बिहार का बड़ा दवा माफिया नीरज गिरफ्तार, नकली और प्रतिबंधित दवाओं के नेटवर्क पर पुलिस का बड़ा प्रहार
- हाजीपुर से हुई गिरफ्तारी, कई राज्यों तक फैला था नशीली दवाओं और नकली औषधियों का कारोबार
- एक दर्जन से अधिक मामलों का आरोपी, वर्षों से सक्रिय गिरोह के मास्टरमाइंड पर पुलिस का शिकंजा
पटना। बिहार में प्रतिबंधित और नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे कथित दवा माफिया नीरज को पुलिस ने वैशाली जिले के हाजीपुर से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार नीरज राज्य में नशीली दवाओं, प्रतिबंधित कफ सिरप और एक्सपायर्ड दवाओं के अवैध कारोबार का प्रमुख संचालक माना जाता है। उसकी गिरफ्तारी को बिहार में अवैध दवा कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार नीरज के खिलाफ राज्य के विभिन्न थानों में एक दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए पटना के पूर्वी पुलिस अधीक्षक परिचय कुमार की निगरानी में विशेष टीम का गठन किया गया था। इस टीम में कई अनुभवी पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि नीरज दिल्ली से हाजीपुर पहुंचा है। इसी सूचना के आधार पर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि पटना में पुलिस की लगातार कार्रवाई के बाद नीरज ने अपने अवैध कारोबार का केंद्र बदलने की कोशिश की थी। बताया जाता है कि उसने हाजीपुर और आसपास के क्षेत्रों में अपना नया नेटवर्क विकसित करना शुरू कर दिया था। हालांकि वह लगातार स्थान बदलता रहता था और गुप्त रूप से कारोबार संचालित कर रहा था। पुलिस पिछले लगभग एक महीने से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी। जांच एजेंसियों के अनुसार नीरज का नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं था। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से भी उसका संपर्क जुड़ा हुआ था। वह परिवहन माध्यमों के जरिए प्रतिबंधित कफ सिरप, नशीले इंजेक्शन और अन्य संदिग्ध दवाएं मंगवाता था। बाद में इन दवाओं को पटना, हाजीपुर, राघोपुर और बिहार के अन्य जिलों में सप्लाई किया जाता था। पुलिस के अनुसार नीरज और उसके सहयोगियों ने अवैध दवा कारोबार की एक पूरी आपूर्ति श्रृंखला विकसित कर रखी थी। गिरोह कथित रूप से विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड दवाएं खरीदता था। इन दवाओं को गोदामों में जमा कर उनके पुराने रैपर हटाए जाते थे और उनकी जगह नए लेबल तथा पैकेजिंग लगाकर बाजार में बेचा जाता था। इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न होने की आशंका थी। पिछली छापेमारियों के दौरान पुलिस ने नीरज से जुड़े ठिकानों से सरकारी अस्पतालों के लिए चिन्हित दवाएं भी बरामद की थीं। इसके अलावा विषरोधी सीरम और अन्य संवेदनशील दवाओं के मिलने की भी जानकारी सामने आई थी। पुलिस का दावा है कि इन दवाओं का उपयोग गलत तरीके से किया जा रहा था और कुछ मामलों में उनका दुरुपयोग नशे के रूप में भी हो रहा था। नीरज मूल रूप से पटना के पीरबहोर क्षेत्र का रहने वाला है। उसके खिलाफ पीरबहोर, चित्रगुप्त नगर और अगमकुआं थानों में कई मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार उसके नेटवर्क का विस्तार पीरबहोर, जीएम रोड दवा मंडी, बाईपास क्षेत्र, भागवत नगर, रामकृष्णा नगर, पत्रकार नगर, कंकड़बाग और पटना सिटी सहित कई इलाकों तक फैला हुआ था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार नीरज वर्ष 2017 से पहले से ही इस अवैध कारोबार में सक्रिय था। उस समय भी उसके ठिकानों पर छापेमारी के दौरान लाखों रुपये मूल्य की प्रतिबंधित दवाएं बरामद की गई थीं। इनमें कोडीन युक्त कफ सिरप, नशीले इंजेक्शन और अन्य संदिग्ध औषधियां शामिल थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि नीरज अपने सहयोगी रवि के साथ मिलकर इस नेटवर्क का संचालन करता था। फिलहाल रवि फरार बताया जा रहा है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि रवि की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे नेटवर्क के कई और अहम राज खुल सकते हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नीरज की गिरफ्तारी से बिहार में अवैध दवा कारोबार को बड़ा झटका लगा है। पूछताछ के दौरान उससे प्राप्त जानकारियों के आधार पर अन्य सहयोगियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं तथा अवैध दवा कारोबार से जुड़े कई अन्य लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।


