महिला पहलवान प्रकरण में बृजभूषण शरण सिंह बरी, राउज एवेन्यू न्यायालय ने सुनाया फैसला

  • 1133 दिनों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद पूर्व सांसद और पूर्व कुश्ती महासंघ सचिव को मिली राहत
  • फैसले के बाद बृजभूषण बोले– यदि आरोप सिद्ध होते तो फांसी पर चढ़ जाता, समर्थकों ने किया स्वागत

नई दिल्ली। महिला पहलवानों से जुड़े चर्चित यौन शोषण मामले में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू न्यायालय ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद बृजभूषण शरण सिंह तथा भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सचिव विनोद तोमर को सभी आरोपों से सम्मानपूर्वक बरी कर दिया। इस बहुचर्चित मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार ने अपना निर्णय सुनाया। फैसले के साथ ही करीब साढ़े तीन वर्षों से चल रही न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। निर्णय सुनाए जाने के समय न्यायालय कक्ष में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर स्वयं उपस्थित थे। दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें दो जुलाई 2026 को पूरी हो गई थीं, जिसके बाद न्यायालय ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपितों को बरी कर दिया। यह मामला जनवरी 2023 में उस समय सामने आया था, जब कई महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को जन्म दिया था। देश के कई प्रमुख पहलवानों ने धरना-प्रदर्शन किया था और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद यह प्रकरण न्यायालय तक पहुंचा और लंबे समय तक इसकी सुनवाई चलती रही। न्यायिक अभिलेखों के अनुसार इस मामले में कुल 1133 दिनों तक न्यायिक प्रक्रिया चली और इस दौरान 127 बार सुनवाई हुई। मई 2023 में उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। छह महिला पहलवानों ने शिकायत दी थी। हालांकि बाद में एक नाबालिग पहलवान ने अपनी शिकायत वापस ले ली और अपना बयान भी बदल दिया था। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। दस मई 2024 को न्यायालय ने दिल्ली पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र के आधार पर आरोप निर्धारित किए थे। इसके बाद मुकदमे की विधिवत सुनवाई शुरू हुई। बृजभूषण शरण सिंह बीस जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर थे और सुनवाई के दौरान लगातार न्यायालय में उपस्थित होते रहे। मुकदमे के दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था। फैसला आने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि न्यायालय ने उन्हें और विनोद तोमर को सम्मानपूर्वक बरी किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी कहा था कि यदि उनके विरुद्ध कोई भी आरोप सिद्ध हो जाता तो वह फांसी पर चढ़ने के लिए तैयार थे। उन्होंने इसे अपने जीवन का खुशी का दिन बताते हुए कहा कि न्यायालय के विस्तृत आदेश की प्रति प्राप्त होने के बाद वह इस विषय पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। निर्णय के बाद जब बृजभूषण शरण सिंह अपने आवास पहुंचे तो समर्थकों ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया और उनके समर्थन में नारे लगाए। मीडिया द्वारा प्रतिक्रिया पूछे जाने पर उन्होंने संक्षिप्त रूप से कहा, “होइहि सोइ जो राम रचि राखा”, अर्थात जो ईश्वर की इच्छा होती है, वही होता है। उधर बृजभूषण शरण सिंह के पुत्र करण भूषण ने भी सामाजिक माध्यम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा कि साजिश विफल हुई और सत्य की विजय हुई। उन्होंने अपने पिता के सम्मानपूर्वक बरी होने को न्याय की जीत बताते हुए “सत्यमेव जयते” लिखा। भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने भी न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बृजभूषण शरण सिंह पर लगाए गए आरोप असत्य थे और न्यायालय ने उन्हें सम्मानपूर्वक बरी कर दिया है। उनके अनुसार इस निर्णय से पूरे कुश्ती जगत में संतोष और खुशी का वातावरण है। यह मामला लंबे समय तक देशभर में चर्चा का विषय बना रहा। महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा, खेल संगठनों की जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर व्यापक बहस हुई। अब न्यायालय के निर्णय के बाद इस मामले का कानूनी पक्ष स्पष्ट हो गया है। हालांकि विस्तृत निर्णय की प्रति सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि न्यायालय ने किन आधारों पर दोनों आरोपितों को दोषमुक्त माना। फिलहाल इस फैसले ने देश की राजनीति और खेल जगत में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है, वहीं दोनों पक्षों की आगे की रणनीति पर भी सभी की नजरें बनी हुई हैं।

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