सम्राट सरकार में किसान-मजदूर और ग्रामीणों का आम रास्ता होगा बंद, डीसीएलआर का तुगलकी आदेश ने खड़ा किया विवाद

  • एसडीओ ने स्थलीय जांच कर दिया था आदेश पीसीसी ढलाई रास्ता बंद कर दख़ल- क़ब्ज़ा दिलाना धारा 147 के प्रावधानों के प्रतिकूल
  • आम रास्ता बंद करने का नोटिस तक नहीं दे रही प्रशासन, कैसे दाखिल करें अपील, कैसे जाएं हाईकोर्ट के शरण

पटना। बिहार में अब कानून का राज नहीं तुगलकी फ़रमान चल रहा है । अधिकारी किसी को मिटा देना तय कर लिए हैं तो आपको कोई बचा नहीं सकता है । दो साल पहले न्यायालय अनुमंडल दंडाधिकारी पालीगंज ( पटना ) ने अपने आदेश में स्पष्ट कहां था की ग्राम पंचायत के फ़ंड से पीसीसी ढलाई रास्ता बना है और 12-15 परिवार सहित आगे के ग्रामीणों का मात्र एक रास्ता है । जिसे बंद करने से इसके अग़ल – बग़ल व आगे बसे परिवार के लोगों का आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित होगा । इधर डीसीएलआर ने किसान – मज़दूरों और ग्रामीणों के आम रास्ता को बंद करने का तुगलकी फ़रमान दें गांव में विवाद खड़ा कर दिया है । यहां तक की आम रास्ता बंद करने का नोटिस तक ग्रामीणों को नहीं दिया गया है और इधर चुपचाप आगामी 23 जून 26 को आम रास्ता बंद कर देंने के लिए भारी पुलिस बल की मांग किए जाने की चर्चा है । इधर ग्रामीण का आरोप है की अगर हमें नोटिस दिया जाता तो हम हाईकोर्ट के शरण में जाते लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है ।
उक्त मामला पटना जिले के बिक्रम अंचल अंतर्गत ग्राम शाहजहांपुर का है । एक ग्रामीण ने यह बताते हुए न्यायालय अनुमंडल दंडाधिकारी पालीगंज के समक्ष वाद ले गया की मेरे रैयती जमीन में पीसीसी ढलाई रास्ता बन दिया गया है ।इसमें प्रखंड विकास पदाधिकारी को पार्टी बनाया गया । वाद संख्या- 147 ( एम ) 2023 के संदर्भ में एसडीएम पालीगंज ने दिनांक- 06/10/23 को प्रथम पक्ष के उपस्थिति में स्थल का निरीक्षण किया गया । निरीक्षण के दौरान लोगों सें पूछताछ के उपरांत पता चला की जिस जमीन पर पीसीसी ढलाई रास्ता बना है वह जमीन प्रथम पक्ष की रैयती जमीन है परंतु इस रास्ता का आगे पश्चिम की ओर बसे करीब 12-15 परिवार के लोगों द्वारा वर्ष 2009 से भी बहुत पूर्व से आम उपयोग कच्चा रास्ता के रूप में होता रहा है । जिसपर ग्राम पंचायत के किसी योजना से पगडंडी स्वरुप पीसीसी ढलाई कार्य किया गया है तथा यह आगे के लोगों का एकमात्र रास्ता है जिसे बंद करने से इसके अग़ल – बग़ल व आगे बसे परिवार के लोगों का आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित होगा । स्पष्ट है की ग्राम पंचायत द्वारा प्रथम पक्ष की जमीन का अतिक्रमण कर रास्ता नहीं बनाया गया है बल्कि एक लम्बी अवधि से प्रथम पक्ष की रैयती जमीन पर चालू आम रास्ता को पीसीसी ढलाई का स्वरूप दिया गया है । अतः प्रश्नगत पीसीसी ढलाई के रास्ता को बंद कर प्रथम पक्ष को दख़ल क़ब्ज़ा दिलाना धारा 147 द. प्र. सं. के प्रावधानों के प्रतिकूल होगा । न्यायालय भूमि सुधार उप समाहर्ता- पालीगंज ने वाद संख्या 62/2022-23 में दिनांक 13-02-26 को आदेश पारित किया की 1.37 डी . रैयती जमीन है वर्तमान में इस भूमि पर ढलाई रास्ता बना हुआ है लेकिन वादी का कहना है की उनके सहमति के बग़ैर बनाया गया है । अतः भूमि विवाद निराकरण अधिनियम 2009 की धारा 4 ( 1 ) ( जी ) के तहत वादगस्त भूमि पर रैयत के अधिकार की घोषणा की जाती है । दोनों आदेश को गौर से पढ़िए । दोनों कोर्ट समान अधिकार रखता है । दोनों आदेश में विसंगतियां स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है । दोनों आदेश में कहीं भी पीसीसी रोड को बंद कर दख़ल क़ब्ज़ा कराने का आदेश नहीं है । इधर डीसीएलआर पालीगंज ने एक अलग आवेदन पर अंचलाधिकारी बिक्रम को रैयती जमीन मालिक को उक्त 1.37 डी. जमीन दख़ल क़ब्ज़ा कराने का आदेश दिया है । इस आदेश का अनुपालन होने से आम किसानों- मज़दूरों का सरकारी फ़ंड से बने पीसीसी रोड बंद हो जाएगा । इधर ग्रामीणों का कहना है की एसडीएम पालीगंज और डीसीएलआर पालीगंज के आदेश में विसंगतियां है । ग्रामीणों का कहना है की ऐसी चर्चा है की आगामी 23 जून 26 को पुलिस- प्रशासन 50-60 वर्षों से बने आम रास्ता को बंद कर देगी । इस संबंध में नोटिस या आदेश की कॉपी की मांग कर रहे हैं की आगे अपील दाखिल करेंगे या फिर हाईकोर्ट के शरण में न्याय की गुहार लगाएँगे मौक़ा दिया जाएं लेकिन डीसीएलआर का तुगलकी फ़रमान के सामने हम ग़रीब किसान- मजदूर को कोई सुनने वाला नहीं है । मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यहां तक कहां है की 20-30 वर्षों से जो सरकारी जमीन पर बसे हैं उनका घर नहीं टूटेगा यहां तो प्रशासन हम लोगों का आम रास्ता ही बंद करने पर तुली हुई है जबकि सभी ग्रामीणों के सहमति से सरकारी फ़ंड से पीसीसी ढलाई रास्ता बना हुआ है ।इस मामले में पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता माधव राज ने बताया की टाइटल या दख़ल क़ब्ज़ा का डीसाइड एसडीओ- डीसीएलआर नहीं कर सकता है इसके लिए सिविल कोर्ट में वाद लाना होता है और सिविल कोर्ट तय करती है ।

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