पहली ही तेज बारिश में धंसीं पटना की सड़कें, विकास कार्यों की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

  • हाल में बनी और मरम्मत की गई कई सड़कें हुईं बदहाल, जलभराव और गड्ढों से बढ़ा हादसों का खतरा
  • नागरिकों ने बरसात में नई खुदाई पर रोक, दोषी निर्माण एजेंसियों पर कार्रवाई और तत्काल मरम्मत की उठाई मांग

पटना। राजधानी पटना में मानसून की पहली तेज बारिश ने शहर के विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। जिन सड़कों का हाल ही में निर्माण या मरम्मत कराया गया था, वे पहली ही बारिश में जगह-जगह धंसने लगी हैं। कई इलाकों में सड़कें टूट गई हैं, बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और जलभराव की स्थिति ने लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। शहर के प्रमुख मार्गों पर बने इन गड्ढों में वर्षा का पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। इससे दोपहिया वाहन चालकों, चारपहिया वाहनों और पैदल चलने वालों के लिए हर कदम पर दुर्घटना का खतरा पैदा हो गया है। नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़कें पहली ही बारिश नहीं झेल पा रही हैं, तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जलभराव और धंसी सड़कें बनीं सबसे बड़ी चुनौती
मानसून की बारिश के साथ ही राजधानी के कई इलाकों में सड़कें धंसने और टूटने लगी हैं। कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है, जबकि कहीं गहरे गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों में वर्षा का पानी भर जाने के कारण वाहन चालकों को यह पता ही नहीं चल पाता कि सड़क कितनी क्षतिग्रस्त है। परिणामस्वरूप कई लोग दुर्घटना का शिकार होते-होते बच रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों और साइकिल सवारों को हो रही है, जिन्हें संतुलन बनाए रखना कठिन पड़ रहा है। वहीं पैदल चलने वाले लोगों को भी जलभराव और कीचड़ के बीच आवाजाही करनी पड़ रही है।
बरसात के बीच भी जारी है सड़कों की खुदाई
शहरवासियों की चिंता केवल धंसी हुई सड़कों तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में बारिश के दौरान भी सड़कों की खुदाई का कार्य लगातार जारी है। लोगों का कहना है कि मानसून के समय नई खुदाई शुरू करने से पहले पहले से चल रहे निर्माण कार्यों को पूरा करना और क्षतिग्रस्त मार्गों की मरम्मत करना अधिक आवश्यक है। खुले गड्ढों और अधूरे निर्माण कार्यों के कारण आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। नागरिकों का मानना है कि बरसात के मौसम में नई खुदाई पर अस्थायी रोक लगाकर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इन इलाकों में सबसे अधिक खराब हुई स्थिति
राजधानी के पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र, बालूपर कुर्जी और राजीव नगर नाला मार्ग की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बताई जा रही है। इन क्षेत्रों में हाल ही में सड़क निर्माण और मरम्मत का कार्य कराया गया था, लेकिन पहली ही तेज बारिश के बाद सड़कें जगह-जगह धंस गईं। कई स्थानों पर बड़े गड्ढे बन जाने से वाहन चालकों को अत्यधिक सावधानी के साथ गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय या तेज बारिश के दौरान इन रास्तों पर दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।
सीवरेज पाइपलाइन के बाद बनी सड़क भी नहीं टिक सकी
पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत सीवरेज पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा होने के बाद लगभग एक माह पहले सड़क पर डामर की नई परत बिछाई गई थी। लोगों को उम्मीद थी कि लंबे समय तक सड़क बेहतर स्थिति में रहेगी, लेकिन पहली ही बारिश में कई स्थानों पर सड़क धंस गई। सड़क की सतह टूटने से बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे रोजाना हजारों वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया होता तो सड़क इतनी जल्दी खराब नहीं होती।
मरम्मत के कुछ दिनों बाद ही उखड़ गई सड़क
बालूपर कुर्जी क्षेत्र में भी हाल ही में सड़क की मरम्मत कराई गई थी। जिस हिस्से पर नई डामर परत बिछाई गई थी, वही सबसे पहले धंस गया। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसकी निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया और कार्य की सही ढंग से जांच भी नहीं हुई। उनका कहना है कि सरकारी धन खर्च होने के बावजूद यदि सड़कें कुछ ही दिनों में खराब हो जाएं तो इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
लोगों ने उठाई जवाबदेही तय करने की मांग
लगातार धंसती सड़कों ने संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि केवल सड़क बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता की नियमित जांच और निर्माण कार्य की प्रभावी निगरानी भी आवश्यक है। लोगों ने मांग की है कि जिन ठेकेदारों या एजेंसियों की लापरवाही के कारण सड़कें समय से पहले खराब हुई हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही बरसात के दौरान नई खुदाई पर रोक लगाई जाए और पहले से क्षतिग्रस्त मार्गों की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
समय रहते नहीं उठाए गए कदम तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
लगातार हो रही बारिश के बीच यदि सड़कों की मरम्मत और जलनिकासी की व्यवस्था में तेजी नहीं लाई गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। सड़क पर बने गहरे गड्ढे और जलभराव न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित करेंगे, बल्कि बड़े हादसों का कारण भी बन सकते हैं। शहरवासियों का कहना है कि राजधानी की सड़कों को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, जवाबदेही तय करना और समय पर मरम्मत कराना अब सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। तभी लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सकेगी और विकास कार्यों पर जनता का भरोसा भी कायम रह पाएगा।

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