मलमास मेले में प्रशासन की सख्ती के खिलाफ बगावत, थियेटर-सर्कस और झूले बंद होने से फीकी पड़ी रौनक

  • झूले से युवक की मौत के बाद प्रशासन ने बढ़ाई सख्ती, समय सीमा के विरोध में संचालकों की हड़ताल
  • श्रद्धालु और सैलानी लौटे मायूस, प्रशासन और संचालकों के बीच गतिरोध खत्म कराने की कोशिश जारी

राजगीर। विश्व प्रसिद्ध मलमास मेले में एक युवक की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन और मेला संचालकों के बीच टकराव गहरा गया है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के नाम पर लगाए गए नए प्रतिबंधों के विरोध में थियेटर, सर्कस, झूला, जादू शो और अन्य मनोरंजन साधनों के संचालकों ने बगावती तेवर अपना लिए हैं। मंगलवार शाम से संचालकों ने सामूहिक रूप से मनोरंजन के सभी प्रमुख साधनों को बंद कर दिया, जिसके कारण मेले की रौनक अचानक फीकी पड़ गई। दूर-दराज से मनोरंजन और मेले का आनंद लेने पहुंचे श्रद्धालुओं और सैलानियों को मायूस होकर लौटना पड़ा। हालांकि देर शाम कुछ संचालकों ने प्रशासनिक सख्ती के बावजूद अपने स्तर पर कुछ झूलों का संचालन शुरू कर दिया, लेकिन अधिकांश मनोरंजन केंद्र बंद ही रहे। मेले में जहां पहले रात होते ही चहल-पहल और रोशनी का माहौल रहता था, वहां अब सन्नाटा और नाराजगी दिखाई देने लगी है। इस पूरे विवाद की शुरुआत सोमवार देर रात हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद हुई। मेले में लगे ‘सुनामी’ झूले से गिरकर 18 वर्षीय युवक अमन कुमार की मौत हो गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक झूले की ऊंचाई से नीचे गिर पड़ा, जिससे उसकी मौके पर ही गंभीर चोट लग गई। आनन-फानन में उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पूरे मेले में अफरा-तफरी मच गई थी। प्रशासन द्वारा कराई गई शुरुआती जांच में सामने आया कि जिस झूले पर हादसा हुआ, वह बिना प्रशासनिक अनुमति के संचालित किया जा रहा था। जांच में यह भी पता चला कि झूले की सुरक्षा बेल्ट टूट गई थी, जिसके कारण युवक नीचे गिरा। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने तत्काल बड़े झूलों के संचालन पर रोक लगा दी और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने का निर्देश जारी किया। इसी के साथ प्रशासन ने मनोरंजन साधनों के संचालन के लिए रात 11:30 बजे तक की समय सीमा तय कर दी। प्रशासन का तर्क है कि देर रात तक झूलों और अन्य साधनों के संचालन से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है और हादसों की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन मेला संचालकों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। संचालकों का कहना है कि मलमास मेले में सबसे अधिक भीड़ रात के समय उमड़ती है और यदि संचालन का समय सीमित कर दिया जाएगा तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उनका आरोप है कि प्रशासन बिना उनकी बात सुने एकतरफा फैसले ले रहा है। संचालकों ने मांग की है कि उन्हें पूरी रात संचालन की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपने व्यवसाय को नुकसान से बचा सकें। प्रशासनिक आदेशों से नाराज संचालकों ने एकजुट होकर मंगलवार शाम से सामूहिक हड़ताल शुरू कर दी। इसके तहत थियेटर, सर्कस, झूले, जादू शो और अन्य तमाशों के शटर गिरा दिए गए। मनोरंजन के साधनों के बंद होने से मेले में पहुंचे लोगों को भारी निराशा का सामना करना पड़ा। कई परिवार बच्चों के साथ मेले में मनोरंजन की उम्मीद लेकर पहुंचे थे, लेकिन साधन बंद मिलने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी कीमत पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजगीर अनुमंडल पदाधिकारी सूर्य प्रकाश गुप्ता ने कहा कि युवक की मौत के बाद केवल बड़े झूलों के संचालन पर रोक लगाई गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने थियेटर या छोटे मनोरंजन साधनों को बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया है। उनके अनुसार संचालकों ने अपनी मर्जी से यह बंदी की है। अनुमंडल पदाधिकारी ने कहा कि प्रशासन लगातार संचालकों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि समाधान निकाला जा सके और मेले में सामान्य स्थिति बहाल हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और बिना अनुमति या सुरक्षा व्यवस्था के कोई भी झूला संचालित नहीं होने दिया जाएगा। मलमास मेला बिहार की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में मनोरंजन साधनों के बंद होने से मेले की चमक फीकी पड़ गई है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन और संचालकों के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कोई समाधान निकल जाएगा और मेले की रौनक फिर से लौटेगी।

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