लिफ्ट में पहले चढ़ने के विवाद ने लिया हिंसक रूप, पीएमसीएच में मरीजों के परिजनों के बीच मारपीट से मची अफरा-तफरी
- नई इमारत में करीब 20 मिनट तक चला हंगामा, लात-घूंसे और बेल्ट से हुई मारपीट
- पुलिस ने दो अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की प्राथमिकी, सीसीटीवी के आधार पर आरोपियों की पहचान में जुटी जांच
पटना। पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल की नई इमारत में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब लिफ्ट में पहले प्रवेश करने को लेकर मरीजों के परिजनों के बीच शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर हुई इस घटना ने कुछ समय के लिए व्यवस्था को प्रभावित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करीब 20 मिनट तक दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट होती रही, जिसमें लात-घूंसों के साथ बेल्ट का भी इस्तेमाल किया गया। घटना के कारण वहां मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में भय और अफरा-तफरी का वातावरण बन गया। जानकारी के अनुसार नई इमारत में बड़ी संख्या में मरीजों और उनके परिजन लिफ्ट का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान पहले लिफ्ट में प्रवेश करने को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। शुरुआत में मामला केवल बहस तक सीमित था, लेकिन कुछ ही मिनटों में दोनों पक्ष आक्रामक हो गए और विवाद हाथापाई में बदल गया। देखते ही देखते दोनों ओर से लोग एक-दूसरे पर हमला करने लगे, जिससे अस्पताल परिसर में हंगामा मच गया।प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। कई लोग एक-दूसरे पर लात-घूंसों से हमला करते दिखाई दिए, जबकि कुछ लोगों ने बेल्ट निकालकर भी मारपीट की। अचानक हुई इस घटना से लिफ्ट के बाहर खड़े मरीजों के परिजन घबरा गए और अपनी सुरक्षा के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ देर के लिए अस्पताल की नई इमारत में अव्यवस्था जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। अस्पताल में इलाज के लिए आए मरीजों और उनके स्वजनों को भी इस हंगामे के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा।घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल परिसर में तैनात शीर्ष परिचालन प्रभारी और सुरक्षा कर्मी तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित किया। सुरक्षा कर्मियों की त्वरित कार्रवाई के कारण मामला और अधिक नहीं बढ़ सका। यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया जाता, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। इसके बाद अस्पताल परिसर में कुछ समय तक अतिरिक्त सतर्कता बरती गई, ताकि दोबारा किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।मारपीट की घटना के बाद परसा बाजार निवासी अमित ने पीरबहोर थाना में लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने अपने आवेदन में बताया कि लिफ्ट में पहले प्रवेश करने को लेकर कुछ लोगों से विवाद हुआ था। इसी दौरान दो अज्ञात व्यक्तियों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी गंभीर कारण के उन पर हमला किया गया, जिससे उन्हें चोटें भी आईं। पुलिस ने आवेदन मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए विधिक कार्रवाई शुरू कर दी। घटना का सीसीटीवी भी सामने आया है, जिसमें स्पष्ट रूप से दोनों पक्षों के बीच मारपीट होती दिखाई दे रही है। सीसीटीवी में कुछ लोग लात-घूंसों और बेल्ट से हमला करते नजर आ रहे हैं, जबकि आसपास मौजूद अन्य लोग खुद को बचाने के लिए भागते दिखाई देते हैं। पुलिस इसी सीसीटीवी के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है और पहचान पूरी होते ही संबंधित लोगों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।पीरबहोर थाना पुलिस ने पीड़ित के आवेदन के आधार पर दो अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है। घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच होगी और यदि आवश्यक हुआ तो अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। हाल के समय में अस्पताल परिसर में विवाद और हंगामे की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि परिसर में तैनात शीर्ष परिचालन दल और सुरक्षा कर्मियों की सक्रियता बढ़ा दी गई है। आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। अस्पताल प्रशासन और पुलिस दोनों ने लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल ऐसा स्थान है जहां गंभीर रूप से बीमार मरीज उपचार के लिए आते हैं। ऐसे स्थानों पर किसी भी प्रकार का विवाद न केवल मरीजों और उनके परिजनों के लिए परेशानी का कारण बनता है, बल्कि चिकित्सा व्यवस्था भी प्रभावित होती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल परिसर में कानून व्यवस्था भंग करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि मरीजों को सुरक्षित और शांत वातावरण में उपचार मिल सके।


