पटना में महिला सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, छेड़खानी और धमकी के मामले ने बढ़ाई चिंता

  • अनीसाबाद में युवती से बदसलूकी, कपड़े फाड़ने और तेजाब फेंकने की धमकी का आरोप
  • पीएमसीएच में महिला चिकित्सक ने सह प्राध्यापक पर अभद्र व्यवहार का लगाया आरोप, जांच समिति गठित

पटना। राजधानी पटना में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर में सामने आए दो अलग-अलग मामलों ने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पहला मामला अनीसाबाद क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक युवती ने छेड़खानी, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरा मामला पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) से सामने आया है, जहां एक महिला चिकित्सक ने अपने वरिष्ठ सहकर्मी पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया है। दोनों घटनाओं ने राजधानी में महिला सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जानकारी के अनुसार अनीसाबाद इलाके में रहने वाली 25 वर्षीय युवती ने महिला थाना में दर्ज कराई गई शिकायत में कहा है कि 21 मई की शाम वह अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान अनीसाबाद मोड़ के पास पहले से मौजूद एक युवक ने उसका रास्ता रोक लिया। पीड़िता का आरोप है कि युवक ने जबरन उसका हाथ पकड़ लिया और विरोध करने पर गाली-गलौज तथा मारपीट शुरू कर दी। युवती के अनुसार आरोपी ने सार्वजनिक स्थान पर उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उसके कपड़े भी फाड़ दिए। घटना के दौरान जब आसपास के लोगों का ध्यान इस ओर गया और भीड़ जुटने लगी, तब आरोपी मौके से फरार हो गया। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। स्थानीय लोगों ने युवती को सहायता प्रदान की और उसे शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद भी उसकी परेशानियां समाप्त नहीं हुईं। उसने कहा कि आरोपी और उसके परिजनों की ओर से लगातार फोन कर धमकियां दी जा रही हैं। शिकायत के अनुसार उसे तेजाब फेंकने, अपहरण करने और जान से मारने की धमकी दी गई है। इन धमकियों के कारण युवती और उसके परिवार में भय का वातावरण बना हुआ है। पीड़िता का कहना है कि वह घर से बाहर निकलने में भी असुरक्षित महसूस कर रही है। महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि घटना को कई दिन बीत जाने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इससे पीड़िता और उसके परिजनों में नाराजगी है। परिवार का कहना है कि आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी होनी चाहिए ताकि उन्हें सुरक्षा का भरोसा मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसी बीच राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में भी महिला सम्मान से जुड़ा एक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां कार्यरत एक महिला चिकित्सक ने शल्य चिकित्सा विभाग के एक सह प्राध्यापक पर अभद्र व्यवहार करने, अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने और धक्का देने का आरोप लगाया है। मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। पीएमसीएच प्रशासन ने आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. गीता सिन्हा को सौंपी गई है। प्रशासन के अनुसार समिति दोनों पक्षों से बातचीत कर पूरे मामले की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सूत्रों के अनुसार समिति अपनी पहली बैठक में महिला चिकित्सक और आरोपित सह प्राध्यापक दोनों का पक्ष सुनेगी। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इन दोनों घटनाओं ने राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और कार्यस्थल पर सम्मान के मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध और उत्पीड़न के मामलों में त्वरित कार्रवाई आवश्यक है ताकि पीड़ितों का विश्वास बना रहे और अपराधियों के मन में कानून का भय उत्पन्न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है। महिलाओं के खिलाफ होने वाली घटनाओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई ही ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगा सकती है। फिलहाल दोनों मामलों की जांच जारी है। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं पीड़ित पक्ष न्याय और सुरक्षा की मांग कर रहा है। राजधानी में सामने आई ये घटनाएं महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता की ओर संकेत करती हैं।

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