हाईकोर्ट,कमिश्नर-डीएम किसी के आदेश का यहां कोई असर नहीं,राजीव नगर में जारी है अवैध निर्माण,पुलिस पस्त नहीं मस्त
>>बड़े पैमाने पर ‘थैलियों’ के लेन-देन के बदले दी जाती है अवैध निर्माण की मौखिक स्वीकृति

>>स्थानीय पुलिस को पटना डीएम के आदेश का भी नहीं है डर,पूरी तरह से निर्माण रोकने की जिम्मेदारी मगर खेल कुछ और
>>स्थानीय पुलिस के कतिपय भ्रष्ट अधिकारियों संरक्षण में ही अवैध निर्माण के कार्य फल-फूल रहा है
पटना।इसी वर्ष फरवरी माह में पटना के डीएम ने एक विभागीय समीक्षात्मक बैठक करके निर्देश जारी किया था कि बिहार राज्य आवास बोर्ड के द्वारा अधिग्रहित राजीव नगर के किसी भी भूखंड पर अवैध निर्माण के कार्य किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए.इसके बावजूद राजीव नगर थाना क्षेत्र तथा दीघा थाना क्षेत्र में बिहार राज्य आवास बोर्ड के अधिग्रहित कई प्रतिबंधित भूखंडों पर खुलेआम अवैध निर्माण के कार्य हो रहा है.मुख्य सड़क तथा सहायक सड़कों पर अवैध निर्माण का बेतहाशा जारी है. बताया जाता है कि स्थानीय पुलिस के मिलीभगत से आवास बोर्ड के राजीव नगर में अधिग्रहित 1024 एकड़ जमीन पर भूमि माफियाओं के द्वारा अवैध रूप बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण का खेल जारी है।
ऐसा नहीं है कि राजीव नगर इलाके की अधिग्रहित भूमि पर नजर रखने के लिए स्थानीय थाना और आवास बोर्ड की गाड़ी दल-बल के साथ गली-गली फर्राटा नहीं भर रही है| ड्यूटी में तैनात पुलिस प्रशासन और आवास बोर्ड के लोग पूरी मुश्तैदी के साथ चौबीस घंटे पेट्रोलिंग के काम में जुटे हुए है, बावजूद इसके सैकड़ों की तादाद में निर्माण कार्य जारी है। इसका ज़िम्मेवार कौन है?
अवैध निर्माण रोकने की कार्रवाई अक्सर सिर्फ कागजों तक ही सिमटकर रह जाती है जिसका दुष्परिणाम है कि इस इलाके में भू-माफिया और दलालों की सक्रियता समय के साथ बढ़ती जा रही है| इस प्रकार मोटी रकम उगाही करने की होड़ में जुटे आवास बोर्ड और स्थानीय पुलिस की माफियाओं से बढ़ी गठजोड़ के कारण अवैध निर्माण कार्य चहुओर जारी है| इसके विरुद्ध स्थानीय थाना में न शिकायत दर्ज की जा रही है और न ही कोई दंडात्मक कार्रवाई
आवास बोर्ड तथा स्थानीय प्रशासन को ‘थैली’ के माध्यम से ‘मैनेज’ करके भूमि माफियाओं के द्वारा बड़े पैमाने पर राजीव नगर के रिक्त भूभाग जिस पर 2018 के बाद किसी भी सूरत में नए निर्माण पर उच्च न्यायालय से रोक है।वहां न सिर्फ खाली पड़े जमीनों की खरीद बिक्री की जा रही है,बल्कि दबंगई के जोर पर जमीन पर कब्जा दिलाया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन के मिलीभगत से सरकार को खुलेआम चुनौती देकर बड़े पैमाने पर चार दिवारी तथा नए मकान के निर्माण के कार्य को खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है।राजधानी पटना के दीघा तथा राजीव नगर थाना क्षेत्र में बिहार राज्य आवास बोर्ड के अधिग्रहित जमीन पर किसी प्रकार के निर्माण पर पूरी तरह से लगाई गई रोक के बावजूद अवैध निर्माण का सिलसिला जारी है।राजीव नगर में लंबे अर्से से भूमि माफियाओं के द्वारा करोड़ों की काली कमाई का खेल खेला जा रहा है।अधिग्रहित भूमि की खरीद बिक्री का काला धंधा बदस्तूर जारी है। राजीव नगर के दीघा- आशियाना रोड,घुड़दौड़ मोड, तथा पॉलशन रोड, रोड नं-24,25 समेत कई स्थानों पर जमकर अवैध निर्माण जारी है।गत फरवरी माह में पटना के तत्कालीन जिलाधिकारी त्यागराजन एमएस ने एक समीक्षात्मक बैठक के दौरान स्पष्ट आदेश जारी किए थे कि राजीव नगर इलाके में किसी प्रकार का अवैध निर्माण हर हाल में रोका जाए। अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस की है.लेकिन पुलिस की आंखों के सामने अवैध निर्माण जारी है.जिससे बस यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थानीय पुलिस के कतिपय भ्रष्ट अधिकारियों संरक्षण में ही अवैध निर्माण के कार्य फल-फूल रहा है. आवास बोर्ड के द्वारा अधिग्रहित 1024 एकड़ जमीन में पटना उच्च न्यायालय के द्वारा अवैध निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगाया गया है। इतना ही नहीं राजीव नगर तथा दीघा थाना में भूमि माफियाओं के विरुद्ध कई मामले दर्ज है।इसके बावजूद अवैध निर्माण का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है।माना जाता है कि बड़े पैमाने पर ‘थैलियों’ के ‘लेन-देन’ के बदले निर्माण को मौखिक स्वीकृति दी जाती है।जिसके फलस्वरुप अवैध निर्माण का कार्य फाइलों में बंद लेकिन हकीकत में चालू रहता है।

