राबड़ी आवास विवाद और सुरक्षा कटौती पर तेज हुई सियासत, लालू परिवार और सरकार आमने-सामने

  • सुरक्षा में कमी और बंगला खाली करने के नोटिस पर लालू यादव का हमला, बोले- “सब कुछ नीतीश कुमार करवा रहे हैं”
  • सरकार ने 15 दिन का अल्टीमेटम दिया, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया

पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास और लालू परिवार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव तथा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच बयानबाजी का दौर लगातार जारी है। सरकारी आवास खाली करने के नोटिस और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद यह मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। हाल ही में सिंगापुर से लौटने के बाद लालू प्रसाद यादव ने सुरक्षा में कटौती और आवास विवाद को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा हटा ली गई है और इसके पीछे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका है। लालू यादव ने आरोप लगाया कि पूरा घटनाक्रम राजनीतिक उद्देश्य से किया जा रहा है। इससे पहले दिल्ली हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि कुछ लोग उनके खिलाफ दुर्भावना से काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। दोनों नेताओं का कहना है कि विपक्ष की आवाज को दबाने और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। इस पूरे विवाद के बीच लालू यादव की पुत्री और सांसद मीसा भारती ने भी सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को जनता का भरपूर समर्थन प्राप्त है और उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है। मीसा भारती ने यह भी कहा कि वह अपनी सुरक्षा व्यवस्था वापस करने पर विचार कर रही हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि परिवार निर्धारित समय सीमा के भीतर सरकारी आवास खाली कर देगा। दूसरी ओर, भवन निर्माण विभाग की ओर से जारी नोटिस के अनुसार राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का निर्देश दिया गया है। विभाग का कहना है कि उन्हें पहले ही 39 हार्डिंग रोड स्थित नया सरकारी आवास आवंटित किया जा चुका है। इसके बावजूद कई महीनों से पुराने आवास को खाली नहीं किया गया है। विभाग ने पहले भी कई बार नोटिस जारी कर आवास खाली करने का अनुरोध किया था। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार लालू परिवार वर्ष 2005 से इस सरकारी आवास में रह रहा है। राबड़ी देवी को पूर्व मुख्यमंत्री और बाद में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते यह आवास मिला था। हालांकि अब नए आवास के आवंटन के बाद विभाग चाहता है कि निर्धारित नियमों के अनुसार पुराने आवास को खाली कर दिया जाए। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब राबड़ी देवी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे किसी भी कीमत पर आवास खाली नहीं करेंगी और यदि सरकार चाहती है तो बलपूर्वक उन्हें हटाने की कार्रवाई करे। इस बयान के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं है और नियमों का पालन सभी को करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में किसी को भी सरकारी संपत्ति पर स्थायी अधिकार नहीं मिल सकता। मुख्यमंत्री के बयान के बाद लालू परिवार की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। तेज प्रताप यादव ने सामाजिक माध्यम पर लिखा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को मर्यादित और सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियां उचित नहीं हैं। उन्होंने अपनी माता राबड़ी देवी के प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील की। इस बीच सुरक्षा व्यवस्था में किए गए बदलाव ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है। बिहार सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की उच्च श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था में परिवर्तन किया है। इसके विरोध में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था लौटाने की घोषणा की। राबड़ी देवी ने अपने आवास से तैनात सुरक्षाकर्मियों को हटाने का निर्देश दिया, जिसके बाद बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उनके आवास पर जुटने लगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है। एक ओर सरकार इसे प्रशासनिक और नियम आधारित कार्रवाई बता रही है, जबकि दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल इसे राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण बता रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सभी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि लालू परिवार कब तक सरकारी आवास खाली करता है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है। फिलहाल राबड़ी आवास विवाद और सुरक्षा कटौती का मुद्दा बिहार की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर सियासी संघर्ष और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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