पटना चिड़ियाघर में आएगा नया नर जिराफ, वन्यजीव अदला-बदली कार्यक्रम से बढ़ेगी प्रजनन की संभावनाएं
- मैसूर चिड़ियाघर से लाया जाएगा नर जिराफ, रक्तवंश परिवर्तन के जरिए संरक्षण योजना को मिलेगा बल
- मादा जिराफ ‘शांति’ की विरासत को आगे बढ़ाने की तैयारी, पटना चिड़ियाघर में वर्तमान में हैं चार जिराफ
पटना। राजधानी स्थित संजय गांधी जैविक उद्यान में वन्यजीव संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। चिड़ियाघर प्रशासन ने वन्यजीव अदला-बदली कार्यक्रम के तहत कर्नाटक के मैसूर चिड़ियाघर से एक नर जिराफ लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य जिराफों के रक्तवंश में विविधता लाना तथा उनके प्रजनन कार्यक्रम को अधिक प्रभावी बनाना है। चिड़ियाघर प्रशासन का मानना है कि नए नर जिराफ के आगमन से जिराफों की आबादी बढ़ाने और स्वस्थ प्रजनन को प्रोत्साहित करने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही यह पहल वन्यजीव संरक्षण की दीर्घकालिक योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कोलकाता से नहीं मिली अपेक्षित प्रतिक्रिया
जानकारी के अनुसार प्रारंभिक स्तर पर पटना चिड़ियाघर प्रशासन ने कोलकाता चिड़ियाघर से नर जिराफ लाने को लेकर बातचीत की थी। हालांकि वहां से अपेक्षित सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण अब मैसूर चिड़ियाघर से संपर्क स्थापित किया गया है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी प्रजाति के स्वस्थ संरक्षण के लिए समय-समय पर रक्तवंश परिवर्तन आवश्यक माना जाता है। इससे आनुवंशिक विविधता बनी रहती है और प्रजनन क्षमता में सुधार होता है। इसी उद्देश्य से नर जिराफ को पटना लाने की योजना बनाई गई है।
वन्यजीव अदला-बदली कार्यक्रम के तहत होगा आदान-प्रदान
चिड़ियाघर प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि मैसूर चिड़ियाघर की ओर से मांग की जाती है तो पटना से एक मादा जिराफ शावक को वहां भेजा जा सकता है। वर्तमान में पटना चिड़ियाघर में तीन वर्ष की आयु वाली मादा जिराफ उपलब्ध है, जिसे वन्यजीव अदला-बदली कार्यक्रम के तहत भेजे जाने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम देश के विभिन्न चिड़ियाघरों के बीच सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूत करते हैं।
पटना चिड़ियाघर में चार जिराफ मौजूद
वर्तमान समय में पटना चिड़ियाघर में कुल चार जिराफ हैं। इनमें दो वयस्क और दो शावक शामिल हैं। वयस्क जिराफों में एक नर और एक मादा है, जबकि दोनों शावकों में भी एक नर और एक मादा शामिल हैं। वयस्क नर जिराफ का नाम भीमा है, जबकि मादा जिराफ का नाम सृष्टि है। इनके अलावा दो शावक भी चिड़ियाघर में मौजूद हैं, जो यहां आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
‘शांति’ की मृत्यु के बाद बदली स्थिति
इसी वर्ष फरवरी माह में पटना चिड़ियाघर को उस समय बड़ा झटका लगा था, जब मादा जिराफ ‘शांति’ की मृत्यु हो गई थी। शांति की आयु लगभग 21 वर्ष थी और वह चिड़ियाघर की सबसे महत्वपूर्ण जिराफों में गिनी जाती थी। चिड़ियाघर प्रशासन ने प्रारंभिक जांच में उसकी मृत्यु का कारण गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं को बताया था। शांति की मौत के बाद जिराफ प्रजनन कार्यक्रम को लेकर नई रणनीति तैयार करने की आवश्यकता महसूस की गई थी।
शांति ने दी थी कई संतानों को जन्म
मादा जिराफ शांति का जीवन पटना चिड़ियाघर के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। उसका जन्म 20 जुलाई 2005 को अमेरिका के सेन डियागो चिड़ियाघर में हुआ था। वर्ष 2006 में उसे वन्यजीव अदला-बदली कार्यक्रम के तहत पटना चिड़ियाघर लाया गया था। पटना पहुंचने के बाद शांति ने वर्ष 2011 में अपने पहले शावक ‘नव्या’ को जन्म दिया। इसके बाद वर्ष 2011 से 2023 के बीच उसने कुल छह संतानों को जन्म दिया। इन संतानों ने देश में जिराफ संरक्षण कार्यक्रम को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देश के अन्य चिड़ियाघरों को भी मिली संताने
पटना चिड़ियाघर में जन्मे जिराफ शावकों को देश के कई प्रमुख चिड़ियाघरों में भेजा गया है। इनमें भुवनेश्वर का नंदनकानन चिड़ियाघर, असम का गुवाहाटी चिड़ियाघर तथा कर्नाटक का मैसूर चिड़ियाघर प्रमुख हैं। इससे पटना चिड़ियाघर देश में जिराफ प्रजनन और संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल हो गया है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यहां विकसित की गई प्रजनन व्यवस्था ने राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण प्रयासों को मजबूती प्रदान की है।
संरक्षण कार्यक्रम को मिलेगी नई ऊर्जा
विशेषज्ञों का कहना है कि नए नर जिराफ के आगमन से पटना चिड़ियाघर के जिराफ संरक्षण कार्यक्रम को नई ऊर्जा मिलेगी। रक्तवंश में विविधता आने से स्वस्थ संतानों के जन्म की संभावना बढ़ेगी और दीर्घकालिक संरक्षण लक्ष्य हासिल करने में सहायता मिलेगी। चिड़ियाघर प्रशासन को उम्मीद है कि वन्यजीव अदला-बदली कार्यक्रम के माध्यम से न केवल जिराफों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की जा सकेंगी। आने वाले समय में यह पहल पटना चिड़ियाघर को देश के अग्रणी वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में और अधिक मजबूत पहचान दिला सकती है।


