जमीन कब्जा कांड में जदयू विधायक पप्पू पांडे को फिलहाल राहत, गिरफ्तारी पर रोक बरकरार

  • अदालत ने अगली सुनवाई 3 जून को तय की, पुलिस ने पेश किए नए साक्ष्य और दस्तावेज
  • करीब 16 एकड़ जमीन कब्जाने, भू-माफियाओं को संरक्षण देने और धमकी देने के आरोपों से घिरा मामला

गोपालगंज। चर्चित बेलवा जमीन कब्जा कांड में जनता दल यूनाइटेड के विधायक अमरेंद्र कुमार पांडे उर्फ पप्पू पांडे को फिलहाल अदालत से बड़ी राहत मिली है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक को बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई की तारीख 3 जून निर्धारित कर दी है। इस फैसले के बाद फिलहाल विधायक की गिरफ्तारी टल गई है, लेकिन पुलिस द्वारा अदालत में नए साक्ष्य और दस्तावेज पेश किए जाने के बाद इस पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। यह पूरा मामला गोपालगंज जिले के कुचायकोट थाना क्षेत्र स्थित बेलवा गांव से जुड़ा हुआ है। विधायक पप्पू पांडे पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से करीब 16 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कराने में भूमिका निभाई। आरोप यह भी है कि इस पूरे प्रकरण में भू-माफियाओं को संरक्षण दिया गया और विरोध करने वाले लोगों को धमकाया गया। मामले के सामने आने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने इसकी गंभीरता से जांच शुरू कर दी थी। अब इस मामले में लगातार नए तथ्य सामने आने से विवाद और गहराता जा रहा है। सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत के समक्ष कई नए दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां जमीन कब्जा नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका को विस्तार से खंगाल रही हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे प्रकरण में किन-किन लोगों की भागीदारी रही और किस स्तर पर कथित संरक्षण प्रदान किया गया। बताया जा रहा है कि जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे मामले का दायरा और बढ़ सकता है। वहीं विधायक पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और भारतीय विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष मनन मिश्रा की अस्वस्थता का हवाला देते हुए अदालत से समय की मांग की गई। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 3 जून तय कर दी। गोपालगंज बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि इस मामले में पहले भी मनन मिश्रा द्वारा पक्ष रखा गया था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वे इस बार उपस्थित नहीं हो सके। इसी वजह से अदालत से अतिरिक्त समय मांगा गया। हालांकि अदालत से राहत मिलने के बावजूद विधायक पप्पू पांडे की मुश्किलें पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। पुलिस द्वारा नए साक्ष्य पेश किए जाने के बाद अब यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां जमीन से जुड़े दस्तावेजों, लेन-देन और कथित कब्जे की प्रक्रिया की भी बारीकी से जांच कर रही हैं। स्थानीय प्रशासन भी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। बेलवा गांव में जमीन विवाद को लेकर पहले भी कई बार तनाव की स्थिति बन चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों द्वारा जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई थी। विरोध करने वालों को कथित रूप से डराया-धमकाया गया। हालांकि विधायक पक्ष लगातार इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहा है। उनका कहना है कि उन्हें साजिश के तहत फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। इस मामले के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर सरकार और सत्तारूढ़ दल पर निशाना साध रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रभावशाली नेताओं और भू-माफियाओं के गठजोड़ के कारण आम लोगों की जमीन सुरक्षित नहीं रह गई है। वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। गोपालगंज समेत पूरे बिहार में इस मामले को लेकर लोगों की नजरें अब 3 जून की अगली सुनवाई पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में अदालत पुलिस द्वारा पेश किए गए नए साक्ष्यों और दस्तावेजों पर विस्तार से विचार कर सकती है। साथ ही इस बहुचर्चित जमीन कब्जा मामले में आगे की कानूनी दिशा भी तय हो सकती है। फिलहाल अदालत से मिली राहत के बाद विधायक पक्ष ने राहत की सांस ली है, लेकिन जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहने से आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक राजनीतिक तथा कानूनी रूप से अहम बन सकता है।

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