राबड़ी आवास विवाद पर तेज हुई सियासत, राजद ने सरकार पर लगाया विपक्ष को निशाना बनाने का आरोप
- सरकारी बंगला खाली कराने के नोटिस के खिलाफ मुखर हुआ लालू परिवार, राजद ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर उठाए सवाल
- मंत्री नंदकिशोर राम बोले- नियमों के तहत हुआ आवास आवंटन, सभी को कानून का पालन करना चाहिए
पटना। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने के नोटिस को लेकर बिहार की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया है कि सत्ता पक्ष राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से विपक्ष को निशाना बना रहा है। सोमवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि सत्ताधारी दल यह मानकर चल रहा है कि विपक्ष का काम केवल सरकार की हर बात का समर्थन करना है। यदि कोई दल सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है या विरोध दर्ज करता है तो उसे विभिन्न माध्यमों से परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार को राज्य की गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए था, लेकिन वह विपक्षी नेताओं को लक्ष्य बनाने में अधिक रुचि दिखा रही है। राजद नेता ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और आलोचना की अपनी अहम भूमिका होती है। यदि विपक्ष अपनी बात रखता है तो उसे दबाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को यह संदेश देना चाहती है कि यदि कोई विरोध करेगा तो उसकी सुविधाएं छीन ली जाएंगी। सिद्दीकी ने कहा कि यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उचित नहीं है। इस बीच राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर लालू परिवार भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। तेजप्रताप यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया जा रहा है तो पूर्व मुख्यमंत्री रहे अन्य नेताओं पर भी समान नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना सरकारी आवास खाली करना चाहिए। उनके अनुसार यदि ऐसा होता है तो राबड़ी देवी भी इस विषय पर आगे विचार कर सकती हैं। राबड़ी देवी वर्तमान में 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास में रह रही हैं। भवन निर्माण विभाग द्वारा उन्हें यह आवास खाली करने का नोटिस दिया गया है। विभाग का कहना है कि यह आवास अब बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है। सरकार के अनुसार राबड़ी देवी को पहले ही वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जा चुका है, इसलिए नियमानुसार उन्हें नया आवास ग्रहण करना चाहिए। आवास विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। राजद नेताओं का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि विपक्ष को दबाने का प्रयास है। पार्टी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री आवास का विस्तार वर्षों से होता रहा है और इस पर किसी प्रकार की चर्चा नहीं की जाती, जबकि विपक्षी नेताओं के मामलों को प्रमुखता से उठाया जाता है। दूसरी ओर मंत्री नंदकिशोर राम ने पूरे मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्हें बिहार सरकार द्वारा नियमों के अनुसार आवास आवंटित किया गया है। उन्होंने कहा कि मंत्री बनने के बाद उनके पास कोई सरकारी आवास उपलब्ध नहीं था, इसलिए विभाग ने नियमानुसार यह आवास उनके नाम आवंटित किया है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यदि सरकार ने किसी आवास का वैधानिक रूप से आवंटन कर दिया है तो उसे खाली करने में आपत्ति क्यों होनी चाहिए। नंदकिशोर राम ने यह भी कहा कि वह अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं और जनता के प्रतिनिधि के रूप में राज्य की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं के पालन का है। सभी को कानून और प्रशासनिक व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी राजनीतिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है। एक ओर सरकार इसे प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है तो दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। फिलहाल राबड़ी आवास विवाद ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और विपक्ष के बीच जारी यह टकराव आगे किस दिशा में बढ़ता है और इस मामले का अंतिम समाधान किस रूप में सामने आता है।


