पीएमसीएच में मरीज की मौत के बाद नर्सों का प्रदर्शन, चिकित्सकों पर कार्रवाई की मांग
- वरिष्ठ परिचारिका के पति की मौत के बाद अस्पताल परिसर में बढ़ा तनाव, आपातकालीन सेवा हुई प्रभावित
- इलाज में लापरवाही और परिजनों से मारपीट के आरोप, अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की
पटना। राजधानी पटना स्थित पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद मंगलवार को अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई। अस्पताल की परिचारिकाओं ने अपने सहयोगी कर्मी के परिवार के साथ कथित दुर्व्यवहार और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के कारण अस्पताल की आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हुईं और कई परिचारिकाएं धरने पर बैठ गईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। मृतक की पहचान मराची के रामपुर डुमरा निवासी 55 वर्षीय अरविंद सिंह के रूप में हुई है। वह अस्पताल में लगभग दो दशकों से कार्यरत वरिष्ठ परिचारिका लक्ष्मी कुमारी के पति थे। उनकी सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई थी, जिसके बाद परिजनों और अस्पताल कर्मियों में आक्रोश फैल गया।
तीन दिन तक चला इलाज, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
जानकारी के अनुसार लक्ष्मी कुमारी ने अपने पति को गुरुवार की दोपहर लगभग तीन बजे अस्पताल की चिकित्सकीय आपातकालीन इकाई में भर्ती कराया था। परिजनों का कहना है कि लगातार तीन दिनों तक इलाज चलने के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और अंततः उनकी मृत्यु हो गई। मृतक के पुत्र शिवम कुमार का आरोप है कि यदि समय पर उचित और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जाता तो उनके पिता की जान बचाई जा सकती थी। उनका कहना है कि भर्ती होने के बाद उनके पिता का गुर्दा शोधन उपचार किया जा रहा था। इसी दौरान दवा का प्रतिकूल प्रभाव होने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार वरिष्ठ चिकित्सकों को बुलाने का प्रयास किया, लेकिन कोई वरिष्ठ चिकित्सक मरीज को देखने नहीं पहुंचा। उनका आरोप है कि कनिष्ठ चिकित्सकों ने भी मरीज की गंभीर स्थिति को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया।
मारपीट और अभद्र व्यवहार का भी आरोप
परिजनों ने इलाज में लापरवाही के साथ-साथ अस्पताल परिसर में मारपीट का भी आरोप लगाया है। शिवम कुमार का कहना है कि जब उन्होंने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाना शुरू किया और इलाज को लेकर विरोध जताया, तब कुछ कनिष्ठ चिकित्सकों ने उन्हें एक कमरे में ले जाकर बंद कर दिया। उनका आरोप है कि वहां उनके साथ तथा अन्य परिजनों के साथ लगभग एक घंटे तक मारपीट की गई। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मां लक्ष्मी कुमारी लगातार बीच-बचाव करती रहीं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। शिवम के अनुसार, जब उनकी मां ने हस्तक्षेप करने का प्रयास किया तो उनके साथ भी धक्का-मुक्की की गई तथा अभद्र व्यवहार किया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है और अस्पताल प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जांच की जा रही है।
अस्पताल परिसर में बढ़ा तनाव
घटना की जानकारी फैलते ही अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। कुछ समय के लिए अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बाद में अन्य परिचारिकाओं और अस्पताल कर्मचारियों के हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रित किया गया। मंगलवार सुबह से ही बड़ी संख्या में परिचारिकाएं अपनी सहयोगी लक्ष्मी कुमारी के समर्थन में धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने दोषी चिकित्सकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के कारण अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ा, जिससे इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
परिचारिकाओं ने उठाए गंभीर सवाल
धरने पर बैठीं परिचारिकाओं का कहना है कि यदि वर्षों से अस्पताल में सेवा दे रही एक वरिष्ठ परिचारिका के परिवार के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जा सकता है, तो आम मरीजों और उनके परिजनों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रदर्शनकारी परिचारिकाओं का कहना है कि जब तक उन्हें निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलेगा, तब तक उनका विरोध जारी रह सकता है।
प्रशासन ने शुरू की जांच
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह स्वयं अस्पताल परिसर पहुंचे और प्रदर्शन कर रही परिचारिकाओं से बातचीत की। उन्होंने मामले की पूरी जानकारी ली और आश्वासन दिया कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज की मृत्यु, इलाज की प्रक्रिया, परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप तथा अस्पताल परिसर में हुई कथित मारपीट सहित पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी की लापरवाही या अनुचित आचरण सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अस्पताल में स्थिति सामान्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य उपचार सेवाओं को सुचारु रूप से संचालित रखना तथा मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। वहीं मरीज के परिजन और नर्सिंग कर्मी दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं, जिसके कारण पूरे घटनाक्रम पर अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नजर बनी हुई है।


