पटना के निजी विद्यालय में छात्र की संदिग्ध मौत से हंगामा, परिजनों ने पिटाई का लगाया आरोप
- विद्यालय परिसर में तोड़फोड़ और सड़क जाम, संचालक, प्रधानाचार्य सहित अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज
- मृत्यु के कारणों की जांच तेज, शव परीक्षण रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर टिकी आगे की कार्रवाई
पटना। राजधानी पटना के दीघा थाना क्षेत्र स्थित कुर्जी गेट संख्या-77 के समीप संचालित एक निजी विद्यालय में आठवीं कक्षा के 12 वर्षीय छात्र राजवीर राय की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने विद्यालय परिसर में तोड़फोड़ की, सड़क जाम कर प्रदर्शन किया तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतक राजवीर राय कुर्जी गेट संख्या-80 का निवासी था। उसके पिता नीरज राय ने विद्यालय प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दीघा थाना में विद्यालय संचालक सुधीर सिंह, प्रधानाचार्य आशा राय तथा अन्य अज्ञात शिक्षकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।
परिजनों ने लगाया मारपीट का आरोप
मृतक के पिता नीरज राय, जो टेंट व्यवसाय से जुड़े हैं, का कहना है कि उनका पुत्र पिछले लगभग नौ वर्षों से उसी विद्यालय में पढ़ाई कर रहा था। उनके अनुसार सोमवार की सुबह राजवीर रोज की तरह नाश्ता कर प्रसन्नचित्त अवस्था में विद्यालय गया था। दोपहर लगभग 12 बजे विद्यालय से सूचना मिली कि उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई है। परिजनों का कहना है कि जब वे विद्यालय पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि छात्र को कुर्जी स्थित एक अस्पताल भेज दिया गया है। वहां पहुंचने पर उन्होंने अपने बेटे को एक वाहन पर लेटा हुआ पाया। उनका आरोप है कि उस समय उल्टी के दौरान उसके मुंह से खून निकल रहा था। बाद में उसे गंभीर अवस्था में कंकड़बाग स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां मंगलवार सुबह लगभग साढ़े सात बजे चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नीरज राय का आरोप है कि विद्यालय में उनके पुत्र के साथ मारपीट की गई थी, जिसके कारण उसकी तबीयत बिगड़ी और अंततः उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है।
विद्यालय प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर विद्यालय संचालक सुधीर सिंह ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को अस्वीकार किया है। उनका कहना है कि घटना के समय खेलकूद की कक्षा चल रही थी। नियमित कक्षा अध्यापक के अवकाश पर होने के कारण सभी छात्र मैदान में खेल रहे थे। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार खेल के दौरान राजवीर अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। इसके बाद विद्यालय प्रशासन ने तत्काल उसके परिजनों को सूचना दी और बिना देर किए उसे अस्पताल पहुंचाया। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि उसने छात्र को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास किया।
जांच में सामने आईं प्रशासनिक अनियमितताएं
मामले की जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जिन्होंने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और संबंधित अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में पता चला कि विद्यालय परिसर में निगरानी कैमरे लगे होने के बावजूद घटना के समय कोई भी कैमरा चालू नहीं था। इससे घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर संदेह और गहरा गया है। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में पंजीकृत नहीं है तथा उसे आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र भी प्राप्त नहीं है। वर्ष 2022-23 के बाद से विद्यालय ने एकीकृत जिला सूचना प्रणाली पोर्टल पर विद्यार्थियों का विवरण भी अपलोड नहीं किया था, जिसके कारण उसका पंजीकरण पोर्टल निष्क्रिय हो गया था। इन प्रशासनिक तथ्यों की भी अलग से जांच की जा रही है।
चिकित्सकों ने बताई स्वास्थ्य संबंधी गंभीर स्थिति
जिस अस्पताल में छात्र का इलाज चल रहा था, वहां के चिकित्सकों ने बताया कि जांच के दौरान छात्र का हृदय सामान्य क्षमता की तुलना में केवल लगभग 25 प्रतिशत ही कार्य कर रहा था। चिकित्सकों के अनुसार उसके हृदय का एक वाल्व भी प्रभावित था, जिससे उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई थी डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी अवस्था में मरीज को बचाना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मृत्यु का वास्तविक कारण शव परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद ही निश्चित रूप से बताया जा सकेगा।
पुलिस कर रही बहुआयामी जांच
दीघा थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस कथित मारपीट, छात्र की चिकित्सकीय स्थिति, विद्यालय प्रबंधन की भूमिका, प्रशासनिक अनियमितताओं तथा उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों सहित सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव परीक्षण रिपोर्ट, चिकित्सकीय अभिलेख, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, मारपीट या अन्य प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध विधि के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे घटनाक्रम ने राजधानी में निजी विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक मानकों को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। वहीं छात्र की मौत से शोकाकुल परिवार न्याय की मांग कर रहा है और पूरे मामले पर पुलिस तथा शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


