आठ दिन बाद खत्म हुई सफाईकर्मियों की हड़ताल, सरकार और संघर्ष समिति के बीच बनी सहमति

  • नगर विकास मंत्री के साथ हुई वार्ता में अधिकांश मांगें स्वीकार, शेष मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार का आश्वासन
  • वेतन भुगतान में पारदर्शिता, नियमितीकरण और सेवा लाभ से जुड़े प्रस्ताव सरकार को भेजे जाएंगे, सफाई व्यवस्था बाधित करने पर एजेंसियों पर 63.16 करोड़ रुपये का जुर्माना

पटना। नगर निगम सहित बिहार के सभी नगर निकायों में पिछले आठ दिनों से जारी सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। लंबे गतिरोध के बाद राज्य सरकार की पहल पर सफाईकर्मी संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल और नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। दोनों पक्षों के बीच विस्तृत चर्चा के बाद कर्मचारियों की अधिकांश मांगों पर सहमति बन गई, जबकि शेष मांगों पर सरकार ने सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिया। इसके बाद संघर्ष समिति ने हड़ताल वापस लेने की औपचारिक घोषणा कर दी, जिससे राज्यभर में सफाई व्यवस्था सामान्य होने का मार्ग प्रशस्त हो गया। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी स्थिति में सफाईकर्मियों की हड़ताल समाप्त कराई जाए। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान कर्मचारियों के विरुद्ध की गई दंडात्मक कार्रवाई को भी समाप्त करने का निर्देश दिया गया। सरकार की इसी पहल के बाद वार्ता का रास्ता खुला और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने में सफलता मिली। हड़ताल समाप्त होने के बाद नगर निकायों में सफाई कार्य दोबारा शुरू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। इससे पहले पटना नगर निगम में महापौर सीता साहू की अध्यक्षता में सशक्त स्थायी समिति की विशेष बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में स्पष्ट किया गया कि सफाईकर्मियों की अधिकांश मांगें नगर निगम के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। इसलिए इन मांगों पर निर्णय लेने के लिए सभी प्रस्ताव नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजे जाएंगे। समिति ने सर्वसम्मति से राज्य सरकार को आवश्यक प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया, ताकि कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके। महापौर सीता साहू ने कहा कि पटना नगर निगम हमेशा से सफाईकर्मियों के हितों और उनके कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने बताया कि दैनिक और संविदा पर कार्यरत सफाईकर्मियों के वेतनमान में संशोधन और समायोजन का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा। साथ ही कर्मचारियों के नियमितीकरण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया जाएगा। उनका कहना था कि कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान सरकार के सहयोग से ही संभव है। बैठक में वेतन भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर भी सहमति बनी। निर्णय लिया गया कि बाहरी एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत सफाईकर्मियों का वेतन अब सीधे उनके बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना भी कम होगी। एजेंसियों को केवल उनका निर्धारित सेवा शुल्क दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त यह भी निर्णय लिया गया कि यदि वाहन की तकनीकी खराबी के कारण सफाई कार्य प्रभावित होता है, तो वाहन चालक के वेतन में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। बैठक में आश्वस्त प्रगति योजना और संशोधित सुनिश्चित प्रगति योजना के लाभ पर भी चर्चा हुई। विभाग द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटाने के लिए नगर निगम राज्य सरकार को पत्र भेजेगा। विभागीय अनुमति मिलते ही पात्र कर्मचारियों को इन सेवा लाभों का भुगतान शुरू कर दिया जाएगा। यह सुविधा उन कर्मचारियों को दी जाती है, जिन्हें लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद पदोन्नति का अवसर नहीं मिल पाता है। कर्मचारियों का कहना था कि इस लाभ से उन्हें आर्थिक और सेवा संबंधी सुरक्षा मिलेगी। इधर, सफाई व्यवस्था बाधित होने के मामले में नगर निगम ने बाहरी एजेंसियों के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया है। हड़ताल के दौरान पर्याप्त सफाईकर्मी, चालक और वाहन उपलब्ध नहीं कराने के कारण संबंधित एजेंसियों पर कुल 63 करोड़ 16 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। नगर निगम ने तीसरी बार कारण बताओ सूचना भी जारी की है। निगम प्रशासन के अनुसार, तीन और चार अगस्त को भी आवश्यक संख्या में कर्मचारी और वाहन उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। केवल इन दो दिनों की लापरवाही के लिए ही 18 करोड़ 59 लाख रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया, जबकि शेष राशि का दंड पहले ही निर्धारित किया जा चुका था। अब हड़ताल समाप्त होने के बाद नगर निगम और अन्य नगर निकायों ने सफाई व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि शहर में जमा कचरे का शीघ्र निस्तारण किया जाएगा और सभी क्षेत्रों में नियमित सफाई अभियान चलाया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि कर्मचारियों की मांगों के समाधान की दिशा में उठाए गए कदमों से भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होगी तथा नगर निकायों की सेवाएं पहले की तरह सुचारु रूप से संचालित होती रहेंगी।

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