डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को फिर मिली पैरोल, 30 दिनों के लिए जेल से आया बाहर

  • साध्वियों से दुष्कर्म मामले में सजा काट रहा डेरा प्रमुख कड़ी सुरक्षा के बीच सिरसा आश्रम पहुंचा
  • अब तक 16 बार मिली पैरोल और अस्थायी रिहाई, सजा के 3193 दिनों में 406 दिन जेल से बाहर बिताए

चंडीगढ़। हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर पैरोल मिल गई है। रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे राम रहीम को इस बार 30 दिनों की पैरोल दी गई है। मंगलवार सुबह करीब सात बजे वह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेल से बाहर निकला और सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ। इस दौरान पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। गुरमीत राम रहीम को इस वर्ष दूसरी बार पैरोल दी गई है। इससे पहले भी वह कई बार पैरोल और अस्थायी रिहाई पर जेल से बाहर आ चुका है। डेरा प्रमुख वर्ष 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। उसे दो महिला साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो अदालत ने दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद देशभर में व्यापक चर्चा हुई थी और हरियाणा समेत कई राज्यों में तनावपूर्ण स्थिति भी पैदा हो गई थी। अदालत के निर्णय के बाद उसे जेल भेज दिया गया था, जहां वह लगातार सजा काट रहा है। गुरमीत राम रहीम के खिलाफ केवल दुष्कर्म का मामला ही नहीं था, बल्कि दो हत्या मामलों में भी उसे दोषी ठहराया गया था। वर्ष 2019 में पत्रकार रामचंदर छत्रपति की हत्या के मामले में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद वर्ष 2021 में डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या की साजिश रचने के मामले में भी अदालत ने उसे दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। हालांकि बाद के वर्षों में इन मामलों में कानूनी स्थिति बदली। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने वर्ष 2024 में रणजीत सिंह हत्या मामले में गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया। इसके बाद वर्ष 2026 में पत्रकार रामचंदर छत्रपति हत्या मामले में भी उसे राहत मिल गई और अदालत ने उसे दोषमुक्त घोषित कर दिया। इसके बावजूद साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में उसकी 20 वर्ष की सजा बरकरार है। जानकारी के अनुसार गुरमीत राम रहीम अब तक 15 बार पैरोल और अस्थायी रिहाई का लाभ ले चुका है। यह उसकी 16वीं पैरोल मानी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार वह अपनी कुल 3193 दिनों की सजा में से लगभग 406 दिन जेल से बाहर बिता चुका है। इस बार 30 दिनों की पैरोल मिलने के साथ ही वर्ष 2026 के लिए निर्धारित 10 सप्ताह की पैरोल अवधि पूरी हो गई है। हरियाणा सरकार के अच्छे आचरण वाले बंदियों की अस्थायी रिहाई अधिनियम, 2022 के तहत किसी भी कैदी को एक वर्ष में कुल 10 सप्ताह तक पैरोल का लाभ दिया जा सकता है। यह अवधि दो हिस्सों में ली जा सकती है। इसी कानून के अंतर्गत इस वर्ष जनवरी महीने में गुरमीत राम रहीम को 40 दिनों की पैरोल दी गई थी। अब 30 दिनों की नई पैरोल के साथ उसकी कुल निर्धारित अवधि पूरी हो चुकी है। कानून के अनुसार बंदियों को तीन सप्ताह की फरलो यानी अस्थायी रिहाई का अतिरिक्त प्रावधान भी मिलता है। यह रिहाई अलग-अलग हिस्सों में नहीं ली जा सकती। सूत्रों के अनुसार डेरा प्रमुख इस वर्ष तीन सप्ताह की फरलो लेने का भी पात्र माना जा सकता है। गुरमीत राम रहीम की हर बार होने वाली रिहाई राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन जाती है। विपक्षी दल और कई सामाजिक संगठन लगातार सवाल उठाते रहे हैं कि गंभीर मामलों में दोषी करार दिए गए व्यक्ति को इतनी बार पैरोल और अस्थायी रिहाई कैसे मिल रही है। वहीं डेरा समर्थक इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताते हैं और हर बार बड़ी संख्या में अपने प्रमुख के समर्थन में सामने आते हैं। इस बार भी डेरा प्रमुख के सिरसा पहुंचने को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क दिखाई दिया। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। डेरा परिसर के आसपास पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई और आने-जाने वाले लोगों पर निगरानी रखी गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गुरमीत राम रहीम की रिहाई हर बार सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं को जन्म देती है। खासकर हरियाणा और पंजाब की राजनीति में डेरा सच्चा सौदा का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। ऐसे में उनकी पैरोल को लेकर अक्सर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आती रहती हैं। फिलहाल गुरमीत राम रहीम सिरसा स्थित आश्रम में रहेगा। प्रशासन की ओर से उस पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। वहीं दूसरी ओर एक बार फिर उसकी पैरोल को लेकर देशभर में बहस और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

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