August 27, 2026

हल्दी में सीसे की मिलावट का बड़ा खुलासा, बिहार में जांच के दौरान कई नमूने मानकों पर नहीं उतरे

  • चमकीली और गहरी पीली हल्दी के पीछे छिपा हो सकता है स्वास्थ्य का खतरा, जागरूकता अभियान में कारोबारियों को किया गया सतर्क
  • खाद्य सुरक्षा मानकों से कई गुना अधिक सीसा मिलने का दावा, बाजार निगरानी और मिलावट रोकने की व्यवस्था पर उठे सवाल

पटना। बिहार के बाजारों में बिकने वाली चमकीली और गहरे पीले रंग की हल्दी को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंता सामने आई है। आमतौर पर लोग हल्दी के रंग और चमक को उसकी अच्छी गुणवत्ता का संकेत मानकर खरीद लेते हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा जागरूकता अभियान के दौरान सामने आए आंकड़ों ने मिलावट की आशंका को लेकर लोगों को सतर्क कर दिया है। अभियान से जुड़े पर्चे में दावा किया गया है कि घरों और बाजार से लिए गए हल्दी के कई नमूने जांच में निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे और उनमें सीसे की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई। बिहार खाद्य सुरक्षा स्वास्थ्य अभियान 2026 के तहत जारी जागरूकता सामग्री के अनुसार, जांच के लिए लिए गए हल्दी के नमूनों में करीब एक तिहाई नमूने असफल पाए गए। अलग-अलग आंकड़ों में लगभग 31 से 33 प्रतिशत नमूनों के निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरने की बात कही गई है। इस दावे ने बिहार के बाजारों में बिक रही हल्दी की गुणवत्ता और उसकी निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले का सबसे चिंताजनक पहलू हल्दी में लेड क्रोमेट यानी सीसा युक्त रासायनिक पदार्थ के कथित इस्तेमाल से जुड़ा है। आरोप है कि हल्दी को अधिक पीला, चमकीला और आकर्षक दिखाने के लिए कुछ मामलों में इस तरह के खतरनाक रसायनों या कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। चमकदार रंग ग्राहकों को आसानी से आकर्षित करता है, लेकिन यदि उसमें सीसा या अन्य हानिकारक रसायन मौजूद हों तो यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। जागरूकता अभियान में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, कुछ नमूनों में सीसे की मात्रा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित सीमा से बहुत अधिक होने का दावा किया गया है। पर्चे के अनुसार, कुछ मामलों में सीसे की मात्रा निर्धारित सीमा 10 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम से कथित तौर पर 800 गुना तक अधिक पाई गई। हालांकि ऐसे मामलों में अंतिम और आधिकारिक निष्कर्ष प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट तथा संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के आधार पर ही स्पष्ट हो सकते हैं। पटना के किराना कारोबारियों के बीच चलाए गए जागरूकता अभियान के दौरान दुकानदारों से मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री से बचने की अपील की गई। दलदली इलाके में पहुंची भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से जुड़ी टीम ने कारोबारियों को संदिग्ध और खतरनाक रसायनयुक्त हल्दी से बचने तथा ग्राहकों तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाने के लिए जागरूक किया। कारोबारियों ने अभियान के दौरान बताया कि हल्दी विभिन्न थोक कारोबारियों और आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से पटना के बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में केवल खुदरा दुकानदारों पर कार्रवाई या निगरानी पर्याप्त नहीं होगी। खाद्य सामग्री की आपूर्ति के पूरे तंत्र, थोक विक्रेताओं, प्रसंस्करण इकाइयों और वितरण व्यवस्था की निगरानी जरूरी मानी जा रही है। हल्दी बिहार के लाखों घरों में रोज इस्तेमाल होने वाला प्रमुख मसाला है। इसका उपयोग सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों में रंग और स्वाद के साथ पारंपरिक रूप से किया जाता है। ऐसे में हल्दी की गुणवत्ता से जुड़ा सवाल सीधे आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी खाद्य पदार्थ में भारी धातुओं या हानिकारक रसायनों की मौजूदगी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अभियान के दौरान लोगों को हल्दी की प्राथमिक पहचान के कुछ घरेलू तरीके भी बताए गए हैं। इनमें एक गिलास साफ पानी में एक चम्मच हल्दी पाउडर डालकर लगभग 20 मिनट तक बिना हिलाए छोड़ने की सलाह दी गई है। यदि हल्दी नीचे बैठने लगे और ऊपर का पानी अपेक्षाकृत हल्का दिखाई दे तो इसे सामान्य स्थिति माना जा सकता है, जबकि पानी का अत्यधिक गहरा पीला रंग कृत्रिम रंग या अन्य मिलावट की आशंका पैदा कर सकता है। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि घरेलू परीक्षण किसी खाद्य पदार्थ के पूरी तरह शुद्ध या मिलावटी होने की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करते। खाद्य सामग्री में सीसा, कृत्रिम रंग या अन्य रसायनों की वास्तविक मात्रा का पता केवल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला जांच से ही लगाया जा सकता है। हल्दी में कथित मिलावट के आंकड़ों ने अब खाद्य सुरक्षा विभाग और बाजार निगरानी व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जरूरत इस बात की है कि संदिग्ध उत्पादों के नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच की जाए, दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों और निर्माताओं के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई हो तथा आम लोगों को भी केवल चमकदार रंग देखकर खाद्य सामग्री खरीदने से बचने के लिए जागरूक किया जाए।

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