगह उनके बड़े बेटे अभिषेक सिंह मोकामा विधानसभा सीट से मैदान में उतरेंगे। उन्होंने समर्थकों को बताया कि यह फैसला काफी सोच-समझकर लिया गया है।

कार्यक्रम में मौजूद अभिषेक सिंह ने भी पहली बार चुनाव लड़ने के सवाल पर खुलकर बात की। उनके अनुसार मोकामा के विकास में उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य होगी। तभी से अभिषेक सिंह की राजनीतिक सक्रियता को अनंत सिंह की सियासी विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है।

**नवादा लोकसभा सीट पर सबकी नज़र**

अब सबसे बड़ा सवाल 2029 के लोकसभा चुनाव और नवादा सीट को लेकर है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अनंत सिंह भविष्य में नवादा से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। नवादा उनके लिए बिल्कुल नया इलाका भी नहीं है। इसी चर्चा के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या बेटे के लिए मोकामा और खुद के लिए नवादा की रणनीति बन रही है।

एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि एक बेटा 2029 में नवादा से जन सुराज का उम्मीदवार हो सकता है। एनडीए में रहकर यह सीट मिलना मुश्किल माना जा रहा है, क्योंकि नवादा लोकसभा सीट भाजपा के पास है। उसी रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की उदासीनता अनंत सिंह के लिए रास्ता आसान कर सकती है। सूरजभान या उनके परिवार के किसी सदस्य के नवादा से लड़ने की अभी कोई चर्चा नहीं है।

इन रिपोर्टों में यह साफ़ नहीं है कि नवादा के लिए चर्चा खुद अनंत सिंह की है या उनके बेटे की।

**फ़िलहाल सिर्फ़ अटकलें**

अनंत सिंह की ओर से नवादा से चुनाव लड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा अब तक सामने नहीं आई है। इसलिए इस चर्चा को फ़िलहाल राजनीतिक अटकल ही माना जाना चाहिए। पटना स्नातक चुनाव के नतीजे और जदयू का रुख आने वाले दिनों में तय करेंगे कि अनंत सिंह की अगली चाल क्या होगी।

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