सफाईकर्मियों की हड़ताल से पटना बेहाल, सातवें दिन भी नहीं थमा कचरे का संकट

  • सात दिनों में 3600 टन से अधिक कचरा सड़कों पर जमा, बारिश के बीच बढ़ा संक्रमण फैलने का खतरा
  • स्थायी नियुक्ति और निर्धारित मजदूरी की मांग पर अड़े कर्मचारी, प्रशासन ने लागू की भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163

पटना। बिहार के सभी नगर निकायों सहित पटना नगर निगम के आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कार्यरत सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल बुधवार को सातवें दिन भी जारी रही। हड़ताल का सबसे अधिक प्रभाव राजधानी पटना में देखने को मिल रहा है, जहां शहर के अधिकांश इलाकों में कचरा उठाव पूरी तरह ठप हो गया है। लगातार हो रही बारिश के बीच सड़कों और गलियों में कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लगने से न केवल लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी तेजी से बढ़ गया है। नगर निगम के अनुसार पिछले सात दिनों में शहर में लगभग 3600 टन से अधिक कचरा जमा हो चुका है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था गंभीर संकट का सामना कर रही है। बारिश के कारण कूड़े के ढेरों से उठ रही दुर्गंध ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक खुले में पड़े कचरे के कारण डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है। जलभराव और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रजनन भी तेजी से हो सकता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में कूड़ा उठाव पूरी तरह बंद है। मौर्य लोक, कंकड़बाग, कदमकुआं, जगत नारायण रोड, खेतान मार्केट और वीरचंद पटेल पथ सहित अनेक स्थानों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। कई मोहल्लों में पिछले कई दिनों से सफाई नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बाजार क्षेत्रों में भी गंदगी बढ़ने से व्यापारियों और ग्राहकों को असुविधा हो रही है। सफाईकर्मियों की हड़ताल का असर केवल कूड़ा उठाव तक सीमित नहीं है। नगर निगम द्वारा संचालित मच्छर नियंत्रण अभियान भी प्रभावित हुआ है। एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव और फॉगिंग का कार्य लगभग ठप पड़ गया है। नगर निगम सीमित संसाधनों के सहारे केवल प्रमुख सड़कों की आंशिक सफाई करा पा रहा है, जबकि अधिकांश आवासीय क्षेत्रों में सफाई कार्य पूरी तरह बंद है। इससे नागरिकों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हड़ताल का असर राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं के आवासों तथा उनके आसपास की सड़कों और गलियों में भी कूड़े के ढेर लगे हैं। वीरचंद पटेल पथ स्थित विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यालयों के आसपास भी गंदगी का अंबार देखने को मिल रहा है। इससे नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पटना साहिब के सांसद रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत कर हड़ताल समाप्त कराने का प्रयास किया। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने पर बल दिया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक हड़ताल समाप्त कराने को लेकर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी। नगर निगम मुख्यालय स्थित मौर्य लोक परिसर में चल रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने और सरकारी कार्यों को सुचारु रूप से संचालित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। दूसरी ओर सचिवालय थाना में हड़ताली कर्मचारियों के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने नगर निगम के वाहनों की मरम्मत कर रहे कर्मियों के साथ मारपीट की, अभद्र व्यवहार किया तथा सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई। पुलिस मामले की जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले लगभग 15 वर्षों से नगर निगम में कार्यरत हैं, लेकिन आज भी उन्हें निजी एजेंसियों के माध्यम से काम कराया जा रहा है। उनका आरोप है कि सरकार द्वारा निर्धारित 525 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी के स्थान पर उन्हें केवल 324 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है। कर्मचारी आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर सीधे नगर निगम के अधीन नियुक्ति तथा स्थायीकरण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लगभग आठ हजार दैनिक वेतनभोगी और अनुबंध आधारित कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति का मामला लंबे समय से लंबित है, जिसके समाधान की मांग को लेकर वे आंदोलन कर रहे हैं। फिलहाल शहर में सफाई व्यवस्था बहाल होने की कोई स्पष्ट संभावना दिखाई नहीं दे रही है। यदि जल्द ही प्रशासन और कर्मचारियों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो राजधानी में कचरे का संकट और गहरा सकता है। नागरिकों की नजर अब सरकार और नगर निगम की आगामी पहल पर टिकी है, जिससे इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सके और शहर की सफाई व्यवस्था सामान्य हो सके।

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