August 24, 2026

बीपीएससी का बड़ा ऐलान, कहा- टीआरई-4 में देना होगा पीटी और मेन्स, तुक्का लगाने वालों का चयन नहीं

  • गर्दनीबाग में अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी, परीक्षा के दो चरण और नकारात्मक अंक का विरोध
  • आयोग ने कहा- तुक्का लगाकर चयन रोकने के लिए नकारात्मक अंक जरूरी, 1 सितंबर से शुरू होगा आवेदन

पटना। शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण को लेकर पटना के गर्दनीबाग में छात्रों का आंदोलन जारी है। इसी बीच बिहार लोक सेवा आयोग ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर परीक्षा के स्वरूप को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी। आयोग के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण में प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनों आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि परीक्षा को दो चरणों में कराने को लेकर अभ्यर्थियों के बीच कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जबकि आयोग ने परीक्षा की प्रक्रिया को लेकर अपना निर्णय स्पष्ट कर दिया है। आयोग ने यह भी साफ कर दिया कि परीक्षा में नकारात्मक अंक की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। परीक्षा नियंत्रक के अनुसार, गलत उत्तर देने पर अंक काटे जाने की व्यवस्था का उद्देश्य केवल अनुमान के आधार पर उत्तर देकर चयन पाने की संभावना को कम करना है।
दो चरणों में परीक्षा पर आयोग की सफाई
परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि बिहार देश का पहला राज्य है, जहां शिक्षक भर्ती परीक्षा दो चरणों में कराई जा रही है। उनके अनुसार, कई राज्यों में शिक्षक नियुक्ति के लिए दो चरणों की परीक्षा की व्यवस्था पहले से लागू है। उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2024 में परीक्षा को लेकर उठे विवादों के बाद राधाकृष्णन समिति का गठन किया गया था। समिति की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई सुझाव दिए गए थे, जिनमें दो चरणों की परीक्षा का सुझाव भी शामिल था। आयोग के अनुसार, आर्थिक अपराध इकाई की ओर से भी शिक्षक भर्ती परीक्षा में दो चरणों की व्यवस्था अपनाने की सलाह दी गई थी। इसी आधार पर टीआरई-4 में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है।
नकारात्मक अंक पर कोई बदलाव नहीं
टीआरई-4 में नकारात्मक अंक को लेकर भी अभ्यर्थियों में असंतोष है। आंदोलन कर रहे छात्र परीक्षा से नकारात्मक अंक की व्यवस्था हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे परीक्षा में गलती होने पर अभ्यर्थियों को नुकसान हो सकता है। हालांकि, आयोग ने इस मांग को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है। परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि आयोग की लगभग सभी परीक्षाओं में गलत उत्तर के लिए अंक काटने की व्यवस्था है और टीआरई-4 में भी इसे जारी रखा जाएगा। उनका तर्क है कि यदि नकारात्मक अंक नहीं होगा तो कुछ अभ्यर्थी बिना जानकारी के भी अनुमान लगाकर बड़ी संख्या में प्रश्नों के उत्तर दे सकते हैं। इससे ऐसे अभ्यर्थियों को लाभ मिल सकता है, जिन्होंने प्रश्नों का सही उत्तर जानने के बजाय केवल अनुमान लगाया है। नकारात्मक अंक ऐसी प्रवृत्ति को नियंत्रित करने में मदद करेगा।
पांचवें दिन भी जारी रहा छात्र आंदोलन
टीआरई-4 को लेकर पटना के गर्दनीबाग में छात्रों का न्याय सत्याग्रह सोमवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की दो चरणों वाली व्यवस्था को समाप्त कर एक ही परीक्षा आयोजित करना तथा नकारात्मक अंक हटाना शामिल है। अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया पहले से ही लंबी रही है। ऐसे में परीक्षा के दो चरण होने से चयन प्रक्रिया में और समय लग सकता है। छात्र चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया को सरल और जल्द पूरा करने के लिए एक चरण में परीक्षा कराई जाए।
32,388 पदों पर होगी शिक्षक भर्ती
बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से टीआरई-4 का विज्ञापन जारी किया जा चुका है। इसके तहत कुल 32,388 विद्यालय अध्यापकों की नियुक्ति की जानी है। प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक विभिन्न विषयों में रिक्त पदों पर योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। आयोग के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया एक सितंबर से शुरू होगी। अभ्यर्थी 30 सितंबर तक अपना आवेदन जमा कर सकेंगे। हालांकि, परीक्षा की निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। परीक्षा कार्यक्रम बाद में आयोग की ओर से जारी किया जाएगा।
आंदोलन और आयोग के फैसले के बीच बढ़ी चुनौती
एक तरफ आयोग ने परीक्षा की दो चरणों वाली व्यवस्था और नकारात्मक अंक को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ अभ्यर्थी अपनी मांगों पर कायम हैं। इससे सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध बना हुआ है। शिक्षक भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम, चयन प्रक्रिया और समय-सीमा को लेकर स्पष्टता महत्वपूर्ण होगी। आयोग का कहना है कि दो चरणों में परीक्षा का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और योग्य अभ्यर्थियों की पहचान को बेहतर बनाना है। अब अभ्यर्थियों की नजर इस बात पर है कि सरकार या आयोग उनकी मांगों पर पुनर्विचार करता है या नहीं। फिलहाल आयोग ने दो चरणों की परीक्षा और नकारात्मक अंक को लेकर अपनी स्थिति साफ कर दी है। ऐसे में टीआरई-4 को लेकर जारी आंदोलन आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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