बिहार में सहायक प्रोफेसरों की बड़ी भर्ती का रास्ता साफ, सितंबर से शुरू होगी नियमित नियुक्ति प्रक्रिया

  • 211 डिग्री कॉलेजों में 2,532 और विश्वविद्यालयों में लगभग 7,000 पदों पर होगी भर्ती, उच्च शिक्षा को मिलेगा नया बल
  • लिखित परीक्षा के बाद होगी चयन प्रक्रिया, संविदा सहायक प्रोफेसर 10 अगस्त से संभालेंगे कार्यभार

पटना। बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे युवाओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने राज्य के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में लंबे समय से रिक्त पड़े सहायक प्रोफेसरों के पदों पर नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। आयोग के अध्यक्ष गिरीश कुमार चौधरी ने जानकारी दी है कि नियमित सहायक प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया सितंबर महीने से प्रारंभ की जाएगी। इस भर्ती अभियान के माध्यम से राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। आयोग के अनुसार राज्य के 211 डिग्री कॉलेजों में कुल 2,532 नियमित सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति की जाएगी। इन पदों के लिए राज्य सरकार की ओर से रिक्तियों का रोस्टर तैयार कर लिया गया है और आयोग अब भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। लंबे समय से शिक्षकों की कमी का सामना कर रहे महाविद्यालयों में इन नियुक्तियों के बाद शैक्षणिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। आयोग अध्यक्ष गिरीश कुमार चौधरी ने बताया कि कुछ विषयों में पहले जारी की गई नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान सभी पद नहीं भर पाए थे। ऐसे छह विषयों में कई पद रिक्त रह गए थे। अब इन सभी रिक्तियों को भरने के लिए दोबारा भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि किसी भी विषय में शिक्षकों की कमी न रहे और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। आयोग का उद्देश्य सभी स्वीकृत पदों पर योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति सुनिश्चित करना है। डिग्री कॉलेजों के अलावा राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में भी बड़े पैमाने पर नियमित सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति की जाएगी। आयोग के अनुसार विश्वविद्यालयों में लगभग 7,000 पदों पर भर्ती की तैयारी चल रही है। कुलाधिपति के निर्देश के बाद भर्ती प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक नियम, विनियम और अधिनियम तैयार कर लिए गए हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों में नियमित नियुक्ति का मार्ग भी लगभग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों से राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर हो सकेगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नियमित सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता आधारित होगी। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा अनिवार्य होगी। लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को आगे निर्धारित नियमों के अनुसार साक्षात्कार और अन्य आवश्यक चयन प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। आयोग का कहना है कि पूरी चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संचालित की जाएगी, जिससे केवल योग्य और प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों का चयन सुनिश्चित हो सके। इससे राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित नियुक्तियां होने से उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक वातावरण मजबूत होगा। लंबे समय से रिक्त पदों के कारण कई विषयों में नियमित कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही थीं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। नए शिक्षकों की नियुक्ति के बाद शिक्षण कार्य में निरंतरता आएगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होगा। इसी बीच डिग्री कॉलेजों में तत्काल शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए संविदा आधारित सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति प्रक्रिया भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। आयोग के अनुसार चयनित संविदा सहायक प्रोफेसर 10 अगस्त से विभिन्न महाविद्यालयों में अपना योगदान देना शुरू कर देंगे। इनके कार्यभार संभालते ही जिन विषयों में लंबे समय से शिक्षकों का अभाव था, वहां नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन शुरू हो सकेगा। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई में आने वाली बाधाएं काफी हद तक समाप्त होने की संभावना है। बिहार सरकार और बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग का मानना है कि नियमित और संविदा दोनों स्तरों पर की जा रही नियुक्तियां राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देंगी। बड़ी संख्या में रिक्त पदों पर योग्य शिक्षकों की नियुक्ति से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही हजारों अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर भी प्राप्त होगा। अब अभ्यर्थियों की निगाहें सितंबर में शुरू होने वाली नियमित भर्ती प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिससे राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित नियुक्तियों का रास्ता पूरी तरह खुलने की उम्मीद है।

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